यार्न की तंगी में आई भारी गिरावट : 15 से 20% दाम भी हुए कम

मुंबई। लॉकडाउन के दूसरे फेज के चलते टेक्सटाइल क्षेत्र की पूरी की पूरी चेन गड़बड़ा गई है। रिटेल एवं होलसेल कामकाज बंद होने से कपड़े की मांग काफी कम हो गई है और इसी वजह से नए फिनिश कपड़े एवं ग्रे कपड़े की मांग भी बाजार में बिलकुल नहीं है और इसका असर प्रोडक्शन पर भी पड़ रहा है, तथा दूसरी ओर लूम कारीगर तथा लूम क्षेत्र में कार्य करनेवाले अन्य लेबर्स भी अपने-अपने गांव चले गए हø जिसके चलते कपड़ा उत्पादन केद्र पर भी लॉकडाउन का गहरा असर पड़ रहा है। कामकाज बंद जैसा ही है और कपड़े उत्पादन की क्षमता घटकर 20 से 25% की ही रह गई है और इन सबका असर यार्न की खपत पर तो पड़ता ही है।
वर्तमान के माहौल में कपड़े की डिमांड कम होने एवं कपड़ा उत्पादन क्षेत्र में लेबर की कमी के चलते कपड़े का उत्पादन काफी कम हो गया है और इसका सीधा असर यार्न के उद्योग पर पड़ रहा है, यार्न उत्पादकों के गोडाउन यार्न की गठानों से भरे पड़े हø जिसके चलते यार्न उत्पादक कंपनियों ने अपना-अपना उत्पादन घटा दिया है, क्योंकि वर्तमान में ना ही घरेलू बाजार में यार्न की मांग है, और ना ही यार्न का निर्यात हो रहा है, और दूसरी ओर दिसंबर माह के पश्चात से जिस तरह से यार्न के दामों में लगातार वृद्धि देखी गई थी। उसको देखते हुए कई लोगों ने सिंथेटिक यार्न का आयात भी किया था, और इसका भी असर घरेलू यार्न बाजार पर पड़ा था, इन सभी परिस्थितियों के चलते वर्तमान में यार्न की मांग काफी घट गई है। ऐसे आगे देखा जाए तो त्योहारिक सीजन की तैयारी अभी से प्रारंभ हो जाती है, किन्तु फिलहाल सारा दारोमदार लॉकडाउन पर टिका है, अगर महाराष्ट्र सरकार 15 मई के पश्चात लॉकडाउन में कुछ ढील देती है तो कपड़ा उत्पादन क्षेत्र में कुछ चहल-पहल बढ़ सकती है।

© 2021 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer