पाकिस्तान की गुलाटी या पीछेहट

भारत में पांच लाख टन चीनी तथा जून महीने तक में कपास और सूत आयात करने की वित्तमंत्री हमाद अजहर द्वारा किए जाने के बाद 24 घंटे में ही गुलाटी मारकर यह निर्णय रद्द करने की घोषणा हुई है। पाकिस्तान की इस गुलाटी से हमें कोई नुकसान नहीं है। नुकसान है तो वह पाकिस्तान के गरीब और मध्यम वर्ग को है। प्रति किलो 100 से 110 रु. के भाव पर जनता वास्तव में `चीनी' खाती है! यार्न और कपास की कमी के कारण छोटी-बड़ी मिलें बंद पड़ी है! कमी और भाव वृद्धि के कारण इमरान खान के खिलाफ विद्रोह करने वालों के दृश्य पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर दिखाई देते हø। आयात की घोषणा होने पर लोगों ने स्वागत कर भारत के साथ संबंध सुधारने की हिमायत की थी।
वास्तव में नवनियुक्त युवा वित्तमंत्री हमाद अजहर ने आयात छूट की घोषणा की तब एक पत्रकार ने प्रश्न पूछा कि कश्मीर के मुद्दे पर भारत के साथ समाधान हुए बगैर व्यापार संबंध फिर से शुरू होगा? वित्तमंत्री का जवाब था: `व्यापार संबंध सुधरे और आयात छूट दी जाए उसके कारण आम आदमी पर (भाववृद्धि) का बोझ हल्का हो उसमें कोई नुकसान नहीं है।'
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भारत के साथ संबंध सुधारना चाहते हø – और इस मतलब का निवेदन भी किया है। विदेश मंत्री शाह महमूंद कुरेशी का कहना है कि भारत के साथ संबंध सुधारने की शुरुआत हुई है और ऐसा लगता था कि व्यापार शुरू होगा, लेकिन- प्रधानमंत्री इमरान खान सहित सभी की राय है कि जहां तक भारत 5 अगस्त 2019 को- कश्मीर का विशेष दर्जा रद्द करने के निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करेगा वहां तक संबंध सुधारने का प्रश्न नहीं है!
पाकिस्तान सरकार की इस गुलाटी के पीछे वहां के सैन्य अधिकारियों का दबाव होगा ही, इसी बीच मानव अधिकार मंत्रालय के मंत्री शीरीन मेजारी- जो भारत विरोधी के रूप में विख्यात है उन्होंने सार्वजनिक में विरोध किया है कि आयात का निर्णय आर्थिक संकलन कमेटी ने लिया है, लेकिन कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर ही सरकार का निर्णय माना जाएगा। `यह इसके बाद कैबिनेट की बैठक हुई और निर्णय को बदल दिया गया! हकीकत में दोनों देशों के बीच वातावरण सुधर रहा है, अभी पिछले महीने ही दोनों देशों के सेना-अफसरों ने मिलकर नियंत्रण रेखा पर युद्ध विराम बनाए रखने का निर्णय लिया- इस प्रकार संयोग अनुकूल होने से वित्तमत्री ने निर्णय लिया, इसके बावजूद प्रधानमंत्री इमरान खान की मंजूरी बगैर घोषणा करने की भूल कोई नहीं करेगा। इमरान खान अब आमआदमी का रोष देख रहे हø, जिससे मंजूरी दी ही होगी।
इस गुलाटी की मार आम आदमी के अलावा इमरान खान और उनके वित्तमंत्री पर भी पड़ेगी। जबकि भारत कश्मीर जैसे आंतरिक मामले में किसी खेरखां का हस्तक्षेप कभी स्वीकार नहीं करेगा और ऐसी शर्त हो तो संबंध नहीं सुधरेगा: यह गुलाटी है या इमरान खान की पीछेहट?

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