कोरोना की दूसरी लहर का धनिया पर भारी दबाव

कोरोना की दूसरी लहर का धनिया पर भारी दबाव
कोटा। कोरोना की दूसरी लहर के प्रकोप से गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश की अधिकांश मंडियां बंद हो चुकी है जिससे धनिया की आवक एवं मांग दोनों पर विपरीत असर देखा जा रहा है। मंडियों में जहां धनिया की आवक सूख चुकी है वहीं होटल, रेस्टोरेंटस, कैटरिंग और स्ट्रीट फूड बंद होने से इसकी खपत में कमी आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। बता दें कि पिछले सीजन में भी कोविड-19 की वजह से धनिया की मांग में 30 लाख बोरी (प्रति बोरी 40 किलोग्राम) की कमी आई थी। 
कारोबारियों का कहना था कि इस साल नए सीजन की शुरुआत में यद्यपि धनिया का स्टॉक 15-20 लाख बोरी (प्रति बोरी 40 किलोग्राम) रहा जो सात साल के सबसे निचले स्तर पर था। ऐसे में पूरा बाजार नए धनिया पर निर्भर था एवं इसके दामों में काफी मजबूती थी एवं घरेलू बाजार के साथ निर्यात मांग भी अच्छी रही लेकिन अप्रैल की शुरुआत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने सारे व्यापार को अस्त व्यस्त कर दिया। मांग में बुरी तरह गिरावट आई जिससे भावों में भी सुस्ती दिखने लगी। 
कारोबारियों का कहना है कि कोविड-19 का असर अब धनिया बाजार पर साफ दिखने लगा हैं एवं इसकी मांग बेहद कमजोर पड़ी है जिससे भाव नीचे आ रहे हैं। देश के अनेक राज्यों में लॉकडाउन से वैवाहिक मांग के अलावा होटल-रेस्टोंरेंटस एवं स्ट्रीट फूड तक की मांग थम गई है। कोरोना वायरस की ताजा लहर से जो हालात बने हैं उससे इस उम्मीद पर पानी फिरता नजर आ रहा है कि हालात सामान्य होने में कितना वक्त लगेगा। देश के अनेक शहरों में रात्रिकालीन कर्फ्यू के साथ वैवाहिक कार्यक्रमों में बंदिशें लगना एवं कुछ जगह फिर से लॉकडाउन से मांग ऊपर उठने की संभावना नजर नहीं आती। 
कारोबारियों का कहना है कि कोविड-19 की वजह से जहां पिछले साल धनिया की कुल खपत 120-125 लाख बोरी में 25-30 लाख बोरी तक घटी, वही हालात इस सीजन में भी हो सकते हैं। फैडरेशन ऑफ इंडियन स्पाइस स्टेकहोल्डर्स के मुताबिक देश से इस साल धनिया का उत्पादन पिछले साल की तुलना में 2.3 फीसदी बढ़ेगा। जबकि, चालू रबी फसल में इसका रकबा 1.2 फीसदी बढ़ा है एवं उत्पादकता (यील्ड) में 1.1 फीसदी की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। देश में कुल मिलाकर 9793476 बोरी (प्रति बोरी 40 किलोग्राम) धनिया पैदा होने का अनुमान है जो पिछले साल 9577523 बोरी था। चालू रबी सीजन में धनिया का कुल रकबा मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में 303890 हैक्टेयर रहा जो बीते सीजन में 300360 हैक्टेयर था। 
दूसरी ओर, धनिया निर्यात की बात की जाए तो भारत का धनिया निर्यात फसल वर्ष 2021-22 (फरवरी-जनवरी) के दूसरे महीने मार्च दौरान 6168 टन रहा जो फसल वर्ष 2020-21 के समान महीने में 3370 टन था। इस तरह धनिया और धनिया पावडर का निर्यात 68 फीसदी बढ़ा। भारत का धनिया निर्यात फसल वर्ष 2020-21 (फरवरी-जनवरी) के दौरान 55543 टन पहुंच गया जो फसल वर्ष 2019-20 में 47800 टन था। इस तरह फसल वर्ष 2020-21 में धनिया और धनिया पावडर का निर्यात 16 फीसदी बढ़ा। 
कारोबारियों का कहना है कि धनिया के नए सीजन की शुरुआत से पहले इसमें तेजी का माहौल बना हुआ था जिसकी वजह से सभी कारोबारियों एवं स्टॉकिस्टों ने इसकी जमकर खरीद की और अब लॉकडाउन की वजह से उनका स्टॉक गोदामों में फंस गया है। 15 अप्रैल से लगभग सभी मंडियां पूरी तरह बंद हैं। मंडियां बंद होने से हाजिर बाजार में मांग नहीं है। अभी केवल दो ही मसाला कंपनियों की धनिया में लेवाली है जबकि बाकी मसाला कंपनियों की खरीद या तो पूरी हो गई या रुक गई है। कोविड से जब तक राहत नहीं मिलती तब तक धनिया में ताजा मांग की उम्मीद नहीं है। 
मंडियां खुलने पर स्टॉकिस्टों और कारोबारियों की बिकवाली का दबाव देखने को मिलेगा क्योंकि पहले ही गोदामों का भाड़ा, निवेश रकम का ब्याज आदि मिलाकर उनकी लागत बढ़ गई है जबकि धनिया के भावों में बढ़त के आसार कमजोर हो गए हैं। धनिया की कीमतों में यदि बढ़त आती है तो वह अक्टूबर से आ सकती है जब आवक भी कम रहेगी, कोरोना का प्रकोप भी कमजोर होगा एवं शादी विवाह की मांग देखने को मिल सकती है लेकिन इसमें अहम भूमिका कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स की होगी जो तेज होता है तो फिजिकल मार्केट में अच्छी बढ़त देखने को मिल सकेगी।

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