कॉटन की खपत में 8 फीसदी की कमी संभव

कॉटन की खपत में 8 फीसदी की कमी संभव
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली। कमेटी ऑन कॉटन प्रॉडक्शन एंड कंज्मपशन (सीसीपीसी) का कहना है कि सीजन वर्ष 2020-21 में कॉटन की खपत कोविड लहर की वजह से घटकर 303 लाख गांठ रहने का अनुमान है जो पहले 330 लाख गांठ रहने की संभावना थी। 
केंद्र सरकार की कॉटन फसल अनुमान की इस समिति ने कहा है कि कोविड लहर और अनेक राज्यों में लॉकडाउन की वजह से कॉटन की खपत में आठ फीसदी से ज्यादा की कमी आने की संभावना है। इस कमेटी ने सीजन 2020-21 में कॉटन की खपत 330 लाख गांठ से घटाकर 303 लाख गांठ आंकी है। कमेटी ने चालू सीजन के अंत में कॉटन का अंतिम स्टॉक 118.79 लाख गांठ रहने का अनुमान लगाया है जो पहले 98.79 लाख गांठ आंका गया था। 
कमेटी ऑन कॉटन प्रॉडक्शन एंड कंज्मपशन (सीसीपीसी) का कहना है कि चालू सीजन में कॉटन का उत्पादन 360 लाख गांठ रहने की संभावना है। पहले यह अनुमान 371 लाख गांठ आंका गया था। देश में कॉटन का आयात 11 लाख गांठ पर स्थिर रहने के आसार हैं जबकि निर्यात अनुमान 75 लाख गांठ से घटकर 70 लाख गांठ रह सकता है। 
कमेटी का कहना है कि देश में कपास की बोआई इस सीजन में 133.73 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 134.77 लाख हैक्टेयर पहुंच गई। सबसे बड़ा परिवर्तन पंजाब में हुआ जहां कपास की बोआई 3.92 लाख हैक्टेयर से घटकर 2.48 लाख हैक्टेयर रही जबकि कर्नाटक में यह 6.37 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 8.17 लाख हैक्टेयर पहुंच गई। 
कमेटी के मुताबिक अक्टूबर 2020 से शुरु हुए कॉटन सीजन में ओपनिंग स्टॉक 120.79 लाख गांठ का रहा जबकि कुल कॉटन सप्लाई 491.79 लाख गांठ रही जिसमें 360 लाख गांठ इस का उत्पादन एवं 11 लाख गांठ आयात शामिल है। कॉटन की कुल मांग 373 लाख गांठ रहने की संभावना है जिसमें 303 लाख गांठ घरेलू खपत और 70 लाख गांठ निर्यात शामिल है। दूसरी ओर, कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने देश में कॉटन का उत्पादन 360 लाख गांठ आंका है लेकिन खपत अनुमान 330 गांठ और क्लोजिंग स्टॉक 106 लाख गांठ रहने की संभावना जताइ है।

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