भारत से चावल निर्यात चालू तिमाही में हुआ कमजोर

भारत से चावल निर्यात चालू तिमाही में हुआ कमजोर
हमारे संवाददाता
मुंबई। भारत से गैर-बासमती चावल का निर्यात चालू तिमाही के दौरान धीमा हो गया है, विशेष रूप से सुदूर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया में, क्योंकि इस क्षेत्र में धान की नई आवक शुरु हो गई है। इसके अलावा, वियतनाम के खरीदारों के साथ भुगतान की परेशानी, ऊंचे माल ढुलाई चार्ज और वर्तमान में बाजार में अस्थिरता शिपमेंट को प्रभावित कर रही है। दूसरी ओर, निर्यातकों का कहना है कि अफ्रीका को निर्यात, विशेष रूप से उबले हुए चावल, का अच्छी मात्रा में हो रहा है। 
एग्री कमोडिटीज एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एम मदन प्रकाश का कहना है कि चावल का निर्यात अप्रैल-जून के दौरान बढ़ा नहीं है। हालांकि, कंटेनरों की कमी के कारण अफ्रीका को शिपमेंट ब्रेक-बल्क जहाजों में हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुंद्रा, मुंबई और अन्य पश्चिमी बंदरगाहों से अच्छी मात्रा में चावल अफ्रीकी देशों में भेजा जा रहा है। 
द राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (टीआरईए) के अध्यक्ष बीवी कृष्ण राव का कहना है कि कंटेनरों की कमी से चावल के निर्यात में बाधा आ रही है। इसके अलावा, कीमतों में भी गिरावट आई है, जिससे खरीदारों को सावधानी बरतने के लिए मजबूर होना पड़ा है। कारोबारियों का कहना है कि अफ्रीका को चावल के निर्यात की मात्रा में बढ़ोतरी हुई है। अफ्रीका में उबले चावल के शिपमेंट में वास्तव में तेजी आई है। 
एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) के अपने ताजा आंकडों में बताया है कि इस साल अप्रैल-अगस्त के दौरान चावल का निर्यात 13.7 प्रतिशत बढ़कर 28,269 करोड़ रुपए हो गया। हालांकि, इस अवधि के दौरान मात्रा की जानकारी नहीं दी गई है। अप्रैल-जुलाई के एपीडा के आंकड़ों से पता चला है कि गैर-बासमती चावल का निर्यात 52.7 लाख टन हुआ, जिसका मूल्य 14,091 करोड़ रुपए था, जो एक साल पहले की अवधि में 8,982 करोड़ रुपए एवं मात्रा 30.3 लाख टन थी। 
देश से अगस्त-सितंबर के दौरान निर्यात धीमा हो गया है क्योंकि 100 फीसदी टूटे चावल की कीमतें भी बढ़ गई हैं। अगस्त तक चेन्नई में टूटे हुए चावल की डिलीवरी 17,000 रुपए प्रति टन थी, लेकिन वर्तमान में इसकी कीमत 20,000-21,000 रुपए है। 100 प्रतिशत टूटे चावल की कीमतों में वृद्धि का एक कारण इसका पशु आहार के रूप में उपयोग है क्योंकि जून-जुलाई के दौरान मक्का की कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ है। एक समय में, वैश्विक बाजार में मक्का के दाम गेहूं के भाव से ऊपर थीं। वियतनाम और चीन जैसे देश फ़ीड के लिए 100 फीसदी टूटे चावल खरीद रहे हैं। अफ्रीकी देश भी मानव उपभोग के लिए 100 प्रतिशत टूटे चावल खरीद रहे हैं। 
कारोबारियों के मुताबिक अफ्रीकी देश सफेद और उबले हुए चावल की पांच प्रतिशत वैरायटी खरीद रहे हैं। वर्तमान में पांच फीसदी उबले हुए चावल 355 डॉलर प्रति टन की दर से उपलब्ध हैं, जबकि पांच फीसदी सफेद चावल की कीमत 380 डॉलर है। अफ्रीकी देश लंबे समय से भारतीय चावल खरीद रहे हैं। 
इंटरनेशनल ग्रेन्स काउंसिल (आईजीसी) के मुताबिक, वियतनाम का पांच फीसदी टूटा हुआ भाव 415 डॉलर और थाईलैंड का 379 डॉलर है। आईजीसी के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय चावल की कीमतें साल-दर-साल पांच फीसदी बढ़ी हैं, जबकि थाईलैंड के मामले में ये 20 फीसदी और वियतनाम के मामले में 10 फीसदी कम हैं। माल ढुलाई दरों में वृद्धि ने भी निर्यात को धीमा कर दिया है। इससे पहले, कंटेनर शुल्क चावल निर्यात की कुल लागत का 10-15 प्रतिशत होता था। अब, यह 30-35 प्रतिशत है। 
अप्रैल-जुलाई के दौरान, चीन भारतीय चावल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक था, जिसने 4.76 लाख टन चावल खरीदा। पिछले पूरे वित्त वर्ष में, बीजिंग ने 3.3 लाख टन चावल का आयात किया। इसी तरह, भारतीय चावल के चौथे सबसे बड़े आयातक वियतनाम ने 3.84 लाख टन चावल खरीदा। एपीडा के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले पूरे वित्त वर्ष में वियतनाम ने 2.93 लाख टन का आयात किया था। 
दक्षिण-पूर्व एशियाई और सुदूर-पूर्वी देशों ने हाल ही में भारतीय चावल खरीदना शुरू किया है और ये भारत के लिए महत्वपूर्ण बाजार नहीं थे। एसोसिएशन ऑफ साउथ-ईस्ट एशियन नेशंस (आसियान) की एक संधि है जो सदस्यों के पक्ष में है। दक्षिण-पूर्व एशिया में कोविड लॉकडाउन ने भारतीय चावल निर्यात को भी प्रभावित किया है, जबकि थाईलैंड ने वैश्विक चावल बाजार में वापसी करना शुरू कर दिया है। 
थाईलैंड ने इराक को 4.5 लाख टन चावल निर्यात करने का ऑर्डर पाया है। सात साल बाद इराक थाई चावल खरीद रहा है, हालांकि भारत अभी भी नए अवसर को हथियाने के लिए बेहतर स्थिति में है। यहां तक कि मलेशिया भी थाई चावल खरीद रहा है, जहां नई फसल आ गई है। संभवत:, यह दिसंबर में भारतीय चावल की ओर मुड़ेगा। बांग्लादेश, जिसने अप्रैल-जुलाई के दौरान 7.6 जाख टन चावल खरीदा था, पिछले वित्त वर्ष में 9.1 लाख टन चावल खरीदा था, जबकि श्रीलंका कम से कम एक लाख टन चावल आयात करने के लिए एक निविदा खोल सकता है। 
वर्तमान मानदंडों के अनुसार, एफसीआई के पास ऑपरेशन स्टॉक के रूप में 8.25 लाख टन चावल और 1 अक्टूबर को रणनीतिक भंडार के रूप में दो लाख टन होना चाहिए। वर्तमान में, इसके पास 268.3 लाख टन चावल और 176 लाख टन धान (117 लाख टन चावल) है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, पिछले सीजन (जुलाई 2020 से जून 2021) में चावल का उत्पादन पिछले सीजन के 11.89 करोड़ टन के मुकाबले रिकॉर्ड 12.22 करोड़ टन था। चालू सीजन के दौरान खरीफ चावल का उत्पादन पिछले साल के 10.70 करोड़ टन से 2.5 प्रतिशत अधिक होने का अनुमान है।

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