नाइट कर्फ्यू का ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर विपरीत असर

नाइट कर्फ्यू का ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर विपरीत असर
सूरत शहर में नाइट कर्फ्यू की वजह से गुड्स पर ब्रेक लगी है। इस वजह से सूरत के अन्य उद्योगों के साथ ट्रांसपोर्ट उद्योग को भी 40 प्रतिशत तक का नुकसान हुआ है।  
नाइट कर्फ्यू की सबसे विपरीत असर टेक्सटाइल ट्रांसपोर्ट को हुई है। कर्फ्यू से पहले शाम के 6 से रात को 12 बजे तक कपड़े की डिस्पैचिंग का काम होता था।  लेकिन अब शाम को 7 बजे के बाद ये काम बंद हो जाता है। इस वजह से देर रात कपड़े की डिलीवरी के लिए निकलने वाले ट्रक अब एक या दो दिन देरी से चल रहे है। दूसरी तरफ शहर में कोरोना केसों में बढ़ोत्तरी होने से लॉकडाउन के डर से कारीगर अपने वतन की तरफ वापस जा रहे है। इससे सूरत से जाने वाले कपड़े के माल में कमी आयी है।  
इस बारे में टेक्सटाइल ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष युवराज डसले ने कहा है कि, नाइट कर्फ्यू की विपरीत असर तो थी ही साथ में कारीगरों के वापस जाने की वजह से मुश्किल से 40 प्रतिशत माल का ट्रांसपोर्टेशन हो रहा है। दिवाली से पहले रोज 300 ट्रक चलते थे जो अब कम होकर 120-130 जितने ही ट्रक चल रहे है।  
उन्होंने बताया की दिवाली के बाद बाजार की परिस्थिति बहुत अच्छी हो गई थी लेकिन फिर एक बार कोरोना संक्रमण बढ़ने से कपड़ा बाजार ठप्प हो गया है।  शादियों का सीजन होने के बाद भी बाजार में खास उत्साह नहीं है। पार्सल सुविधाएं अटक गई हैं। बाहर से आने वाले व्यापारी बंद हो गए हैं। व्यापर में फिर एक बार ब्रेक लग गया है।

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