बंगाल में सही खेल अब शुरू होगा?

बंगाल, आसाम, केरल, तमिलनाडु और पांडुचेरी में चुनाव परिणाम रविवार शाम तक आ जाने की धारणा है। मतदान समाप्त होने के बाद सर्वे में जो संभावित परिणामों की रिपोर्ट आई है वह अनुमान के अनुसार है। केरल में वाम मोर्चा को और तमिलनाडु में डीएमके के स्टालिन को बहुमत मिलने का अनुमान था, जबकि आसाम में भाजपा को पूर्ण विश्वास था, ऐसा परिणाम आना प्रतीत हो रहा है।  
बंगाल का चुनाव परिणाम राष्ट्रीय राजनीति में अचूक असर ड़ालेगा। ममता दीदी पुनब् सत्ता प्राप्त करती हैं तो विपक्षी मोर्चा बनाकर भाजप को चुनौती देंगी। सत्ता से वंचित रहीं तो भी अधिक आक्रामक होंगी। उनके चुनाव प्रचार में `देख लेंगे' ऐसा संदेश स्पष्ट था। अब `सही खेल' शुरू हो रहा है कि खेल खत्म हो रहा है, यह देखना है।  
मुख्य प्रश्न बंगाल का है और उस पर सभी का ध्यान केंद्रित है भाजपा ने 200 से अधिक सीट मिलने का विश्वास व्यक्त किया है, बावजूद इसके भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सही खींचतान हो रही है ऐसा लगता है। परिणाम आने के बाद शांति बरकरार रखने की समस्या होगी। चुनाव आयोग ने स्थानीय जिलाधिकारियों और पुलिस तंत्र को आदेश दिया है। विजय जुलूस की मनाही है और परिणाम के बाद चुनाव अधिकारी के पास सर्टिफिकेट लेने के लिए विजयी उम्मीद्वार मात्र दो व्यवक्तियों को साथ में रख सकता है। चुनाव आयोग की कार्यवाही और जिम्मेदारी के बारे में अदालतों ने काफी आलोचना की है और नसीहत भी दी है। महामारी के दूसरे प्रहार के लिए आयोग को जिम्मेदार मानकर सजा करने की  चेतावनी- धमकी भी दी गई है! 
बंगाल के परिणाम में स्पष्ट बहुमत नहीं आया तो धमाल होने की संभावना है। राजनीतिक अस्थिरता हो और कानून-व्यवस्था का जोखिम हो तो राष्ट्रपति शासन की संभावना और विवाद शुरू होगा।  
भाजप ने पूरी शक्ति और प्रतिष्ठा झोंक दी उसके बाद ममता बनर्जी- मैदान में आक्रामक स्ट्रीट फाइटर की अपनी छाप अधिक दृढ़ बनाई थी। मतदाताओं में धर्म के आधार पर विभाजन स्पष्ट था, लेकिन `बाहर के' मुस्लिम नेताओं ने ममता के वोट में फूट ड़ाली हो, ऐसी संभावना नहीं लगती। भाजपा बंगाल में जितनी सीट प्राप्त करेगी वह सिध्दी मानी जाएगी। युवा वर्ग और महिलाओं ने भाजपा को पसंद किया ऐसा माना जा रहा हैं।  
ममता दीदी की हैट्रिक हो तो विपक्षी राजनीति में उनका बोलबाला और शक्ति बढ़ेगी। कांग्रेस- राहुल गांधी की विफलता के कारण ममता बनर्जी भाजपा-कांग्रेस के अलावा प्रादेशिक पक्षों का तीसरा मोर्चा बनाएंगी।

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