समुद्री मार्ग से यात्रियों की परिवहन की क्षमता विकसित करने की जवाबदारी केद्र सरकार ने डीपीटी को साøपी

समुद्री मार्ग से यात्रियों की परिवहन की क्षमता विकसित करने की जवाबदारी केद्र सरकार ने डीपीटी को साøपी
मेरिटाइम दिन की पूर्व संध्या पर दीनदयाल पोर्ट ट्रस्ट कंडला के चेयरमैन एस.के. मेहता की व्यापार के साथ विशेष बातचीत: धोधा से दहेज, हजीरा से मूल द्वारका, पीपावाव से हजीरा जलमार्ग की तैयारी: कंडला (डीपीटी) पोर्ट सार्वजनिक क्षेत्र के प्रशासन के तहत तंत्र रखता है पारदर्शक व्यवस्था 
निखिल पंडय़ा द्वारा
भुज। स्वतंत्रता के कारण देश को समुद्री माल परिवहन में कराची की कमी का शून्यावकास भरने के लिए विकसित किए गए कंडला बंदरगाह के स्थापना के तुरंत बाद इस शून्यावकास को इसने सफलतापूर्वक भर दिया है, इसके साथ ही साथ इस बंदरगाह को देश के विकास में अग्रसर करने के लिए इसकी संचालक संस्था दीनदयालपुर ट्रस्ट (डीपीटी) ने अप निर्णायक पुरुषार्थ दिखाया है। बंदरगाह की ढांचागत सुविधाओं से लेकर इससे संलग्न अधिक उपयोगी और कीमती जमीन का खजाना औद्योगिक विकास के लिए खोलने की पहल की गयी है, इसके साथ ही माल परिवहन के अलावा यात्रियों के आवागमन में निर्णायक भूमिका निभाने और कच्छ को भी इसका लाभ मिले इसके लिए डीपीटी के अध्यक्ष एस.केB. मेहता के नेतृत्व में पोर्ट प्रशासन ने कमर कस ली है।
अभी एक वर्ष पहले डीपीटी के चेयरमैन के तौर पर कार्यभार संभालने वाले मेहता ने 5 अप्रैल को मेरिटाइम दिवस के अवसर पर जन्मभूमि पत्रों को जब इस नए आयोजन और इसके अमलीकरण को महत्वपूर्ण जानकारी दी तब उनके उत्साह में सफलता का सुर स्पष्टरूप से अनुभव किया जा सकता था।
देश के बंदरगाह माल परिवहन के साथ विकास के अन्य माध्यमों में अपनी भूमिका निभाए ऐसे प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के मंत्र को डीपीटी ने आत्मसाक्षात्कार शिपिंग मंत्री मनसुखभाई मांडविया के मार्गदर्शन के तहत महत्वपूर्ण योजना बनाकर इसे अमल में लाया है। मात्र कंडला आधारित ऐसे 81 हजार करोड़ औद्योगिक इकाइयां और ढांचागत सुविधाओं से संबंधित करार हुआ है और अब इस करार को अमलीजामा करने की व्यवस्था किए जाने की जानकारी मेहता ने दी।
प्रारंभ में उत्साह कम था
देश के बड़े बंदरगाहों को औद्योगिक और ढांचागत सुविधाओं में निवेश आकर्षित करने के लिए सक्रिय होना चाहिए, ऐसा शिपिंग मंत्री के आग्रह के कारण डीपीटी ने सर्वप्रथम इस  विचार को अमल में लाया तो फिलहाल बंदरगाह के उपभोक्ताओं ने इसके प्रोजेक्ट विस्तार के लिए करीब छह हजार करोड़ की निवेश की तैयारी दिखाई।
हालांकि मूल वन विभाग के अधिकारी रहे मेहता एक बिलकुल नए क्षेत्र में नियुक्त होने के बाद कंडला बंदरगाह के सभी विभागों के कामकाज की बारिकी से जानकारी प्राप्त कर अपने प्रशासनिक सूझ को सचेत किया। ऐसे में आयोजित मेरिटाइम समिट में गुजरात में निवेश आकर्षित करने के लिए विषय की मांग की जवाबदारी डीपीटी के इस नए चेयरमैन के सिर पर आयी। इस प्रजेंटेशन को उन्होंने सफलतापूर्वक निभाया, लेकिन गुजरात में रिफाइनरी के लिए उत्सुक एस्सार समूह को राज्य सरकार के साथ के संर्पकों से उन्हें कंडला बुलाने में उन्हें सफलता मिली।
एक ही दिन में एस्सार तैयार
मात्र एक ही दिन की मुलाकात में एस्सार ने 55 हजार करोड़ रुपए की एमओयू के लिए सहमति भी व्यक्त की। उसके बाद तो एमओयू की लाइन लग गयी और आंकड़ा 81000 करोड़ पार कर गया, ऐसी जानकारी दे रहे मेहता ने इसके लिए कारण बताने में भी हिचकिचाहट का अनुभव नहीं किया उन्होंने बताया कि एक तो कंडला जैसा शक्तिशाली और संपन्न बंदरगाह तथा उससे संलग्न ढांचागत सुविधाओं के अलावा डीपीटी के तरफ सरलता से जमीन मिलने का आश्वासन ने इस निवेश में काम कर दिया। साथ ही साथ किसी भी निवेश को राज्य और केद्र के विभिन्न लाभ भी उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया।
निवेशकों ने मात्र कंडला को पसंदगी के लिए क्यों चुना? ऐसे सवाल के जवाब में उन्होंने काहा कि कंडला बंदरगाह सार्वजनिक क्षेत्र के संचालन के तहत पारदर्शक व्यवस्थातंत्र रखता है और विशेषकर निवेशकों को ऐसे ढांचागत में अपने व्यापार को अन्य कोई न ले जा सके ऐसा पर्याप्त भरोसा है।
खास बिजनेस डेवलपमेंट सेल
अब इस एमओयू को अमल में लाने के लिए डीपीटी ने किस तरह की तैयारी की है? ऐसा पूछने पर उन्होंने कहा कि हमनें खास बिजनेस डेवलपमेंट सेल बनाया है, जो इन नए आने वाले निवेशकों की निरंतर समीक्षा करता है और उन्हें आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन पूरा करता है। उसके अलावा इस सेल में विशेष अधिकारियों की नियुक्ति का काम शुरू किया गया है।
इसके साथ ही साथ प्रत्येक प्रोजेक्ट के अमलीकरण पर निरंतर डिजिटल नजर रखने के लिए खास प्रोग्राम भी डीपीटी द्वारा तैयार किए जाने की जानकारी भी उन्होंने दी।
अब इसके बाद क्या?
इस एमओयू को आगे बढ़ाने के लिए जमीन के आवंटन के लिए इसकी दर के संदर्भ में थोड़ी समस्या है, जिसका समाधान आगामी दिनों में डीपीटी की लøड पालिसी में आ जाएगा, ऐसा विश्वास चेयरमैन ने व्यक्त किया। यह नई पालिसी तैयार हो गयी है मात्र सरकार की मंजूरी बाकी है जो आगामी कुछ दिनों में ही मिल जाएगी।
कंडला बंदरगाह पर भी ध्यान
दीनदयाल पोर्ट ट्रस्ट ने अपने अधीन कंडला बंदरगाह को ढांचागत सुविधाओं को मजबूत करने और सुधारने के लिए 1500 करोड़ रु. की तीन वर्ष की एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। इस आयोजन में मार्ग़ों को चौड़ा करना और सुधारना, बंदरगाह पर लाइट बढ़ाना, बैकप क्षेत्रों में ढांचागत सुविधा स्थापित करना और इसका उपयोग करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। साथ ही साथ बंदरगाह पर लाखों ट्रकों का आनाजाना रहता है, इसके पार्किंग की जगह बढ़ाना और सुधारने का काम शुरू किया गया है।
बंदरगाह पर ड्रेजिंग के कामकाज को मिट्टी के प्रमाण के साथ नहीं, बल्कि पानी के ड्राप के साथ जोड़ लेने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।
जल मार्ग से यात्री परिवहन
भारत में समुद्री मार्ग से यात्रियों के परिवहन के लिए भारी क्षमता होने के बावजूद, उन्हें चाहिए उतनी सुविधा उपलब्ध न होने की वास्तविकता में सुधार करने की जवाबदारी केद्र सरकार ने डीपीटी को साøपी है। इस संदर्भ में पोर्ट द्वारा हजीरा से धोधा रोरो फेरी सेवा का प्रयोगिक स्तर पर संचालन शुरू किया गया है। इसमें 10 सप्ताह में एक लाख यात्रियों ने लाभ लिया, जिससे यह प्रयोग सफल रहा। अब धोधा से दहेज, हजीरा से मूल द्वारका, पीपावाव से हजीरा के लिए आयोजन की तैयारी की जा रही है।
भावी आयोजन में कच्छ का भी समावेश
कच्छ में समुद्री यात्रा की संभावना है, इस पर डीपीटी की लंबे समय से रुचि रही है। अब इस बारे में काम शुरू होने की जानकारी चेयरमैन ने दी। इस संदर्भ में अब मुंद्रा से वाणीनार, मांडवी से ओखा, मांडवी से मुंबई के बीच समुद्री व्यवहार शुरू करने की कवायद की जानकारी भी उन्होंने दी।
मांडवी बंदरगाह केद्र बन सकता है
इसके पहले मुंबई और कराची के साथ स्टीमर व्यवहार से जुड़े मांडवी बंदरगाह पर फिलहाल बेकवॉटर को आगे बढ़ाकर यात्रिसेवा पुन: शुरू की जाए, ऐसी जानकारी डीपीटी के अध्यक्ष ने दी। इस संदर्भ में सागरमाला विकास प्राधिकरण के शीर्ष अधिकारी ने अमावस की भरती के पानी की अनुपस्थिति में बंदरगाह की स्थिति की जांचकर लिए जाने की जानकारी भी दी।
कच्छ के लिए डीपीटी निरंतर सक्रिय होने के साथ कहते सवाया कच्छी ऐसे अधिकारी ने आगामी समय में कच्छ के सागर किनारे से समुद्री व्यवहार पुन: शुरू होने का विश्वास व्यक्त किया।
कच्छी शिपिंग को प्रोत्साहन
समुद्र परिवहन में डंका बजा रहे डीपीटी ने अब कच्छ के विख्यात देशी शिपिंग पर ध्यान केद्रित करने पर ध्यान दिया है। इस संदर्भ में ओल्ड तुणा बंदरगाह पर देशी शिपिंग के लिए खास व्यवस्था की गयी है।
विशेष तो कच्छ के देशी शिपिंग के समृद्ध वार्षा के प्रतिबिंब डालते हुए एक म्युजियम की कंडला बंदरगाह से शुरुआत करने के इरादे की जानकारी भी डीपीटी अध्यक्ष ने दी।
गांधीधाम संकुल भी अग्रस्थान पर
कंडला बंदरगाह के विकास में महत्वपूर्ण रहे गांधीधाम संकुल के लिए भी डीपीटी सतत सक्रिय है। हाल ही में रोटरी क्लब के तहत वनीकरण के कार्यक्रम में अब राज्य के वनविभाग के शहरी वनीकरण के आयोजन के लिए अतिरिक्त 50 एकड़ जमीन आवंटित की गयी है। इस तरह गांधीकाम संकुल में कुल 80 एकड़ में हरियाली स्थापित की जाएगी।
स्मार्ट सिटी के रुके काम के बारे में पुछने पर उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन का भाव अवरोधरूप है। आगामी दिनों में डीपीटी की लøड पालिसी के साथ-साथ टाउन पालिसी की मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट को गति मिल सकती है, ऐसी आशा उन्होंने व्यक्त की।

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