उत्तर भारत में बारिश : गेहूं व सरसों जैसी फसलों के लिए अमृत समान

उत्तर भारत में बारिश : गेहूं व सरसों जैसी फसलों के लिए अमृत समान
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । पिछले दिनों उत्तर भारत में शीतकालीन बारिश अच्छी हुई है।जिससे गेहूं,सरसों सहित कई रबी फसलों व सब्जियों को काफी लाभ पहुंचा है।चूंकि इस समय कई रबी फसलों को सिंचाई की जरुरत थी जिनके लिए यह बारिश की बूंदें अमृत समान साबित हुई है।वहीं इससे रबी फसलों को पाला मारने का भय भी समाप्ज हो गया है।
दरअसल नई दिल्ली के पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के प्रधान विज्ञानी डॉ.जेपीएस डबास ने कहा कि शीतकालीन बारिश ने एक तरफ रबी फसलों के लिए अधिक मेहरबानी दिखाई है और यह अमृत समान है।वहीं दूसरी तरफ जहां थोड़ी कम सिर्फ बूंदाबांदी हुई वहां भी रबी फसलों के लिए वरदान साबित हुई है।ऐसे में सरसों के लिए यह बारिश रामवाण का काम किया है।वहीं गेहूं फसल को भी काफी फायदा हुआ है।ऐसे में किसानों को अब सिंचाई के लिए भूजल का इस्तेमाल नहींह करना पड़ेगा।जिसके तहत रबी फसलों के लिए कम से कम एक बार की सिंचाई की जरुरत नहीं पड़ेगी।वहीं पंजाब के लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञ डॉ.सुखपाल सिंह ने कहा कि इस समय बारिश की बहुत जरुरत थी।इससे किसानों को सिंचाई की जरुरत पूरी हो गई है।ऐसे में रबी फसलों में रोगब लगने की संभावना भी काफी कम हो गई है और अब रबी फसलों के विकास में तेजी जाएगी।वहीं कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि पिंाज व गोभी के लिए यह बारिश लाभदायक रहा है बहरहाल टमाटर व आलू की फसल के लिए खतरे की घंटी है।हालांकि अभी तो हालात ठीक है लेकिन आगामी दिनों में इन फसलों में पछेता झुलसा रोग  लगने की आशंका है।ऐसे में बेहतर होगा कि किसान अभी से सकर्तता बरतें ताकि लक्षण नजर आने पर उपचार की व्यवस्था कर सकेंगे।वहीं शीतकालीन बारिश से दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के वायु प्रदूषण में कमी आई है।जिसको लेकर केद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा जारी एयर क्वालिटी बुलेटिन के तहत गत सप्ताह के शुरु में दिल्ली का एयर इंडेक्स 354 दर्ज किया गया।वहीं पहले दिल्ली का एयर इंडेक्स 443 के साथ ग्रभीर श्रेणी में रहा था।

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