कोरोना की दूसरी लहर ने जीरे में रोका तेजी का सेंटीमेंट

कोरोना की दूसरी लहर ने जीरे में रोका तेजी का सेंटीमेंट
मुंबई। जीरे में इस साल की शुरुआत से अब तक 14 फीसदी की तेजी आई थी और कारोबारियों को उम्मीद थी कि इस मसाला कमोडिटी के प्राइस बेहतर रहेंगे लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने इसकी दिसावरी एवं निर्यात मांग को कमजोर कर दिया है जिससे इसमें तकरीबन साढ़े पांच फीसदी की गिरावट आ चुकी है। गुजरात एवं राजस्थान की मंडियों में किसान तेजी से जीरा ला रहे हैं क्योंकि पिछले साल भी इसी समय कोरोना लहर की वजह से वे अपनी उपज मंडियों में नहीं ला पाए थे। इस आवक के दबाव के साथ लॉकडाउन के हालात से कमजोर मांग ने भावों पर दबाव बनाया है। 
जीरा एनसीडीईएक्स वायदा ने 6 अप्रैल को 14790 रुपए प्रति क्विंटल की ऊंचाई को छूआ था। यह जनवरी 2021 में 12960 रुपए प्रति क्विंटल था। यानी इस तरह इसमें 14 फीसदी की बढ़त आई। लेकिन मुख्य खपत केंद्रों में फिर से कोरोना की वजह से लॉकडाउन के हालात पैदा होने से बीते सप्ताह इसमें गिरावट आई और यह चार कारोबारी सत्रों में 5.47 फीसदी गिरकर 13980 रुपए प्रति क्विंटल आ गया। 
कारोबारियों का कहना है कि जीरे के मुख्य खपत केंद्रों में लॉकडाउन के हालात होने से समूचे सेंटीमेंट पर असर पड़ा है। जीरे की उपज अच्छी है एवं आवक भी पिछले साल की तुलना में अधिक है। जीरे में निर्यात मांग भी अच्छी रहने की उम्मीद है लेकिन कोरोना महामारी की दूसरी लहर से मांग पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। देश की सबसे बड़ी मंडी ऊंझा में 1 मार्च से 10 अप्रैल तक जीरा की आवक 42663.70 टन रही जो पिछले साल के समान समय की आवक 32145 टन से 32 फीसदी अधिक है। 
कारोबारियों का कहना है कि देश में जीरे की फसल अच्छी होने एवं भाव बढ़ने से इसकी आवक बढ़ी। पिछले एक महीने में भाव बढ़े हें लेकिन अब फिसल रहे हैं। जीरे की आवक आने वाले दिनों में तेज होती है तो भावों पर दबाव दिखाई देगा एवं मांग भी और कमजोर पड़ी तो समूचा कारोबार प्रभावित होगा। बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर की वजह से ऊंझा मंडी 14 से 21 अप्रैल तक बंद रहेगी। लेकिन अन्य मंडियों में एवं खेतों से सीधी बिक्री बनी रहने का बाजार पर दबाव आ सकता है। 
फैडरेशन ऑफ इंडियन स्पाइस स्टेकहोल्डर्स के मुताबिक देश से चालू रबी सीजन 2020-21 में जीरे का उत्पादन 478520 टन होने का अनुमान है। यह उत्पादन पिछले रबी सीजन वर्ष 2019-20 में 535500 टन था। जीरे का यह उत्पादन पिछले सीजन की तुलना में 10.6 फीसदी कम है। फैडरेशन के मुताबिक देश में फसल वर्ष 2020-21 में जीरे के कुल रकबे में 7.3 फीसदी की कमी आई। गुजरात में रकबा 10.2 फीसदी घटा है जबकि राजस्थान में यह 5.2 फीसदी गिरा है। इस साल जीरे के कुल यील्ड में 3.6 फीसदी की कमी आने की संभावना है। 
जीरे के निर्यात के हालात देखे जाए तो अकेले मार्च में 15-20 हजार टन जीरे का निर्यात हुआ है। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय खरीददार कोरोना के हालात पर नजर रखे हुए हैं एवं सरकारी नियंत्रण निर्यात कारोबार को प्रभावित कर सकते हैं। जो अंततब् जीरे के भावों को प्रभावित करेंगे। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के मुताबिक देश से वित्त वर्ष 2020-21 (अप्रैल-मार्च) के पहले दस महीनों अप्रैल-जनवरी के दौरान जीरा निर्यात 33.85 फीसदी बढ़कर 226079.21 टन पहुंच गया। यह निर्यात वित्त वर्ष 2019-20 के पहले दस महीनों में 168900.36 टन रहा। जनवरी 2021 में यह निर्यात 5.74 फीसदी बढ़कर जनवरी 2020 के 12262.69 टन से 12967.02 टन पहुंच गया। निर्यात के ये आंकडे साबुत जीरा के हैं, इसमें जीरा पावडर शामिल नहीं है।

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