वैक्सिन : विकेद्रीकरण जरूरी, राज्यों को अधिक जिम्मेदारी

महामारी के प्रतिकार के लिए महानगर मुंबई में लॉकडाउन के प्रश्न पर विवाद और विरोध होना उचित है। अभी भी व्यापार-कारोबार नाम का ही चलता है तब लॉकडाउन होने पर व्यापारी-दुकानदारों के अलावा रिटेल व्यापार पर निर्भर लाखों लोगों की परेशानी पर विचार करना चाहिए। यह विचार कर ही राष्ट्रवादी कांग्रेस तथा कांग्रेस ने भी लॉकडाउन का विरोध किया हालांकि आंशिक लॉकडाउन अनिवार्य होने से ज्यादा नियंत्रण लगाया गया है। इसके साथ ही वैक्सिन आपूर्ति का वितरण और व्यवस्थित करना जरूरी है। वैक्सिन के उत्पादन तथा राज्यवार वितरण की सूचना पारदर्शक रखकर और केद्र तथा राज्यों के मुख्य शहरों के बदले जिलावार जवाबदारी साøपने की शुरुआत अब हुई है। राज्य सरकारों को वैक्सिन की आपूर्ति का चयन करने की छूट देने की मांग भी उचित है। मुंबई जैसे महानगर में कोविड सिल्ड के अलावा को-वैक्सिन की भी मांग है। वैक्सिन बनाने वाली कंपनियां सरकार की निगरानी के तहत है। विश्व में व्यापारिक आधार पर निर्यात होता है और प्रधानमंत्री द्वारा जरूरतमंद देशों को मददरूप में भी दी गयी है अब अपनी जरूरत पर ध्यान केद्रित किया जा रहा है।
राज्यों और जिला-तहसील लेबल पर अधिक जवाबदारी दी जाए तो महामारी का दायरा घट सकता है, ऐसी मांग भी उचित है। निजी हास्पिटलों को छूट मिले तो अधिक तेजी से टीकाकरण हो सकता है। इसके साथ ही लोगों के घर-घर जाकर अभियान शुरू हो तो काफी फर्क पड़ेगा। लोगों का भय दूर करने में धर्मगुरुओं ने अच्छी भूमिका निभाई है। हरियाणा में  बड़ी कंपनियों में वैक्सिन कøप आयोजित करते हø और चेन्नई में 18 वर्ष से उपर के सभी को वैक्सिन दी जा रही है। जिसके कारण एक्सपायरी डेट के कारण वैक्सिन बरबाद नहीं होगी।
महामारी के आरंभ में और फिर लॉकडाउन के समय लोगों में जो उत्साह और जोश था वह अप घट गया है तब प्रधानमंत्री की अपील-सलाह के अलावा राज्यों को दिए जा रहे मार्गदर्शन में अधिक छूट दी जाए तो अभियान अवश्य जल्दी सफल होगा।
इस संदर्भ में महाराष्ट्र अधिक सक्रिय है। इस समय दैनिक सवा दो लाख लोगों को वैक्सिन डोज दी जा रही है जो बढ़ाकर चार लाख करने का लक्ष्य है और इसके लिए केद्र के पास प्रति सप्ताह 35 लाख डोज की मांग की गयी है। 45 वर्ष की उम्र से अधिक लोगों को वैक्सिन देने की शुरुआत को अच्छा समर्थन मिला है। इस समय महाराष्ट्र में 10 लाख की आबादी पर 310 एक्टिव केस दर्ज हुए हø जो विश्व के अन्य देशों के औसत से अधिक है। यूरोप के देशों में कम दायरा होने के बावजूद महामारी का तीसरा प्रहार शुरू हुआ है। फ्रांस में तीसरी बार देशव्यापी लॉकडाउन है।
गणितज्ञों का अनुमान है कि अप्रैल 15 से 20 तक महामारी का व्याप सबसे अधिक होगा। हम चाहते हø कि ये अनुमान गलत हो तो भी सावधानी और तैयारी रखनी ही होगी।       

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