भारतीय काटन परिधान में अमेरिका की मांग बढ़ने की उम्मीद

भारतीय काटन परिधान में अमेरिका की मांग बढ़ने की उम्मीद
निर्यात दिसम्बर अंत तक $ 285.84 मिलियन तक पहुंचने की संभावना
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । चालू वर्ष के अंत तक भारत से अमेरिका को कॉटन अपैरल एक्सपोर्ट बढने की उम्मीद है।वहीं यूएस को चीनी कॉटन अपैरल एक्सपोर्ट में गिरावट आ सकती है।इसीबीच भारत नई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की रणनीतियें,शुल्क संरचनाओं,व्यापार नीति और माल ढुलाई प्रबंधन के साथ चीन की घटती हिस्सेदारी से लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है।इसके अतिरिक्त उच्च माल ढुलाई लागत के चलते पड़ोसी एशियाई देशों के साथ चीन का समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है।वहीं कोरोना महामारी के डेल्टा वेरियंट के प्रसार के चलते देश कोरोना महामारी की नई लहर का भी सामना कर रहा है।
दरअसल अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एईपीसी) की तरफ से कहा गया है कि केद्रीय कपड़ा मंत्रालय को मूल्य वर्धित निर्यात के लिए प्रोत्साहन और कच्चे माल के निर्यात को हतोत्साहित करने जैसी नीतिगत पहल करनी चाहिए।जिसके तहत भारत से अमेरका को निर्यात किए जाने वाले परिधानों पर लगाए गए शुल्क को कम करने या समाप्त करे की भी सिफारिश की जानी चाहिए जैसा कि तुर्की,बंगलादेश,कंडोडिया और पाकिस्तान जैसे देशों के मामले में है।वहीं जनवरी 2021 में भारतीय सूती परिधान का निर्यात 193.47 मिलियन डॉलर का था जो कि मार्च 2021 में 11.96 प्रतिशत बढकर 216.61 मिलियन डॉलर हो गया।जिसको लेकर फाइबर टू फैशन के मार्केट विशेषज्ञ टूल एक्सप्रो की तरफ से कहा गया है कि जून 2021 में भाररतीय सूती परिधान का निर्यात 4.29 प्रतिशत बढकर 225.90 मिलयन पहुंच गया।ऐसे में भारत का परिधान निर्यात दिसम्बर 2021 तक 25.53 प्रतिशत बढकर 285.84 मिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।वहीं दूसरी तरफ जनवरी 2021 में चीन के सूती परिधान का निर्यात 459.39 मिलियन डॉलर था जो कि मार्च 2021 में 11.55 प्रतिशत घटकर 406.34 मिलियन डॉलर रह गया।वहीं जून 2021 में यह फिर से 16.32 प्रतिशत बढकर 472.64 प्रतिशत होग या।बहरहाल अब इसके कम होने की उम्मीद है।हालांकि दिसम्बर 2021 में फिर से 2.11 प्रतिशत बढकर 462.68 मिलियल डॉलर हो जाने की उम्मीद है।

© 2021 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer