तिलहनों की उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता

तिलहनों की उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता
हमारे संवाददाता
दैश्विक कारणो से खाद्य तेल भाव भारी फूग गये थे । भारत  में खाद्य तेलो के भारी उंचे भावो पर मांग में आई भारी कमी  का होना बताया जा रहा था । इतनी उंचाई पर भारत में ही नही वरन् वैश्विक मांग भी गिरना स्वाभाविक है । भारत में तो जन मनोवैज्ञानिक स्वभाव है कि सहन शक्ति में कमी आने के बाद पारिवारिक स्थिति और बिगडे,  इससे कम खान-पान या उपयोग में कमी आने लग जाती है । यही हाल तेल का रहा है ं और लगभग आधी खपत खाद्य तेलो की घरों में हो चुकी है । इस तरह मांग की भारी कमी आने पर बाजार व्यापार भाव फूगने पर से गिरने लगते है और यही हाल है कि गत् हप्ते उच्चतम  भाव के बाद थोक भाव  में कुछ गिरावट भावों में रही है । हांलाकि खेरची तरफ अभी प्रभाव नही आया  है । हां खुला तेल व्यापार में उसी रेशो पर कुछ भाव मे ं कुद कमी हुई है । अर्थात विगत् दो हप्ते के बाद सोया तेल भाव भारी उंचे खेरची भाव 135 रू प्रति किलो से  गिरते हुऐ  110-112 रू प्रति किलो पर गत् हप्त थनीचे मे ंआया । वैश्विक वायदा बाजारो में मलेशियन पाम तेल वायदा ने  दिसंबर माह में 3960 तक की उंचाई छू ली थी जिससे पाम तेल भाव थोक में 1270-1275 रू तक पहुच चुके थे जो कि गत् हप्ते  1015-1020 रू तक मुंबई का भाव बताया जा रहा था । । समर्थन मे ंअन्य तेल भाव भी उंचाईया छू गये थे  उनमें भी गिरावट होना स्वाभाविक थी । ।  भारी फूगे भाव पर वैविक मांग में भारी कमी आई । चीन अपनी आर्थिक हालत से जूझाते हुऐ पाम तेल की आयात में कमी कर चुका था इससे जनवरी माह में मलेशिया पाम तेल के निर्यात में कोइz 43 प्रतिशत तक गिरावट का होना बताया गया । इससे रिंगिट में भारी गिरावट होकर गत् हप्ते शुक्रवार तक 3300 के आसपास होना बताई जारही थी । हांलाकि गत् हप्ते  सोमवार को मलेशियन केएलसी भारी मजबूती मे ंखुली थी मगर उसके बाद वहां वायदा मे भारी गिरावट बढती गई । हांलाकि गुरूवार को पुन: तेज रहा मगर गत् हप्ते शुक्रवार को सप्ताहांत  में भी केएलसी  सुबह मायनस 26 पाइंट नीचे मंदी मे खुली । इससे  सीबॉट वायदा भी गिरता रहा और भारतीय एमसीएक्स मे भी गिरावट बनती चली गई । मलेशिया पाम तेल मे ंगिरावट के चलते एमसीएक्स सीपीओ में गिरावट  का दौर जारी है ।  अर्थात वायदा मे ं पाम सीपीओ की फरवरी गिरावट में 915 से 920 तक गिर सकता है ।   पिछले एक पखवाडे से खाद्य तेलो की मांग में आई भारी मांग में  कमी से  काई 125 रू तक की थोक भाव गिरावट हो चुकी है ।  सोया तेल भाव हाजिर खुले में 1215  रू तक छोटे व्यापारियो ने माल उठाया था जो कि गत् हप्ते की आखर खरीद में 1085 रू तक के अंतिम भाव थे ।  छोटे व्यापारियो के अनुसार अब भाव 1050 रू  तक या इससे  कुछ हल्के उंचे  में लंबे रह सकने की धारणा है यदि सरकार द्वाारा किसी प्रकार का आयात-निर्यात कर हस्तक्षेप नही हुआ तो ।  
व्यापारिक क्षैत्रो से मिली खबर अनुसार भारत मे  खाद्य तेल की निर्भरता आयात पर अधि बढती जा रही है जो कि लगभग 70 प्रतिशत तक हो गई है  बताया जा रहा है । भारत में  तेलो की उत्पादकता बढाने के प्रयास जरूरी है । भारत के साल्वेंट एक्सट्रेक्शन एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष वी.बी.मेहता के अनुसार सरकार को आगामी बजट में भारत में तिलहनो की उत्पादकता बढाने पर अधिक जोर देना चाहिये जिससे  खाद्य तेलो पर आयात निर्भरता मे कमी आऐ  । भारत में तिलहन की उत्पादकता 28-30 मिलियन टन प्रति वर्ष की है जो स्थिर है । उन्हाने कहा कि उत्पादन लगभग 1500 किलो प्रति हैक्टेयर की उत्पादकता जरूरी है जिससे भारत खाद्य तेलो में अमनिर्भर हो सके । गत् हप्ते  सोयाबीन भी उंचे भाव 4750 से गिरते हुऐ 4550 से 4600 रू तक होना बताया जा रहा था । सरसों तेल में भी गत् हप्ते  थोक भाव मे ंगिरावट का होना बताया जा रहा है ।  वर्तमान मे ंबाजार में सरसों का भाव 6325 से 6375 रू  मुंगफली दाना 5560 से 5625 रू  सरसों तेल कच्ची घानी का भाव 1240 से 1250 रू तक प्रति 10 किलो का   था ।  शाक सब्जियो के भाव अप्रत्याशित रूप से जरूर गिरे है  । इस पर भी प्रश्न बनता है कि अचानक से सब्जियो की बाढ कैसे आ गई । । खेरची शाक-सब्जी वालो के अनुसार कोंल्ड स्टोरेज  गोडाउनो से निकलकर आ रही है ।  इंदौर मे गत!~ हप्त अचानक नीचे आऐ सब्जियो के भाव में सीजन की सभी सब्जिया 15 से 30 रू किलो तक ने मे ंआ गई थी । मटर तो लगभग 10 रू किलो तक भी बिक गई थी ।   देश मे थचल रहा कृषि उत्पादन पर किसानी बवाल  सरकार अनुसार  किसान, उद्यााथगो की सेहत सुधारने हेतु और भाव की गत् सुधारने के लिये सरकार ने यह योजना को बनाया है ।  

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