फैशन रिटेल कारोबार सुधारना चुनौतीपूर्ण

हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । कोरोना वायरस संक्रमण की दुसरी लहर काफी विस्फोटक है. जिससे जान और माल का भारी नुकसान हो रहा है.जिसे देखते हुए कई राज्य सरकारों ने अपने अपने राज्य में लाकडाउन फिर से लगा दिया है. जिससे फैशन के कारोबार करने वाले खुदरा विक्रेताओं के समक्ष नई चुनौती उत्पन्न होगी.ऐसे में 2022-23 में ही खुदरा विक्रेताओं का राजस्व कोरोना पूर्व के स्तर पर पहुं सकेगा. 
दरअसल घरेलु रेटिंग एजेंसी इकरा की नवीनतम रिपोर्ट में कहा गया है कि फैशन कारोबार उद्योग में 2021-22 में 23 से 25 प्रतिशत वृद्वि की उम्मीद है.बहरहाल यह वृद्वि फैशन कारोबार को कोरोना से पूर्व स्थिति में ले जाने के लिए काफी नहीं है.जिसको लेकर इकरा की तरफ से कहा गया है कि कौरौना की दूसरी लहर शुरु होने से पहले फैशन उद्योग तेजी से सुधार के रास्ते पर चल रहा था.जिसके तहत दिसम्बर 2020 को समाप्त तिमाही में फैशन की का कारोबार कोरोना  से पूर्व के 70 प्रतिशत पर पहुंच गया था.बहरहाल 2021 के बाद कोरोना संक्रमण के मामलों में वृद्वि होने के बाद फैशन उद्योग के समक्ष चुनौती देखने को मिल रही है.जिसको लेकर इकरा की फैशन रिटेल क्षेत्र की प्रमुख साक्षी सुनेजा ने कहा कि फैशन उद्योग के कारोबारियों ने लागत बचत के लिए कई उपाय अपनाए हैं.जिसके तहत किराए के लिए बातचीत करना,वेतन और अन्य खर्च को तर्क संगत बनाने पर जोर दिया है.ऐसे में फैशन उद्योग की तरफ से यह उपाय चालू वित्त वर्ष के तहत भी जारी रहने की संभावना है.उन्हौंने कहा कि इन उपायों से फैशन उद्योग का परिचालन लाभ चालू वित्त वर्ष के तहत 4.1 प्रतिशत के आसपास रहने की संभावना है.यद्यपि यह लाभ 2019-20 की तुलना में 2.50 प्रतिशत कम रहेगा.

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