सोने के ईजीआर सौदे के प्रस्ताव को बुलियन डीलरों का स्वागत, लेकिन ज्वेलर्स दुविधा में

इब्राहिम पटेल
मुंबई। सेबी द्वारा प्रस्तावित गोल्ड एक्सचेंज और उस पर इलेक्ट्रानिक गोल्ड रिसिप्ट (ईजीआर) के सौदे की योजना को देशभर के बुलियन डीलरों ने स्वागत किया है। लेकिन ज्वेलर्स इस योजना के बारे में दुविधा अनुभव कर रहे हैं । इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसो. (ईब्जा) के सेक्रेटरी सुरेद्र मेहता ने कहा कि यह बात अभी प्रस्ताव के स्तर पर है। इसमें अभी काफी कुछ बाकी है। भारत में सोने का आयात घटाने और बुलियन बाजार में कालेधन के प्रवाह को रोकने के लिए यह सरकारी पहल है। प्रसिद्ध फर्म मेसर्स उमेदमल त्रिलोकचंद झबेरी के कुमार जैन का कहना है कि यह एक पेपर गोल्ड स्कीम है। इससे हमारे ज्वेलर्स निवेशक लंबे अवधि से आराम से दूर होंगे ऐसा भय है।
सुरेद्र मेहता का कहना है कि ईजीआर सौदे से सोने और ज्वेलरी बाजार में पारदर्शकता आएगी। निवेशक फिजिकल सोने के बदले ईजीआर खरीदी को अपने डिमेट एकाउंट में रख सकेंगे। चोरी का भय नहीं रहेगा, बीमा नहीं लेना पड़ेगा और सोने की शुद्धता का बिवाद घट जाएगा। गोल्ड एक्सचेंज में गोल्ड रिसिप्ट सौदे से भारत में सोने का भाव अब अनावश्यकरूप से बढ़ने लगेगा और हमारे ज्वेलर्स ग्राहक बाजार से दूर होंगे, ऐसी आशंका के जवाब में सुरेद्र मेहता ने कहा कि इस बात में कोई दम नहीं है। ज्वेलर्स पहले हालमार्किंग विरोध करते थे अब वे एचयूआईडी (हाल मार्किंग यूनिक आईडेंटीफिकेशन) का विरोध कर रहे हैं । देश में आज तक ज्वेलर्स का धंधा पारदर्शक नहीं रहा, अब जब सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है, तब ज्वेलर्स का विरोध ग्राहकों के हित में नहीं है। गोल्ड एक्सचेंज और ईजीआर ये दिर्घावधि में देश के बुलियन और ज्वेलरी विजनेस के लिए लाभदायक साबित होंगे।
बुलियन और एनालिस्ट भागर्व वैद्य का कहना है कि भारत में वार्षिक 700 से 800 टन सोने का आयात होता है। इस परिस्थिति में गोल्ड एक्सचेंज देश के विकेद्रित व्यापार को संगठित करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। ईजीआर लोन के सामने सिक्योरिटी के तौर पर संपूर्ण सुरक्षित साधन साबित होंगे, जिससे बैंकों से लोगों को सरलता से लोन उपलब्ध होगा।
बुलियन एनालिस्ट दिनेश पारेख का कहना है कि गोल्ड एक्सचेंज यह शेयर बाजार की तरह ही काम करेगा। निवेशक की तरह शेयर खरीदकर अपने डिमेट एकाउंट में रख सकता है, ऐसा ईजीआर यह फिजिकल सोने के समकक्ष होगा। उनका मानना है कि गोल्ड एक्सचेंज की स्थापना होगी तो देश के एमसीएक्स, एंसिडेक्स जैसे कमोडिटी एक्सचेंज के सामने व्यापार की स्वस्थ्य स्पर्धा उत्पन्न होगी।
ज्वेलरी बाजार में 1936 से कार्यरत बुलियन फर्म मेसर्स मेघाजी वनेचंद संघवी का कहना है कि गोल्ड बांड की तरह ऐसी ईजीआर के लिए कोई समय सीमा नहीं होगी। ईजीआर धारक अपनी इच्छा के अनुसार अपना कब्जा कंपनी के शेयर की तरह रख सकते हैं । धारक चाहें तो उस दिन से एक्सचेंज के वाल्ट में जाकर उसके सामने मूल्यांकित वजन का सोना प्राप्त कर सकते हैं । गोल्ड एक्सचेंज पर न्यूनतम कितने ग्राम के ईजीआर का व्यापार किया जा सकेगा वह अभी निर्धारित नहीं है, लेकिन 50 करोड़ के नेटवर्थ वाली कंपनी वोल्ट मैनेजर बनने के लिए सेबी के पास रजिस्ट्रेशन हेतु आवेदन कर सकते हैं ।

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