वैश्विक संयोगों से खाद्यतेल और तिलहनों में तेजी

वैश्विक संयोगों से खाद्यतेल और तिलहनों में तेजी
हमारे संवाददाता 
गत् हप्ते भी खाद्य तेलो में तेजी जारी रही । राहत की बात यह थी मुंगफली तेल में तेजी न होकर कुछ आंशिक मंदी की थोक में राहत रही ।  खेरची में कभी उपभोक्ताओ का भला नही हुआ है । व्यापारिक क्षैत्रो से मिली खबर के अनुसार लॉकडाउन से हुए कमजोर व्यापार से अनलॉकडाउन के बाद व्यापार जगत त्योंहारी  लाभ कमाई की ओर अग्रसर बताया जा रहा है । तेजी का कारण वैश्विक वायदा बाजार का सटटा् भारी उपजने से बताया जा रहा है । विगत् हप्ते  शनिवार से गत् हप्ते  तक वैश्विक वायदा बाजर के  सटट्बाजी मे ं मलेशियन केएलसी लगातार 3900 पाइंट पार की ओर बढती रही  और गत् हप्ते शुक्रवार सप्ताहांत तक 3900 पार कर चुकी थी । मलेशिया से बढते एक्सपोर्ट से केएलसी में तेजी का वातावरण लगातार बना रहने से  शुक्रवार को भी मलेशिया पाम तेल वायदा बाजार उंचे प्लस 22 पाइंट में खुलकर प्लस तेजी में  49 पाइंट तक खबर लिखन थतक उंचा रहा । उधर सीबॉट  शिकागो सोया तेल सटटा् भी बढता रहा ।  सीबॉट मे ंसोयाबीन भी तेजी की छंलांगे लगाता हुआ उपर ही बना रहा है । व्यापारिक क्षैत्रो से मिली खबरो के अनुसार सीऑट में तिलहनो की तेजी का कारण अमाकी सोयाबीन म ंक्रशिंग की तेजी , ब्राजील और अर्जेटिना में  फसल कटाई में देरी  रही । इधर  भारतीय सोया मील की विदेशो में बढती मांग से स्थानीय प्लांटो की बढती मांग का होना बताया जा रहा है । सोपा तिलहन संघ का मानना है कि  भारतीय सोयामील का एक्सपोर्ट इस वर्ष की फरवरी माह का  2.5 लॉखटन तक पहुंच सकता है ।  फरवरी माह में भारत ने पाम तेल का आयात लगभग 71.67 हजार टन का कर लिया है । इन वैश्विक सटटे् और तेजी के  संयोंगो का असर भारतीय वायदा बाजार का सटटा् भी बढता रहा ।  इसी बीच स्थानीय वायदा बाजार की तेजी का असर तिलहनो मे ंाड्डज्ञी भारी तेजी बना रहा था । सरसो का भाव 6300 से 6600 रू तक  तथा हाजिर सोयाबीन विगत् हप्ते के भाव 4900-4925 रू  स थ बढकर 5000 से 5050 रू तक होना बताए जा रहे थे और सोया तेल विगत् हप्ते के भाव 1145-1150 रू  से बढते हुऐ 1155-1165 रू तक  तथा पाम तेल का भाव  1095-1105-1110 रू  से बढकर 1120-1130 रू  तक होना बताया जा रहा था । कांडला सीपीओ का भाव फरवरी 1075 और मार्च का भाव 1050 रू तक होना बताया जा रहा था ।   सटट्बाजी की तेजी से उपभोक्ता समाज महंगाई से सिकुड रहा है । उपभोक्ता समाज कोरोना महामारी से उपजे लॉकडाउन और अनलॉकडाउन समयातंर्गत एक वर्ष का अंतराल को त्योहारों और अब पारिवारिक मांगलिक कार्यक्रमो बनाने में लगा रहा और खाद्य क्षैत्र की सभी लंबे भंडारन वाली खाद्य वस्तुओं की बेलगाम तेजी होती जा रही है । भारतीय आवाम और छोटा व्यापारी में भारत के  आर्थिक पहलू का नारा `` अत्म निर्भर भारत, स्वदेशी अपनाओ और भारत बचाओ '' मुस्कराहट से महंगाई झेल रहा है । उनका मानना है कि स्वदेशी के लिये भारतीय कृषि उत्पादन बढेगा तो ही  हम स्वदेशी अपना पाऐंगे नही तो आयातित पाम तेल हमारे सटटा् किंगो को पनपाता रहेगा और महंगाई के गुलाम बकर ही जी पाऐंगे । संसारभर में पाम तेल का सटटा् अन्य तेलो के भावो पर प्रभावित होता जा रहा है । उपभोक्ताओ की वॉकपटुता कह रही है भारतीय देशी उच्चकोटी के उत्पादनो मे विदेशी खाद्य  उत्पादनो को आपुर्ति बेस के नाम पर पॉट दिया गया है ।

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