कपास की उत्पादकता व गुणवत्ता बढ़ाने हेतु कदम उठाने की आवश्यकता

हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । कपास की उत्पादकता बढाने और गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए तेजी से कदम उठाने की आवश्यकता है।जिससे किसानों की आय बढाने और कपास क्षेत्र के विकास को बढावा देने के लिए यह जरुरी है।
दरअसल कंफेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज (सीआईटीआई) के एक वेबिनार में केद्रीय कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि आज हम 300 लाख गांठ कपास उत्पादन के साथ पहले स्थान पर हैं  जो कि विश्व कपास उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा है।हम भारत में उगाए गए अपने कपास उत्पाद के शुद्व निर्यातक हैं ।यद्यपि हमें अब कपास की उत्पादकता बढाने और हमारे किसानों द्वारा उगाए गए कपास की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए तेजी से कदम उठाने होंगे।उन्होंने कहा कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) के संदर्भ में विकसित देशों के साथ बातचीत जारी है।यह सूती कपड़ा क्षेत्र के लिए प्रतिस्पर्धा का समान अवसर प्रदान करने और व्यापक अवसर प्रदान करने में मदद करेगा।उन्होंने कहा कि भारत का सूती वस्त्र तैयार करने के मामले में 3,000 से अधिक वर्ष़ों से वैश्विक एकाधिकार है।हमें वैश्विक कपास उद्योग में उसी प्रभुत्व को वापस लाने की जरुरत है।उन्होंने कहा कि पहली बार भारतीय कपास की ब्रांडिंग का विश्व स्तर पर मान्यता मिलनी शुरु हो गई है तथा कस्तुरी कॉटन के वैश्विक स्तर पर ब्रांड इंडिया के प्रीमियम कच्चे िल के रुप में उभरने की क्षमता है।उन्होंने किसानों से खेत स्तर पर प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कपास निकालने वाली मशीनों का उपयोग करने का आग्रह किया।उन्होंने कहा कि हमें अब गुणवत्ता और उत्पादकता पर ध्यान देने की जरुरत है ताकि हम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए कपास की लागत को उचित और प्रतिस्पर्धी स्तर पर रखते हुए अपने किसानों की उपज और लाभ मार्जिन में वृद्वि कर सकें।उन्होंने कहा कि कपास उत्पादकता को 457 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढाकर 800-900 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करने के लिए सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है जो कि मोटे तौर पर वैश्विक औसत है।उन्होंने कहा कि आगामी वर्ष़ों में निर्यात मौजूदा 33 अरब डॉलर से तीन गुना बढकर 100 अरब डॉलर होना चाहिए

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