सूरत में कोरोना का कोहराम : मिलों के उत्पादन में 25 प्रतिशत की कमी

कारीगरों को रोक कर रखना मिल मालिकों के लिए मुश्किल
कोरोना की वजह से व्यापार-उद्योग में विपरीत असर हो रहा है। सप्ताह में दो दिन तो काम न के बराबर हो रहा है और नाइट कर्फ्यू की अवधि ज्यादा होने की वजह से उत्पादन में भी विपरीत असर देखने मिल रहा है। कपड़ा मिलों के उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की कमी आयी है। कारीगर अपने वतन वापस न चले जाए ये सोचकर मिल मालिकों ने उत्पादन चालू रखा है। उद्योगकारों का मानना है कि सरकार कोरोना पर नियंत्रण पाने के लिए जो भी कदम उठा रही है वो सही है पर इस वजह से व्यापार- उद्योग बिल्कुल बंद नहीं हो जाने चाहिए वर्ना पिछले साल से भी ज्यादा मुश्किलों का सामना व्यापारियों को करना पड़ सकता है।  
देश के 80 प्रतिशत मेन-मेड फैब्रिक का उत्पादन करने वाले सूरत के कपड़ा उद्योग की विभिन्न प्रणालियां कोरोना की वजह से बहुत प्रभावित हुई है। व्यापारी बड़ी मुश्किल से ऑनलाइन व्यापार कर रहे है। बाहर गाव के व्यापारी नहीं आने की वजह से सूरत के रिंगरोड मार्केट में होने वाले होलसेल व्यापार में लगभग 50 प्रतिशत की कमी आयी है। अनेक इकाइयाँ एक ही शिफ्ट में काम कर रही हैं  तो वहीं दूसरी तरफ मिल मालिकों को भी उत्पादन कम करना जरूरी हो गया है।  
दक्षिण गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेद्र वखारिया बताते हैं की मिल मालिकों ने फैसला लिया है कि धीमी गति से भी उत्पादन करते रहना चाहिए जिससे कारीगरों को काम मिलता रहे और उद्योग भी चालू रहे। अभी उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत की कमी आयी है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि लॉकडाउन नहीं होगा इसलिए उत्पादक कारीगरों को समझा कर काम चला रहे हैं। होली की छुट्टियों में सामान्यत: 10 से 15 प्रतिशत कारीगर अपने गाँव चले जाते हैं। इस बार भी उतने ही कारीगर गए हैं। अभी कारीगरों की कोई कमी नहीं है। हालांकि  लॉकडाउन की दहशत है अभी उन्हें समझा कर काम पर चालू रखा गया है।  क्योंकि अगर एक बार कारीगर अपने वतन वापस चले गए तो फिर से उद्योग में मुश्किल खड़ी हो जाएगी इसलिए अभी तो धीमी गति से काम चालू रखना ही सबके हित में है।

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