खाद्यतेल में तेजी-मंदी के बाद फिर तेजी

खाद्यतेल में तेजी-मंदी के बाद फिर तेजी
हमारे संवाददाता 
तिलहनो और सोया , पाम  तेल के साथ साथ अन्य तेल में भी आग झरती तेजी पुन: बनी है  । गत् वर्ष आलोच्य अवधि में सोया तेल 825 रू और विगत् एक पखवाडा पूर्व  सोया तेल  थोक में  1500 रू उपर तक जाकर 1415 रू नीचे आने  के बाद  के बाद पुन: गत् हप्ते तक वर्तमान भाव 1435 रू  हुआ और पाम तेल  गत् वर्ष 775 रू  और विगत् एक पखवाडा पूर्व 1450 रू उपर जाकर 1285 रू नीचे आने  के बाद  पुन: गत् हप्ते तक वर्तमान भाव 1325 रू हो इंदौर तेल का गया था । यह तो पुख्ता है है कि देश में खाद्य तेल भाव  वैश्विक वायदा सीबॉट और मलेशिया बुर्सा से प्रेरित होकर तेजी मंदी में रहने लगे है ।  व्यापारिक क्षैत्रो के अनुसार विगत् दो सप्ताह  मे खाद्य तेलो पर जिस कदर तेजी हुई है उससे साफ झलकता है कि सटट्बाजी के व्यापार ने खाद्य तेलो पर जबरन के भाव  बढने की स्थितियां पैदा की है जबकि तिलहनो और तेलों की पैदावार  उत्पादन देश में कमी नही है । हांलाकि देश में खाद्य तेल की जरूरत की आपूर्ति हेतु आयात भी जरूरी है । जनता विश्लेषको की माने तो देश में आपूर्ति हेतु आयात - निर्यात और शुल्क रोपण या कम करना ही देश में अधिक सटटे् का माहोला बनाता जा रहा है और महंगाई की चाले उपरी संकेतो की ओर बढती जा रही है । तेल-तिलहनो के वैश्विक पैदावार और स्टॉक की कम - ज्यादा स्थिति विदेशी हवाऐं ही व्यापार पर गहरा असर डाल देती है । विगत् हप्ते में  वैश्विक वायदा व्यापार में सोया तेल वायदा भारी उपरी संकेतो तक जाकर  मंदी के वातावरण में था और मगर पुन: गत् हप्ते बुधवार गुरूवार को  मलेशियन  केएलसीई  रिंगिट और शिकागो सोया तेल वायदा भारी तेज चल रहा  था । मंगलवार और बुधवार  को शिकागो  सोया तेल वायदा 120 पाइंट से उपर ही रहे और मलेशिया पाम तेल वायदा मे केएलसी मंगलवार को हांलाकि खास तेज नही थी मगर बुधवार को यह 154 पाइंट तेज थी और प्राजेक्शन में 41 पाइंट उंची भी थी । इसके असर से  भारतीय वायदा व्यापार और हाजिर बाजार भी अछूते नही रहे जिसका असर हाजिर तेलो के भावो  पर  था जिसमे ं लगभग 20-25 रू प्रति किलो की थोक की तेजी हो गई ।  इसके असर से  सोया तेल 1425 से 1445 रू और पाम तेल 1290-1295 के बाद 1325 रू तक उछल गया। सोया और पाम तेल पर  20 रू प्रति किलो की थोक में वृद्धि हो गई। वेश्विक  तेजी और देश में बनती जा रही वृद्धि का असर से सरसो तेल भी फिरसे तेजी बनाने लगा है बताया जा रहा है । तेल व्यापार जगत से मिली जानकारी अनुसार सरसों कच्चीघानी तेल विगत् हप्ते 1440 रू तक नीचे आ चुका था जो कि गत् हप्ते पुन: तेज होकर उत्पादक स्थल नेवाई इलाके का भाव 1465 रू और कोटा तरफ का भाव 1520 रू तक होना बताया जा रहा था ।
सरसों तेल में तेजी का कारण यह भी बताया जा रहा है  कि  सरकार द्वारा जारी सूचना के कि सरसो तेल मे 8 जून से घालमेल का व्यापार बंद किया जाऐ । अर्थात इसकी प्यूरिटी प्राकृति रखी जाऐ । इसके असर से देश के उत्तरी और पूर्वी इलाको के व्यापार जगत और जनता की मांग सरसों तेल में बढना बताई जा रही है । बढती मांग से सरसों तेल का भाव तेज होना बताया जा रहा था ।  मिली जानकारी के अनुसार खाद्य तेल और तिलहन के भावो पर जिस तरह से भाव उछले  है उससे प्रेरित होकर खरीफ कृषि में तिलहनो  के साथ ही अन्य दलहनो का रकबार भारी श्रय से अर्थात 15 से 20 प्रतिशत तक बढ सकता है । अत: आगे भविष्य मे अब तेल-तिलहनो में अधिक तेजी की खाद्य आशा नही रखी जा रही है ।  

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