मेंथा ऑयल के प्राइस पर अब अधिक दबाव नहीं

मेंथा ऑयल के प्राइस पर अब अधिक दबाव नहीं
कमल शर्मा 
चंदौसी। देश में नए फसल वर्ष 2021-22 में मेंथा ऑयल का उत्पादन 49 हजार टन से 55 हजार टन रहने का अनुमान है। मेंथा की कटाई के साथ क्रशिंग अभी शुरु हुई है जिसकी वजह से मेंथा ऑयल का कुल उत्पादन कितना रहेगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगा लेकिन उत्पादन के आंकडे 49-55 हजार टन के बीच रहने चाहिए। किसानों और कारोबारियों का कहना है कि जून अंत तक मेंथा ऑयल उत्पादन की तस्वीर काफी साफ हो जाएगी जबकि जुलाई अंत से पहले क्रशिंग समापत होने की उम्मीद है क्योंकि मानसून में इसकी क्रशिंग नहीं हो पाती। 
प्रीतेश अग्रवाल, प्रकाश कैमिकल्स, बदायूं के मुताबिक देश में इस साल मेंथा की फसल 50 हजार टन रहने की संभावना है जिससे तकरीबन 49 हजार टन मेंथा ऑयल मिलेगा। वे कहते हैं कि इस साल मेंथा की फसल का अनुमान कुछ लोग दस फीसदी ज्यादा जता रहे हैं तो कुछ समान कह रहे हैं। ऐसे में तस्वीर जून अंत तक साफ होने की संभावना है। देश से पिछले साल 22 हजार टन मेंथा ऑयल का निर्यात हुआ जिसमें से अकेले चीन को 14 हजार टन का शीपमेंट हुआ। शेष आठ हजार टन मेंथा ऑयल दुनिया के अन्य देशों को निर्यात हुआ। 
मेंथा ऑयल की निर्यात मांग इस साल भी अच्छी रहने की संभावना है, हालांकि कोविड की वजह से समय अधिक लग रहा है। वे कहते हैं कि नेचुरल मेंथा को सिंथेटिक मेंथा ऑयल से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है क्योंकि जहां नेचुरल मेंथा ऑयल का भाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में 17-18 डॉलर प्रति किलोग्राम है वहीं सिंथेटिक मेंथा ऑयल 10 डॉलर प्रति किलोग्राम के आसपास ऑफर हो रहा है। सिंथेटिक मेंथा ऑयल ने असल में प्राइस वार को रोका है। 
मेंथा उत्पादक इलाकों में मेंथा ऑयल की नई आवक के साथ जून एमसीएक्स वायदा घटकर 914 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास आ गया है। अब उत्तर प्रदेश की मंडियों में मेंथा ऑयल की दैनिक आवक बढ़ती जाएगी। इन दिनों में यह आवक 10-15 ड्रम है जो अगले सात से दस दिनों में 400-500 ड्रम तक पहुंच जाएगी। मेंथा ऑयल के दाम अब अधिक नीचे जाने की आशंका नहीं है क्योंकि ये पहले ही पांच साल के औसत भाव 945 रुपए प्रति किलोग्राम के करीब है। वर्ष 2017-18 में मेंथा ऑयल का औसत भाव 945 रुपए था और अब यह उसी लेवल पर पहुंच गया है। वे कहते हैं कि इस औसत भाव से मेंथा ऑयल 20 रुपए प्रति किलोग्राम तक घट सकता है लेकिन इसके बाद इसमें सुधार होने की संभावना दिखाई देती है। 
वैभव अग्रवाल, नोरेक्स फ्लैवर्स, गजरौला का कहना है कि मेंथा की फसल पिछले साल के समान है और इस साल भी पिछले साल जितना ही 55 हजार टन मेंथा ऑयल का उत्पादन होने की संभावना है। वे कहते हैं कि देश में जर्मनी और मलेशिया से 4500 टन के करीब सिंथेटिक मेंथा का आयात भी हो रहा है। जर्मनी के सिंथेटिक मेंथा ऑयल पर दस फीसदी डयूटी लगती है लेकिन इसका प्राइस इतना कम है कि डयूटी अदा करने के बाद भी इसकी लैंडेड कॉस्ट नीचे रहती है जबकि मलेशिया से आने वाले सिंथेटिक मेंथा ऑयल पर कोई आयात शुल्क नहीं लगता। मेंथा की निर्यात मांग अब अफ्रीकन देशों, ब्राजील एवं चीन जैसे देशों में बढ़ रही है। इसके अलावा घरेलू मांग भी है। 
वे कहते हैं पूरे कारोबार पर पिछले साल से कोविड का असर है और दूसरी लहर से इसने और कमजोर किया है। हर साल जहां अप्रैल-मई में जून डिलीवरी के सौदे हुआ करते थे, उनकी संख्या इस साल नहीं के बराबर रही। मेडिसन सैक्टर में मेंथा ऑयल की मांग अच्छी है लेकिन अन्य सैक्टर से मांग कमजोर पड़ी है जो कोरोना महामारी का प्रकोप कम होने के बाद बढ़ सकती है। प्राइस को लेकर उन्होंने कहा कि मौजूदा भाव से मेंथा ऑयल 100 रुपए प्रति किलोग्राम नीचे आ सकता है लेकिन स्टॉकिस्ट निचले भावों पर बेचना पसंद नहीं करेगा। 
धर्म़ेंद्र विक्की, एसजे मेंथा प्रॉडक्स, चंदौसी का कहना है कि इस साल मेंथा फसल का रकबा 10-15 फीसदी बढ़ा है और मेंथा ऑयल का उत्पादन 45-50 हजार टन के करीब रह सकता है। इस साल आलू के भाव ऊंचे होने से किसानों ने आलू की खेती की और आलू को निकालने के बाद कोई दूसरी फसल का विकल्प न होने से मेंथा की बोआई हुई। इस साल ताउते तूफान से दो दिन हुई बारिश से मेंथा की फसल को बड़ा लाभ हुआ एवं तेल की मात्रा प्रति बीघा 10-13 किलोग्राम मिल रहा है वहीं यह पिछले साल 7-8 किलोग्राम प्रति बीघा था। वे कहते हैं कि इन दिनों मेंथा की क्रशिंग जोरों पर चल रही है और यह जुलाई अंत तक चलने की संभावना है। 
वे कहते हैं कि किसानों के पास पुराना मेंथा ऑयल का भी स्टॉक है लेकिन इसे भाव ऊपर उठने तक डैड स्टॉक माना जाना चाहिए। पिछले साल के मेंथा ऑयल का तकरीबन 20-25 फीसदी स्टॉक किसानों के पास रखा है। कोरोना महामारी की वजह से इसका निर्यात और घरेलू खपत घटी जिसकी वजह से स्टॉक बढ़ा है। वे कहते हैं कि पिछले साल सीजन की शुरुआत में मेंथा ऑयल ऊपर में 1350 रुपए प्रति किलोग्राम खुला लेकिन बाद में यह नीचे में 1060 तक आया। इस साल भी सीजन की शुरुआत सुस्ती के साथ हुई है लेकिन उम्मीद की जानी चाहिए कि अनलॉक प्रक्रिया के बाद इसकी निर्यात एवं घरेलू मांग और प्राइस में सुधार होगा।

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