नेता विवाद पैदा कर रहे है, लोग मानवधर्म निभा रहे है

महामारी का असर कम हो रहा है। मानसून अच्छा जाने के शुभ समाचार है। वैक्सिन के लिए अतिरिक्त आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है। भारत सरकार के आर्थिक सलाहकार को विश्वास है कि दशहरा-दिवाली के त्योहार का मौसम शुरू होने तक 70 करोड़ लोगों को वैक्सिन लग गई होगी और द्ब्रह्लसत्रह्यह्वक कह्णळ्” हर्ड इम्युनिटी स्थापित होने के बाद महामारी के फैलने का भय नहीं रहेगा। महामारी और लॉकडाउन के कारण आर्थिक नुकसान कितना हुआ है इसका अनुमान आने वाले समय में लगेगा लेकिन इस बार प्रधानमंत्री की सलाह के अनुसार संपूर्ण लॉकडाउन के बदले नियंत्रण अमल में होने से अधिक नुकसान नहीं होगा, ऐसी आशा है।  
अमेरिका-यूरोप ने भी 70 प्रतिशत लोगों को एक डोज देने के बाद महामारी नियंत्रण में होने की बात है। हमारे देश में वैक्सिन का अकाल अचानक हुआ अब उत्पादन बढ़ाने का कदम उठाया गया है। सरकार ने फार्मेसी कंपनियों को एडवांस में भुगतान किया है जिससे लक्ष्य सिध्द किया जा सकेगा। वैक्सिन आने के बाद प्रश्न ग्रामीण क्षेत्रों का है वहां लोगों को समझाना पड़ता है लेकिन अब भय के कारण जागृति है। अमेरिका में भी लोग उत्साह नहीं दिखा रहे हैं जिससे वैक्सिन लेने वालों की लॉटरी निकलेगी और बड़ा इनाम देने वाले है! 
ऑक्सिजन-वैक्सिन का विवाद अब कम हो रहा है- राज्य सरकार केंद्र के ऊपर जाकर विदेशों से आयात करना चाहती है लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। मुंबई कार्पोरेशन को भी टेंडर जारी करने के बावजूद निष्फलता मिली है।  
उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने तो अन्य मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर आयात केंद्र सरकार पर छोड़ने का अनुरोध किया है। वैक्सिन आयात के लिए कई मुख्यमंत्रियों को द्ब्र को-ऑपरेटिव फेडरल द्गॉथ्टद्ब्र – राज्यों के अधिकार का हवाला दिया। इसमें भी प्रवेशवाद सिर उठा रहा था, लेकिन अब द्ब्रह्यह्लस्र्शथ्” के बाद केंद्र पर आधार रखा है! 
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को काफी चेतावनी दिया है- वैक्सिन के आबंटन और भाव की असमानता के सामने प्रश्न उठाया है। राज्य सरकार से अधिक कींमत किसलिए? लेकिन संविधान के तहत स्वास्थ्य का विषय राज्यों के अधिकार में आता है इसलिए उन्हें सीमित खर्च करना चाहिए। इस विवाद का निराकरण हो तो सहीं, लेकिन इस समय निजी हास्पिटलों को मिले कोटे से ऊंचे भाव पर लोग वैक्सिन ले जा रहे है।  
राज्य और नेता कार्यक्षेत्र और कीमत के बारे में लड़ रहे हैं तो निजी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को- परिवार सहित वैक्सिन देने की जवाबदारी उठा ली है और लाखों लोगों को यह लाभ मिल रहा है। छोटी-बड़ी व्यापारी संस्थाएं और मंडल भी ऐसी व्यवस्था कर रहे हैं। बड़ी सोसायटियों ने तो योगदान कर गरीब-नौकर वर्ग तथा उनके परिवारों के लिए व्यवस्था की है। आसपास की झोपड़पट्टियों में वैक्सिन देने की जवाबदारी भी ली है। ऑक्सिजन की कमी और हाहाकार के समय मुकेशभाई अंबानी ने स्वंय आगवानी की और ऑक्सिजन देश के कोने-कोने में पहुंचाने लगे। अन्य छोटे-बड़े उद्योग भी इस जंग में जुड़े। इस प्रकार देशभर में निजी क्षेत्र और सामाजिक संस्थाएं तथा कार्यकर्ता आगे आएं हैं। यह लढ़ाई मात्र सरकार की नहीं, हमारी सबकी है यह बात समझाने की जरूरत नहीं है। देश प्रेम और सेवा की भावना ऐसे संकट के समय में जाग उठती है।
हमारी राजनीतिक पार्टियां, नेताओं, विधायकों ने सरकार की आलोचना के सिवाय क्या किया है? सरकार को दिन-रात सलाह देने वाले राहुल गांधी और चिदंबरम ने कितना योगदान- दिया? संपूर्ण देश में जागृति है। सर्वधर्म समान की भावना है और देवस्थान- देवदर्शन के लिए बंद, लेकिन उपचार केंद्र खुले है। भारत की यह शक्ति है और इससे महामारी के सामने महायुध्द में भारत की विजय निश्चित है।

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