खाद्यतेलों की कीमत घटाने की कवायद तेज

आयात शुल्क में कटौती करने के उपायों पर विचार
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । पिछले एक वर्ष से खाद्य तेलों की कीमत आसमान को छू रही है.जिससे आमजनमानस खाद्य तेलों की महंगाई से सीधे तौर पर हलकान हो रही है.ऐसे में अब केद्र सरकार खाद्य तेलों की कीमत कम करने के उपायों पर विचार कर रही है. दरअसल दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक देश में शुमार भारत अब खाद्य तेलों के आयात शुल्क में कटौती करने की तैयारी कर रहा है.जिसको लेकर केद्र सरकार खाद्य तेल के आयात शुल्क को कम करने के प्रस्ताव को समीक्षा कर रही है.ऐसे में केद्र सरकार चालू माह में कभी भी खाद्य तेलों के आयात शुल्क में कटौती करने का निर्णय ले सकती है.बहरहाल खाद्य तेलों के आयात शुल्क कटौती पर अलग-अलग राय है.जिसके तहत कुछ तबके की तरफ से कहा जा रहा है कि पहले खरीफ सत्र में तिलहनों की बोआई कु निगरानी की जाए और देखा जाए की इसकी खेती कैसी होगी.वहीं दूसरे तबके की तरफ से कहा जा रहा है की खाद्य तेलों के आयात शुल्क में कटौती के प्रभाव का मूल्यांकन करना आवश्यक है. वहीं घरेलू उद्योग जगत के कुछ तबकों की तरफ से खाद्य तेलों के आयात शुल्क में कटौती का विरोध कर रहे हैं क्योंकि इससे सिर्फ विदेशी आपूर्तिकर्ताओं को मदद मिल सकती है और इससे किसान हतोत्साहित हो सकते हैं.वहीं उद्योग जगत के दूसरे तबके ने केद्र सरकार से खाद्य तेलों पर सब्सिडी देने का सुझाव दिया है. चूंकि खाद्य तेलों के आयात शुल्क में कटौती से किसानों के हित प्रभावित होंगे.उल्लेखनीय है कि भारत अपनी खाद्य तेलों की मांग की पूर्ति को को लेकर लगमग दो-तिहाई आयात से पूरा करता है.भारत इंडोनेशिया और मलेसिया से पाम तेल आयात करता है.वहीं सोया और सूर्यमुखी तेल अर्ज़ेंटीना,ब्राजील,यूक्रेन और रुस से आयात करता है.जिसके तहत भारत में पाम आयल के आयात पर 32.5 प्रतिशत आयात शुल्क लगता है.वहीं कच्चे सोयाबीन और सोया तेल पर 35 प्रतिशत आयात शुल्क लगता है. जिससे आयातित खाद्य तेल काफी महंगा पड़ता है और इसमें कितनी कटौती होगी उसी अनुरुप खाद्य तेलों का आयात सस्ता पड़ेगा.   

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