हथकरघा, हस्तशिल्प : फैशनेबल बनाने का प्रयास

हथकरघा, हस्तशिल्प : फैशनेबल बनाने का प्रयास
रमाकांत चौधरी 
नई दिल्ली । केद्रीय कपड़ा मंत्रालय की तरफ से दिसम्बर माह की समीक्षा की है।जिसमें एसआईटीपी के तहत 11 वस्त्र पार्क़ों का कार्यकाल 30 जून 2021 तक बढा दिया गया है।वहीं कांचीपुरम में डिजाइन केद्र शीघ्र बनने की संभावना है।
दरअसल केद्रीय मंत्रिमंडल ने 11 दिसम्बर 2020 को आत्मनिर्भर भारत के तहत भारत की निर्माण क्षमताओं और निर्यात को बढाने के लिए 10 मुख्य क्षेत्रों हेतु पीएलअइा… योजना अनुमोदित की थी।जिसमें पांच वर्ष की अवधि हेतु 10,683 करोड़ रुपए के वित्तीय परिव्यय वाले मेनमेड फाइबर (एमएमएफ) क्षेत्र तथा तकनीक वस्त्रों जैसे उत्पाद शामिल हø।वहीं 10 दिसम्बर 2020 को एमएमएफ अपैरल तथा तकनीकी वस्त्र क्षेत्र हेतु संकेंद्रित उत्पाद प्रोत्साहन योजना (एमटीआईएस) पर व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित की गई थी जिसको लेकर केद्रीय मंत्रिमंडल ने नोट के मसौदा प्रस्तुत किया गया है।वहीं 10 दिसम्बर 2020 को मेगा एकीकृत वस्त्र क्षेत्रों तथा अपैरल पार्क़ों (मितरा) की स्थपना पर व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित की गई थी जिसको लेकर केद्रीय मंत्रिमंडल ने नोट का मसौदा प्रस्तुत किया गया है।वहीं 29 दिसम्बर 2020 को परियोजना प्रबंधन परामर्शदाताएं (एमएमसी एवं विशेष प्रयोजन तंत्र (एसपीवी) के साथ एकीकृत वस्त्र पार्क योजना (एसआईटीपी) के तहत वस्त्र पार्क़ों का पुनरीक्षण करने क लिए सचिव )वस्त्र) की अध्यक्षता में परियोजना अनुमोदन समिति की बैठक आयोजित की गई थी।जिसमें एसआईटीपी के तहत 11 मौजूदा वस्त्र पार्क़ों का कार्याकाल जून 2011 तक बढा दिया गया था।वहीं हथकरघा तथा हस्तशिल्प क्षेत्रों को सहायता करने तथा हथकरघा बुनकरों,कारीगरों व उत्पादकों हेतु वृहत बाजार बनाने क लिए सरकारी ई-मार्केट प्लेस (जीईएम) पर बुनकरों,कारीगरों को शामिल करने के उपाय किए गए हø ताकि वह विविध सरकारी विभागों और संगठनों को सीधे ही अपने उत्पाद बेच सके।जिसको लेकर 31 दिसम्बर 202ञ तक जीईएम पोर्टल पर 1,71,167 बुनकर,कारीगर व हथकरघा निकाय पंजीकृत हुए हø।
वहीं हथकरघा क्षेत्र में डिजाइन उन्मुख उत्कृष्टता सशक्त करने और सृजित करने तथा बुनकरों,निर्यातकों,निर्माताओं और डिजाइनरों को नए डिजाइन सृजित करने के लिए सुविधाएं देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएफटी) के माध्यम से बुनकर सेवा केद्रों (डब्ल्यूएससी) में डिजाइन संसाधन केद्र (डीआरसी) स्थापित किए जा रहे हø।जिसक zतहत दिल्ली,अहमदाबाद,जयपुर,वाराणसी,गुवाहाटी,भुवनेश्वर तथा मुंबई में बुनकर सेवा केद्र (डब्ल्यूएससी) में 7 डिजाइन संसाधन केद्र (डीआरसी) स्थापित किए गए हø तथा कांचीपुरम में शीघ्र ही डीआरसी बनने की संभावना है।वहीं केद्रीय कपड़ा मंत्रालय ने राज्य तथा केद्र सरकार के संयुक्त प्रयास से हथकरघा,शिल्प और पर्यटन के एकीकृत स्थाई विकास हेतु मुख्य पर्यटन केद्रों पर देश के विशेष हथकरघा तथा हस्तशिल्प क्षेत्रों में शिल्प ग्रामों का विकास किया है।यह शिल्प ग्राम संबंधित राज्य सरकारों से सहयोग से स्थापित किए जाने हø।
वहीं शिल्प हथकरघा का वैयक्तिक अनुभव के माध्यम से प्रमाणिक बुनाई तकनीकों के बारे में ज्ञान का प्रसार करके उपभोक्ताओं और पर्यटकों को पारंपरिक हाथ से बुने उत्पाद प्रस्तुत करने में सक्षम होगा।इस समय मोहापरा (असम),कुल्लू (हिमाचल प्रदेश),श्रीनगर (जम्मू एण्ड कश्मीर),कोल्लम (केरल और बोधगया (बिहार में शिल्प ग्रामों का विकास कार्य जारी है।वहीं विदेशी बाजार में हथकरघा को बढावा देने के लिए हथकरघा निर्यात संवर्धन परिषद ने दिसम्बर 2020 के तहत वर्चुअल माध्यम से विभिन्न देशों में अनेकों अंतरराष्ट्रीय सोर्सिंग एक्सपो किए गए हø,,जिसमें केता-विक्रेता बैठक दक्षिण अमेरिका (भारतीय हाथ से बुने और होम टेक्सटाइल्स सोर्सिंग) शािमल है।जिसमें 2.76 करोड़ रुपए की पूछताछ रही है।

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