काटन उत्पादन 2021-22 में दो प्र.श. बढ़ेगा

काटन उत्पादन 2021-22 में दो प्र.श. बढ़ेगा
हमारे प्रतिनिधि
मुंबई। भारत का कॉटन उत्पादन सीजन वर्ष 2021-22 (अक्टूबर-सितंबर) में 362 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलोग्राम) होने का कारोबारी अनुमान है। यह उत्पादन वर्ष 2020-21 के कारोबारी अनुमान 355 लाख गांठ से दो फीसदी ज्यादा है। जबकि, केंद्र सरकार ने वर्ष 2020-21 के चौथे अग्रिम अनुमान में 354 लाख गांठ कॉटन पैदा होने का अनुमान जारी किया था। केंद्र सरकार ने वर्ष 2021-22 के लिए कपास का उत्पादन 362.2 लाख गांठ रहने का पहला अग्रिम अनुमान जारी किया है। इस तरह, नए सीजन के लिए कारोबारी और सरकारी अनुमान एक समान आया है। 
चालू सीजन में कपास का रकबा घटने के बावजूद अधिकतर कारोबारी मानते हैं कि कपास का उत्पादन बढ़ेगा एवं कीट हमला नगण्य है। कीट हमला न होने से कॉटन की यील्ड में बढ़ोतरी होगी और कपास उत्पादक इलाकों का मौसम बेहद अनुकूल है। चालू सीजन में कपास की बोआई 119.7 लाख हैक्टेयर में हुई है जो पिछले सीजन की तुलना में लगभग छह फीसदी कम है। इस वर्ष हुई कुल बोआई में बीटी कॉटन का रकबा 112 लाख हैक्टेयर यानी 94 फीसदी के करीब है। 
नागपुर स्थित सेंट्रल इंस्टीटयूट फॉर कॉटन रिसर्च के निदेशक वाई जी प्रसाद का कहना है कि यह सीजन उत्तर भारत के लिए काफी अच्छा है। इस साल कॉटन की उत्पादकता बढ़ने की उम्मीद है। फसल की प्रगति और हालत अभी तक अच्छी है। 
उत्तर भारत के सिंचित क्षेत्रों में कपास की बोआई आम तौर पर अप्रैल के अंत में शुरू होती है। देश के वर्षा सिंचित क्षेत्रों में इसकी शुरुआत जून में होती है। भारत में कपास का लगभग 70 फीसदी रकबा मानसूनी बारिश पर निर्भर है। 
1 जून से, देश में 802.5 मिमी बारिश हुई है, जो इस अवधि के सामान्य 834.0 मिमी से 4 फीसदी कम है। मध्य भारत में, गुजरात में संचयी वर्षा सामान्य से 18 फीसदी कम, महाराष्ट्र में सामान्य से 12 फीसदी अधिक और मध्य प्रदेश में सामान्य से 2 फीसदी कम थी। गुजरात और महाराष्ट्र का देश के कपास उत्पादन का 55-60 फीसदी हिस्सा है। उत्तर भारत में, हरियाणा में सामान्य से 21 फीसदी अधिक, राजस्थान में सामान्य से 6 फीसदी अधिक और पंजाब में सामान्य से 14 फीसदी कम बारिश हुई। दक्षिण भारत के प्रमुख कपास उत्पादक राज्य तेलंगाना में अब तक सामान्य से 31 फीसदी अधिक बारिश हुई है। 
दिल्ली स्थित ग्रीनलीफ कॉर्प के रिसर्च हेड एनालिस्ट विकास नरूला ने कहा, भारत में कपास की गुणवत्ता इस साल काफी बेहतर रहने की उम्मीद है। कुल मिलाकर बॉल सेटिंग अच्छी रही है और हाल की बारिश से मौसम की स्थिति इसके बाद सभी जगह अनुकूल हो गई है।   
नरुला ने कहा कि कॉटन की पैदावार 3 फीसदी बढ़कर 488 किलोग्राम/हेक्टेयर होने की उम्मीद है। इससे इस साल कपास के कम रकबे की वजह से कुछ उत्पादन नुकसान की भरपाई होगी। हालांकि अनुकूल फसल की स्थिति बरकरार है, आने वाले महीनों में कपास उत्पादन के लिए मानसून एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 
कपास की फसल के लिए सितंबर-अक्टूबर महत्वपूर्ण है क्योंकि फसल पकने के दौरान अधिक बारिश से कीटों के हमले की घटनाएं हो सकती हैं और गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा सकती है और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। 
उत्तर भारत के हाजिर बाजारों में नई फसल की आवक शुरू हो गई है और कम नमी वाले कपास की आवक में अक्टूबर से तेजी आने की संभावना है। अन्य उत्पादक राज्यों में अक्टूबर के मध्य से नई फसल कम मात्रा में आने की उम्मीद है।

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