भाव ऊंचे होने से बासमती उत्पादक खुश

भाव ऊंचे होने से बासमती उत्पादक खुश
नई दिल्ली । उत्तर भारत के बासमती उत्पादक इस समय काफी खुश हैं क्योंकि कीमतें पिछले साल के स्तर से लगभग एक तिहाई अधिक हैं। कारोबारियों का कहना है कि कम रकबे के कारण कम फसल की चर्चा है, विशेष रूप से पूसा बासमती 1509 किस्म की पैदावार कम होने के आसार हैं जिसकी वर्तमान में कटाई की जा रही है। यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों में बासमती की कीमतों में तेजी आई है। 
पंजाब और हरियाणा में 1509 किस्म की आवक शुरू हो गई है और कई मंडियों में मॉडल की कीमतें पिछले साल की समान अवधि में 2,100-2,200 के स्तर की तुलना में 2,750-3,200 रुपए प्रति क्विंटल के बीच हैं। प्रमुख 1121 किस्म की कीमतें, जो इस महीने के अंत में बाजार में आएंगी, पिछले कुछ दिनों में लगभग 300-400 रुपए की बढ़त के साथ लगभग 3,000 रुपए के स्तर पर मंडरा रही हैं। इस बार निश्चित रूप से फसल की कमी है और हर कोई कह रहा है कि इस बार खेती का रकबा कम है। चमनलाल सेतिया एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के विजय सेतिया ने कहा कि इसके अलावा, कुछ किस्मों में बदलाव आया है और कुछ बासमती क्षेत्र भी गन्ना और दलहन जैसी फसलों के लिए चला गया है। 
सेतिया ने कहा कि 1509 किस्म उगाने वाले कुछ किसान नई और अधिक उपज देने वाली किस्म पूसा बासमती 1718 में चले गए हैं, जिसकी पिछले साल बेहतर कीमत मिली थी। नई किस्म 1718 को तीन साल पहले पेश किया गया था और यह अच्छी उपज और रिकवरी के साथ पूसा बासमती 1121 किस्म के करीब है। 
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सेतिया ने कहा कि फसल के रकबे और अनुमानित उत्पादन के आंकड़ों के अभाव में, बाजार की धारणा अलग रहती है। सेतिया ने कहा कि पहले एपीडा फसल क्षेत्र का सर्वेक्षण करता था, जिसके आधार पर व्यापार को फसल के आकार का अंदाजा हो जाता था। 
उन्होंरने बताया कि पारबोल्ड बासमती चावल पिछले साल 4,000 प्रति क्विंटल के मुकाबले 5,000 रुपए में बिक रहा है, और इसी तरह उबले हुए चावल की कीमत पिछले साल 4,700-5,000 की तुलना में 5,800 के आसपास है। कीमतों में काफी उचित उछाल आया है जो किसानों के लिए अच्छा है। हालांकि, कीमतों में वृद्धि से घरेलू और विदेशी दोनों बाजारों में मांग पर कोई असर पड़ने की संभावना नहीं है। 
कारोबारियों का कहना है कि 1509 की कीमतों में वृद्धि ने 1121 सहित बासमती की अन्य किस्मों को बढ़ावा दिया है। विभिन्न बाजारों में मॉडल भाव 2,495-3,200 के आसपास हैं और नमी की गुणवत्ता पर भी निर्भर करती हैं। वर्तमान में मंडियों में आने वाले धान में अपेक्षाकृत अधिक नमी है। 
चावल के एक ब्रोकर ने कहा कि अगले कुछ हफ्तों में आवक में तेजी आएगी, जिससे अक्टूबर की शुरुआत तक कीमतें कम हो जाएंगी। अच्छी बारिश के कारण इस साल 1509 किस्म की पैदावार अधिक होगी। किसान अधिक पैदावार और बेहतर कीमतों से खुश हैं। 
अप्रैल-जून तिमाही के दौरान बासमती का निर्यात पिछले साल की समान अवधि में 12.84 लाख टन के मुकाबले कम होकर 10.88 लाख टन रहा। मूल्य के संदर्भ में, शिपमेंट लगभग 22 प्रतिशत कम होकर 6,798 करोड़ रुपए (8,698 करोड़ रुपए) रहा। उच्च माल भाड़ा और कंटेनरों की उपलब्धता की कमी निर्यातकों के लिए चिंता का विषय है।

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