बीडीबी कस्टम्स में भ्रष्टाचार का बड़ा दूषण : हीरा के पार्सल क्लिरेंस के निश्चित है रेट

बीडीबी कस्टम्स में भ्रष्टाचार का बड़ा दूषण : हीरा के पार्सल क्लिरेंस के निश्चित है रेट
विशेष संवाददाता
मुंबई। विश्व में सबसे बड़ा बीकेसी स्थित भारत डायमंड बुर्स (बीडीबी) में कस्टम्स अप्रेजल आफिसर के रूप में पोस्टिंग प्राप्त करने के लिए अनापचारिक रूप से लम्बी वेटिंग लिस्ट चल रही है। लाखों रुपया नजराना अदा करने के बाद यह पोस्टिंग मिलती है, वह भी सिर्फ 6 महीने के लिए ही क्योंकि दूसरे अधिकारी भी पीछे प्रतिक्षा में खड़े ही हø! हर महीने पुराने के जाने पर जो नया अधिकारी आए उसे व्यापारी जानकारी देते हø। जिसने तगड़ी रकम अदा कर पोस्टिंग प्राप्त की हो, उसे अंदर से एक बात का खेद होता है कि `नकद' पर अपेक्षित प्रतिफल प्राप्त करने के जुए कम समय मिला है, जिससे वह उसके पास चेकिंग के लिए आने वाले हीरे के पार्सल को क्लियर करने के लिए तगड़ी वसूली करता है। प्रत्येक आफिसर की मासिक आय 5 से 6 आंकड़ा में होती है, ऐसी जानकारी सूत्रों ने देते हुए बताया कि बीडीबी में से पालिश्ड हीरा के रोज के 700 पार्सल और रफ हीरा के आयात किए गए 300 से 400 पार्सल कस्टम्स के पास जाते हø। यह पार्सल क्लियर करने का रेट भी निश्चित है, जो हजारों रुपया में होता है।
भारत में रफ हीरा का संपूर्ण आयात किया जाता है और कटिंग-पालिशिंग किए गए हीरा का निर्यात बड़े पैमाने पर होता है। बीडीबी कस्टम्स के पास क्लियरेंस के लिए आने वाले इस पार्सल की मात्रा देश में आए अन्य कस्टम्स पोस्ट की तुलना में सबसे ज्यादा होती है।
बीडीबी कस्टम्स में चलता भ्रष्टाचार का यह दूषण पिछले कुछ महीनों में इतना फला-फूला है कि व्यापारी तंग आ गए हø, लेकिन अपने कारोबारी हित को प्राथमिकता देने वाले व्यापारियों में उसका विरोध या शिकायत करने की हिंमत नहीं है। विदेश से आने वाले या निर्यात द्वारा विदेश में ग्राहक को भेजे जाने वाले पार्सल को क्लियर करने में विलंब होने पर उसकी कीमत एक या दूसरे रूप में आयात-निर्यातकों को ही चुकानी पड़ती है।
कुछ आयात-निर्यातकों ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि रिश्वत देने में कोई आनाकानी होने पर पार्सल का क्लियरेंस किसी न किसी बहाने रोक देने अथवा उसकी चेकिंग देर से की जाती है जिसमें नुकसान आखिरकार व्यापार का और व्यापारियों का ही होता है।
जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) सरकार द्वारा गठित संख्या है, लेकिन उस पर हीरे के व्यापारियों का वर्चस्व होने से काउंसिल इस बारे में मौन है। इस संवाददाता ने काउंसिल से जुड़े कुछ सदस्यों के पास इस शिकायत का उल्लेख किया तो उन्होंने इसका ज्यादा महत्व न होने की बात कही।
सूत्रों ने बताया कि अभी कुछ महीने पहले कस्टम्स में हीरा के पार्सल का परीक्षण एक्जामिनर्स द्वारा होता था, तब यह दूषण नाममात्र था, लेकिन सरकार ने एक्जामिनर्स की कड़ी समाप्त कर परीक्षण का काम कस्टम्स अधिकारियों को साøपा तब से यह दूषण काफी बढ़ गया है।
कुछ व्यापारियों ने बीडीबी कस्टम्स में बड़े पैमाने पर चलने वाले भ्रष्टाचार का समर्थन करते हुए कहा कि यदि यह लम्बा चला तो बीडीबी से हीरा का व्यापार मुंबई निकट सूरत में जाता रहेगा, जहां विशाल बुर्स का निर्माण कार्य चल रहा है। सूरत में हीरा का व्यापार करना मुंबई से काफी सस्ता पड़ेगा क्योंकि वहां खर्च कम आता है और पालिशिंग कारखाना वहां काफी होने से व्यापारियों के लिए माल बनवाना वहां लाभप्रद हो सकता है।

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