कालीमिर्च का आयात 35 प्र.श. बढ़ने से किसानों को नुकसान

कालीमिर्च का आयात 35 प्र.श. बढ़ने से किसानों को नुकसान
अंधाधुंध आयात पर लगाम अनिवार्य : किशोर शामजी
हमारे प्रतिनिधि
मुंबई। कालीमिर्च का अंधाधुंध आयात और आयात में कदाचार के कारण भारत के कालीमिर्च के किसानों को भारी नुकसान होने की बात व्यापार द्वारा बारंबार उठायी गई है। हाल में दिसंबर, 2020 के कालीमिर्च के आयात के आंकड़े उपलब्ध होने से फिर एक बार इंडियन पेपर एंड स्पाइस ट्रेडर्स, ग्रोअर्स, प्लांटर्स कंसोर्टियम के केरल चैप्टर के को-आर्डिनेटर किशोर शामजी ने स्पाइसेस बोर्ड को विस्तृत पत्र द्वारा पूरी समस्या के प्रति ध्यान दिलाया है और सरकार के संबंधित विभागों के साथ मिलकर इस आयात पर यथाशीघ्र नियंत्रण लगाने का अनुरोध किया है।
किशोर शामजी ने कहा कि साउथ एशियन फ्री ट्रेड एइरया (साफ्टा) और इंडिया-श्रीलंका फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (इस्फटा) के तहत घरेलू उपयोग के लिए बड़े पैमाने पर आयात के कारण भारत के कालीमिर्च के किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दिसंबर, 2020 के दौरान और पूरे वर्ष के दौरान पिछले वर्ष की तुलना में आयात में भारी वृद्धि हुई है। सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत डय़ूटी में राहत दर पर वर्ष 2019 में 21,581 टन आयात की तुलना में 2020 में 22,071 टन कालीमिर्च का आयात हुआ। साफ्टा और इस्फटा के तहत आयातकों ने 2019 में 1713 टन कालीमिर्च का आयात किया जो 2020 में 35% बढ़कर 2305 टन हुआ।
केद्र सरकार द्वारा हाल में घोषित की गई नई नीति के तहत निर्यात आधारित इकाइयों और स्पेशल इकोनामिक जोन में स्थित इकाइयों के अलावा पहले से अधिकृत आयात को अतिरिक्त सब्सिडी नहीं मिलनी चाहिए। क्योंकि ये इकाइयां डय़ूटी फ्री आयात कर वैल्यूएडिशन के बाद माल फिर निर्यात करती है और ऐसा वैल्यूएडिशन भारतीय किसानों के लिए किसी भी तरह से मददगार नहीं है। इसके अलावा भारत के कालीमिर्च के किसानों का मानना है कि पहले से अधिकृत आयात को पुन:निर्यात के लिए 120 दिन का समय देने से घरेलू बाजार में कालीमिर्च का सस्ता आयात निरंकुश रूप से आता है। श्रीलंका से होते आयात में दिसंबर में भारी वृद्धि हुई है और केद्र सरकार के इसको गंभीरता से न लेने पर आगामी महीनों में भी यह वृद्धि चालू रहेगी।
आयातक 500 रु. प्रति किलो के भाव पर कालीमिर्च का आयात साफ्टा के तहत 8% डय़ूटी अदाकर करते हø। इस प्रकार आयात भाव 540 रु. प्रति किलो मिलता है जबकि श्रीलंका का कालीमिर्च बाजार में 330 रु. प्रति किलो के भाव पर बिकता है जिससे भारतीय कालीमिर्च के किसान इससे प्रभावित होते हø।
उन्होंने आगे कहा कि स्पाइसेस बोर्ड इस पर गंभीर बनकर भारत के कालीमिर्च के किसानों को उबारने और कालीमिर्च के उत्पादन में उनके अस्तित्व को टिकाए रखने के लिए वित्त मंत्रालय को तत्काल आधार पर सिफारिश करेगा।

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