रेडीमेड वस्त्रों का कारोबार 2022-''23 में सुधरने की उम्मीद

रेडीमेड वस्त्रों का कारोबार 2022-''23 में सुधरने की उम्मीद
मुंबई। भारत और कुछ महत्वपूर्ण निर्यात बाजारों में कोविड़-19 के केस काफी बढ़ जाने से भारतीय एपरेल क्षेत्र की कुल रिकवरी में कुछ विलंब होगा। इसके बावजूद भारत में टीकाकरण अच्छी मात्रा में होने और ऑनलाइन शॉपिंग बढ़ने से 2021-`22 के वर्ष की तुलना में 2022-`23 का वर्ष कुछ अच्छा साबित होगा, उक्त जानकारी इकरा की रिपोर्ट में दिया गया है। ब्रीक एंड मोटर आउटवेटों को हुए विपरीत असर से सामने बराबर हो जाएगा। इससे एपरल कंपनियों का कामकाज गत वर्ष की तुलना में थोड़ा बेहतर दिखाई देगा।  
गत वर्ष की तरह राष्ट्रीय लॉकडाउन इस बार नहीं लगाया गया। इस बार प्रादेशिक के अनुसार लॉकडाउन या नियंत्रण लगाया गया है। इससे एपरल कंपनियां प्रोटोकॉल का अच्छी तरह से पालन कर सकी है। इससे हुए कामकाज के घाटे को यथासंभव कम कर सकी है।  
एपरल की मांग फिलहाल तिमाही अवधि में थोड़ा सुधरी है, लेकिन वह कोविड़ पूर्व के स्तर से अभी नीचे है महत्वपूर्ण मेट्रो में और टायर एक के शहरों में कोविड़ केस बढ़ जाने से मांग थोड़ी कमजोर रहने की संभावना है। संक्रमण घटने के बाद भी एपरल चैनल में माल का जमाव देखने को मिलेगा जो बिकवाली का दबाव बढ़ाएगा। इससे उत्पादक उत्पादन के वृद्धि ग्राहक पर ला नहीं सकते इसलिए 2021-`22 वर्ष के मुनाफा सख्ति पर दबाव रहने की संभावना है लेकिन टनओवर बढ़ेगा ऐसी जानकारी इकरा के उपप्रमुख निधी मारवार ने दी।  
2021-`22 के वर्ष में लो बेस पर कंपनी के आंकड़े की वृद्धि दर्शाने की संभावना है प्रि-कोविड़ टनओवर लेबल के 85 से 95 प्रतिशत की ब्रिकी एपरल कंपनियां हासिल कर सकेंगीऐसा संकेत है।  
2020-`21 के तीसरे क्वार्टर में कामचलाऊ देखी गई त्योंहारी मांग, 2020-`21 के उत्तरार्ध में लॉकडाउन  कम होने से सुधरा ग्राहक विश्वास और उपयोग के खर्च बढ़ने से मार्केट प्लेस में आवागमन अधिक देखने को मिलेगा। ब्रिकी और मुनाफे में आंशिक रिकवरी तथा 2021-`22 के वित्तीय वर्ष के दौरान एपरल उत्पादकों को थोड़ी राहत मिलेगी। दूसरी तरफ एपरल उत्पादकों ने सीमित केपेक्स खर्च किया है, लेकिन वर्किंग कैपिटल के लिए ऋण अधिक ले लेने से ऋण की मात्रा थोड़ी अधिक रहने की धारणा है।

© 2021 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer