375 लाख गांठ कॉटन पैदा होगी

375 लाख गांठ कॉटन पैदा होगी
मुंबई। अमरीकी कृषि संस्था (यूएसडीए) की भारत के लिए एफएएस की ताजा रिपोर्ट में मार्केटिंग वर्ष 2020-21 में भारत का कॉटन उत्पादन अनुमान 375 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलोग्राम) यानी 64 लाख टन आंका है। भारत में इस साल कपास का रकबा 133 लाख हैक्टेयर पहुंच गया है जो पिछले अनुमान की तुलना में एक लाख हैकटेयर कम है। यूएसडीए ने प्रति हैक्टेयर यील्ड 480 किलोग्राम रहने की भी संभावना जताई है। गुजरात, तेलंगाना में अधिक बारिश एवं महाराष्ट्र में कीट हमले का कपास की फसल पर असर देखा गया। 
एफएएस रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्केटिंग वर्ष 2020-21 में कॉटन की खपत 295 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलोग्राम) यानी 50 लाख टन रहने की उम्मीद है। कॉटन  यार्न और कॉटन फैब्रिक्स की मांग अच्छी होने से निर्यात ऑर्डर बेहतर रहेंगे। रिपोर्ट के अनुसार मार्केटिंग वर्ष 2020-21 में कॉटन निर्यात 61 लाख गांठ रहने का अनुमान है। भारत के कॉटन निर्यात में बढ़ोतरी के अनुमान की वजह इसके दाम कॉटलुक ए इंडेक्स की तुलना में कम बढ़ना है। कॉटलुक ए इंडेक्स कोविड से पहले के लेवल से अधिक बढ़कर 16 फीसदी पहुंच गया है जबकि भारतीय कॉटन के भाव अक्टूबर से अब तक 13 फीसदी बढ़े हैं जो कॉटलुक इंडेक्स की तुलना में कम है। यही वजह है कि भारतीय कॉटन वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनी हुई है एवं सस्ती मिल रही है। 
भारतीय कॉटन यार्न के दाम भी अक्टूबर से 20 फीसदी बढ़े हैं एवं चीन, बांग्लादेश, पेरु, पुर्तगाल और वियतनाम की अच्छी मांग है। भारत का कॉटन आयात 12.8 लाख गांठ रहने की संभावना है। 
रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्केटिंग वर्ष 2020-21 में कॉटन का आरंभिक स्टॉक 120 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलोग्राम) रहने का अनुमान है। इस स्टॉक में सबसे बड़ा हिस्सा कॉटन कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) के पास है।

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