कारखानों में कपड़े का उत्पादन घटा

कारखानों में कपड़े का उत्पादन घटा
हमारे संवाददाता
कोरोना संकमण के चलते ही सप्ताह मे तीन दिन का लाकडाउन के चलते ही श्रमिक काम पर कम ही आ रहे है। कारखानो मे कपडे का उत्पादन घट गया है। धागा बनानेवाली मिलो मे कपडा मंडियो मे काम नही होने से धागे का उत्पादन घटाने के लिये विवष होना पडा है। कपडा कारोबारी तैयार मालो के पुराने स्टाक को नकद मे ही बैच रहे है। कोरोना माहमारी के चलते ही लोगो मे अब भय का माहौल जिसके चलते ही अच्छे लोग कोरोना की दूसरी लहर मे ईलाजो की लडखडाती व्यवस्था को ध्यान मे रखते हुए ही घरो मे रहना ज्यादा पंसद कर रहे है। आने वाले दिनो मे श्रमिको व आम कर्मचारियो के सामने पैसा का संकट बढने पर अनेक नयी समस्याये पैदा हो सकती है। कारोबारियो ने अब उधार मे बैचने के बजाय नकद मे माल बैंचने पर ज्यादा ध्यान दे रहे है।  
  व्यापारिक सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसर हरियाणा , पंजाब , महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश आदि राज्यो मे मिलो मे बाहर के श्रमिको के पलायन करने के साथ ही धागे का उत्पादन काफी घट गया । जिन मालो का धागा उत्तर प्रदेश, हरियाणा व उन राज्यो मे कपडा बनाने के कारखाने लगे है। उन राज्यो मे कपडे की माँग कम होने के साथ ही मिलो को तैयार स्टाक की निकासी करने मे काफी परेशानी का सामना करना पड रहा है। कोविड की दूसरी लहर ने लोगो को सोचने के लिये मजबूर कर दिया है।  
 नगर मे बनने वाले कपडो मे चादर, दोहर, टाँप सीट आदि का बढिया क्वालिटी का उत्पादन काफी कम हो गया है। बाजारो मे थ्री डी की क्वालिटी का माल ज्यादा बन रहा है। साथ ही सस्ता होने तथा फुटकर कारोबारियो का मुनाफा भी ज्यादा होने के साथ ही इसकी माँग ज्यादा है। ऐक जमाना था जब कपडा चीन से आता था अब यह कपडा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, व गुजरात मे इसका उत्पादन व छपाई के प्लांट बडी मात्रा मे लगे हुए है। जानकार व्यापारिक सूत्रो की माने तो पता चलता हैं । इस कपडे की क्वाटी सस्ती तो सकती है। लेंकिन स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है। आज की अंधाधुघ की दौड मे कपडा उत्पादक बाजारो मे सस्ता माल बनने के चक्कर मे घटिया मालो को बनाने मे ज्यादा लगा हुआ है।  
 बजारो मे चादर का कारोबार करने वाले कारोबारी इन दिनो तैयार मालो को उधार मे न बैचकर के नकद मे बैचने का प्रचलन बझा है। काराबारियो का कहना है कि कोरौना की दूसरी लहर मे कारोबारी सोच समझकर के ही चल रहे है। दूसरी माहमारी मे मौतो के बढते सिलसिल को लेकर के कारोबारी व आम नागरिक काफी परेषान है। गतवर्ष तो दुकानो को बंद कराने के लिये पुलिस व प्रषासन को काफी मशक्कत करनी पडती थी इस बार तो प्रशासन को व्यापारियो से अपील करने से ही काम चल रहा है। इस बार शहर से लेकर बडे कस्बो तो नागरिक जागरूक होने के साथ ही घरो से निकलना ही पंसद नही कर रहे है।बाजारो मे बीमारी के प्रकोप के चलते ही नकद का प्रचलन बढा है।  

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