आरबीआई का छोटे व्यापारियों और बोरोअर्स को राहत देने हेतु चक्र गतिमान

आरबीआई का छोटे व्यापारियों और बोरोअर्स को राहत देने हेतु चक्र गतिमान
नई स्कीम सितंबर 2021 तक चालू रहने की संभावना
मुंबई। कोविड़ महामारी के समय बैंक के ग्राहकों को सहयोग देने के लिए रिजर्व बैंक ऑफइंडिया ने गत वर्ष घोषित की गई रिस्ट्रक्चरिंग स्कीम को बढ़ाने के लिए मध्यस्थ बैंक इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के साथ बातचीत शुरू करने की जानकारी मिली है। वैसे तो इस स्कीम को समेट लिया गया है लेकिन महामारी की दूसरी लहर के संदर्भ में बैंकों ने आरबीआई से इसे बढ़ाने का अनुरोध किया है, ऐसी जानकारी जानकार सूत्रों ने दी है।  
रिटेल और छोटे व्यवसायियों के लिए राहत देने का विचार चल रहा है यह जानकारी देते हुए सूत्रों ने कहा कि रिस्ट्रक्चरिंग विंडो फिर खोला जाए और सितंबर तक यह चालू रहे ऐसी संभावना है। हालांकि विचार-विमश अभी प्रारंभिक दौर में है और निर्णय या इसके विवरण के बारे में कोई स्पष्टता नहीं है।  
यदि आरबीआई फिर रिस्ट्रक्चरिंग की मंजूरी दे तो ऐसे बोरोअर्स के लिए होगा जिन्होंने कोई डिफाल्ट नहीं किया है। यदि बोरोअर्स ने एक बार अपने ऋण का पुनर्गठन किया है तो उन्हें फिर से यह लाभ नहीं दिया जाए यह अभिमत कई बैंकरों ने दिया है। विशेषकर विभिन्न राज्यों ने स्थानीय लॉकडाउन घोषित किया उसके कारण छोटे बोरोअर्स पर जो असर पड़ा है उसके लिए यह स्कीम घोषित करने का संकेत है।  
इमरजेंसी-लिंक्ड गांरटी स्कीम के तहत सूक्ष्म, छोटे और मध्यम इकाइयों को गत वर्ष प्रवाहिता का समर्थन मिलने के कारण उन्होंने बड़ी संख्या में ऋण का पुनर्गठन नहीं किया था, लेकिन इस वर्ष परिस्थिति अलग है इस समय उन्हें ऐसा कोई सहयोग प्राप्त न होने से पुनर्गठन का विकल्प जरूरी बन गया है ऐसी जानकारी बैकिंग सूत्रों ने दी है।       
गत वर्ष ऋण के पुनर्गठन की जो स्कीम घोषित की गई थी, वह एक समय की ही थी और फिर उसे बंद कर दिया गया।  
महामारी की दूसरी लहर का असर काफी व्यापक होगा और बैंक के ग्राहकों को राहत देने की जरूरत है ऐसा अब बैकिंग नियामकों ने स्वीकार किया है। ऐसी जानकारी एक अग्रणी बैंकर ने दी।  
गत वर्ष पूरी अर्थव्यवस्था में कितने ऋण का पुनर्गठन हुआ इसका आंकड़ा भी अभी उपलब्ध नहीं है लेकिन कई बड़ी बैंकों ने अपना तिमाही परिणाम घोषित किया, उसमें प्रतीत होता है कि अनेक रिटेल बोरोअर्स ने इस स्कीम का लाभ लिया था।  
पुनर्गठन किए गए ऋण का मूल्यांकन अधिक ऊंचा नहीं हो लेकिन जिन खातों में इसे किया गया उसकी संख्या बड़ी थी। कार्पोरेट क्षेत्र में अपेक्षा से कम कंपनियों ने इस स्कीम का लाभ लिया था।  
इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के अलावा फाइनेंस इंडस्ट्री डेवलपमेंट काऊंसिल, रियल इस्टेट क्रेडाई तथा ऐसोचेम ने भी रिस्ट्रक्चरिंग को बढ़ाने की मांग की है।  
2020, अगस्त में घोषित की गई इस स्कीम के तहत बोरोअर्स की तरफ से पुर्नभुगतान का समय दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकें ऐसा प्रावधान था।

© 2021 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer