प्याज की भाव वृद्धि से बिगड़ेगी दिवाली

प्याज की भाव वृद्धि से बिगड़ेगी दिवाली
तूफान और बारिश की अनियमितता से मांग- आपूर्ति प्रभावित
विशेष प्रतिनिधि
मुंबई। दीपावली करीब है तो प्याज के भाव में भारी वृद्धि होने की संभावना है। त्योहारों में प्याज का भाव आमजनता को रुलाएगी ऐसे संकेत मिल रहे है। मानसून की अनियमितता के कारण फसल की कटाई में विलंब हो रहा है और बाजार में माल की आवक घट रही है। तौकते तूफान के कारण प्याज का बफर स्टाक भी घट गया है जिसके कारण भाव में वृद्धि होने की संभावना है।
पिछले दो वर्ष का अनुभव बताता है कि अगस्त और सितंबर में बेमौसमी बारिश के कारण प्याज की कटाई में अवरोध उत्पन्न हुआ है और भाव दुगुना हो गया है। इस वर्ष भी भाव में 100 प्र.श. वृद्धि होने की संभावना है और थोक भाव 30 रु. प्रति किलो हो सकता है, ऐसी जानकारी भारत की अग्रणी रेटिंग कंपनी क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में दी है।
तौकते तूफान जैसी कुदरती आपत्ति के कारण शीत फसल में नमी की मात्रा बढ़ गयी है। जिसके कारण प्याज के टिकने की संभावना घटी है। परिणामस्वरूप फसल जल्दी से बाजार में आएगी और यदि फसल कम हुई तो कुल आपूर्ति घट जाएगी, ऐसी जानकारी क्रिसिल ने दी।
सामान्यत: शीत फसल से कितना हिस्सा गोदामों में रखकर उसी समय बेचा जाता है, जबकि फसल की आवक कम है, लेकिन क्रिसिल के अभिमत के अनुसार इस वर्ष यह समीकरण बिगड़ जाएगा और भाव में वृद्धि होगी। भारत में प्याज की औसतन खपत प्रति महीने 13 लाख टन है। प्याज की फसल वर्ष में 3 बार ली जाती है जिसमें खरीफ, विलंबित खरीफ और रवी मुख्य है। इस प्रकार लगभग पूरे वर्ष में प्याज की आपूर्ति मिलती रहेगी।
खरीफ सीजन में विशेषकर महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में प्याज की फसल ली जाती है और इन  3 राज्यों में कुल खरीफ उत्पादन का 75 प्र.श. जितना हिस्सा है। प्याज की आपूर्ति और भाव का समीकरण विशेषकर वातावरण की परिस्थिति पर आधारित है। नैIत्य बारिश प्याज की फसल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्याज के उत्पादन में रवी सीजन का हिस्सा 70 प्र.श. है, लेकिन खरीफ फसल इसलिए महत्वपूर्ण है कि सितंबर से नवंबर में जब आवक कमजोर हो तब यह फसल काम में लगती है। इसी समय भारत के अनेक राज्यों में त्योहार भी होता है।
क्रिसिल के संशोधन के अनुसार खरीफ के समय देशभर में प्याज की जो बोआई हुई है उसमे महाराष्ट्र का हिस्सा 35 प्र.श. है और बारिश में अनियमितता देखने को मिली इसके कारण प्याज की फसल के सामने बड़ी चुनौती उत्पन्न हुई है। एक मात्र नाशिक ही प्याज के कुल खरीफ फसल के उत्पादन में उसका हिस्सा 37 प्र.श. है। नाशिक में 30 अगस्त तक बारिश में 33 प्र.श. तक की कमी रही। जबकि पुणे में 65 प्र.श. कमी दर्ज हुई। महाराष्ट्र के खरीफ प्याज के उत्पादन में पुणे का हिस्सा 13 प्र.श. है।
प्याज के भाव को बढ़ने से रोकने के लिए सरकार ने कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में 2 लाख टन प्याज का आरक्षित थोक एकत्र करने की घोषणा हुई है। इसमें से 90 प्र.श. जितनी प्याज सरकार ने खरीद ली है। इसके अलावा प्याज के फसल की बोआई बढ़े उसके लिए सरकार ने कदम उठाया है। प्याज का उत्पादन जिन राज्यों में अधिक नहीं है उसमें किसानों को ऐसी फसल लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश में बोआई 41000 हैक्टर से बढ़कर 51000 होने की संभावना है।

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