स्पेशियालिटी केमिकल्स की मांग 12 प्र.श. की दर से बढ़ने की धारणा

स्पेशियालिटी केमिकल्स की मांग 12 प्र.श. की दर से बढ़ने की धारणा
केमिकल्स इंटरमिडिएट्स की मांग बढ़ने से उत्पादकों को लाभ
मुंबई। वैश्विक स्तर पर महामारी की स्थिति और आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता के बावजूद स्पेशियालिटी केमिकल्स और केमिकल इंटरमिडियरीज की स्थानीय मांग इस वर्ष 12 प्र.श. की दर से बढ़ने की धारणा उद्योग के सूत्रों ने व्यक्त की है। चीन में आपूर्ति श्रृंखला कमजोर पड़ने के अलावा अमेरिका, यूरोपीयन यूनियन और चीन के बीच व्यापार संघर्ष को ध्यान में रखते हुए स्थानीय उद्योग के पास विशाल अवसर है। चीन द्वारा अपनाए गए प्रदूषण विरोधी कदम से भी स्थानीय उद्योग का विकास हो रहा है।
उद्योग के विशेषज्ञों के अनुसार अन्य केमिकल सेगमेंट की स्पेशियालिटी केमिकल्स की मांग में उल्लेखनीय उछाल आने की धारणा है। नई टेक्नोलाजी से स्पेशियालिटी क्षेत्र की खपत बढ़ी है। स्वदेशी रसायन उद्योग में 80000 से अधिक इकाइयां हैं तो बल्क केमिकल्स, स्पेशियालिटी केमिकल्स इंटरमिडियरीज, पेट्रोकेमिकल्स और खाद का उत्पादन करती है। एग्रो केमिकल्स के उत्पादन में भारत, अमेरिका, जापान और चीन के बाद चौथे क्रम पर है। डायस्ट्फ्स और डायइंटरमिडिएट्स के वैश्विक उत्पादन में भारत का हिस्सा 16 प्र.श. है। केमिस्टार कार्पोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर केतन पटेल ने कहा कि प्लास्टिक उत्पादन में केमिकल इंटरमिडियरीज का उपयोग व्यापक रूप से बढ़ा है। एनालिस्ट संजय पिंगले ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर रसायन के निर्यात में 14वां और आयात में 8वां स्थान रखता है। स्थानीय मांग में वृद्धि और रसायन के भाव बढ़ने से मुनाफा बढ़ने और छोटी अनमध्यम इकाई (एसएमई) इस वर्ष 2022 से 20 से 22 प्र.श. की आयवृद्धि प्राप्त करेगी। पिछले कई वर्ष से अतुल दीपक नाइट्राइट, केमिस्टार, सुदर्शन और आरती सहित अनेक शीर्ष कंपनियां अपने केमिकल उत्पादन को बढ़ाने के लिए यथा संभव प्रयास कर रही हैं। इसके अलावा कच्चे माल की सरल उपलब्धता भी आगामी वर्ष़ों में केमिकल इंटरमिडिएट की आवश्यकता बढ़ाएगी, ऐसी जानकारी पिंगले ने दी। स्थानीय रसायन उद्योग का कद वर्ष 2019 में 178 अरब यूएस डालर था और वर्ष 2025 तक 300 अरब यूएस डालर और स्थानीय मांग वर्ष 2025 तक वार्षिक 9 प्र.श. की दर से वृद्धि करने की धारणा है।

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