निर्यातकों द्वारा 18-20 लाख टन चीनी के सौदे

नई दिल्ली। देश भर में चीनी मिलों ने 2021-22 (अक्टूबर-सितंबर) सीजन में 18-20 लाख टन चीनी निर्यात करने के लिए आगे के सौदों पर हस्ताक्षर किए हैं। ये सौदे सब्सिडी के मामले में सरकार द्वारा अब तक कोई प्रतिबद्धता नहीं बताने के बावजूद हुए हैं। 
चीनी मिलों ने अगस्त से वैश्विक बाजारों में चीनी में आई तेजी को भुनाने के लिए सौदों पर हस्ताक्षर किए हैं। सूत्रों ने कहा कि रॉ चीनी के निर्यात के लिए 460- 480 डॉलर प्रति टन के फ्रेट-ऑन-बोर्ड मूल्य पर सौदों पर हस्ताक्षर किए गए थे। पाले और सूखे मौसम के कारण ब्राजील में कम उत्पादन के कारण अंतरराष्ट्रीय चीनी की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई। 
दिल्ली स्थित ग्रीनलीफ कॉर्प के संस्थापक हर्षवीर सोनी ने कहा, भारत के पास अब अपनी चीनी बेचने के लिए निर्यात स्थलों की कमी नहीं है। ब्राजील में उच्च माल ढुलाई दरों से भी उसे फायदा हो रहा है। भारत के मुख्य निर्यात स्थलों में इंडोनेशिया, मलेशिया, यमन, इराक, बांग्लादेश और पश्चिम एशिया शामिल हैं। 
आमतौर पर चीनी मिलें सरकार द्वारा निर्यात सब्सिडी नीति की घोषणा के बाद ही अनुबंध पर हस्ताक्षर करती हैं, लेकिन उद्योग को लगता है कि आकर्षक कीमतों को देखते हुए इंतजार करने की कोई जरूरत नहीं है। एमईआईआर कमोडिटीज इंडिया के प्रबंध निदेशक राहिल शेख ने कहा, निर्यात बहुत अधिक मूल्य-निर्धारित है। हम (भारत) इस सीजन में 50-60 लाख टन चीनी का निर्यात आसानी से कर सकेंगे। 
बता दें कि सीजन 2020-21 के लिए, सरकार ने शुरू में 60 लाख टन चीनी के निर्यात पर 6.0 रुपए प्रति किलोग्राम की सब्सिडी की घोषणा की थी, जो मई में स्थिर वैश्विक कीमतों के कारण घटकर 4.0 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई थी। कृषि पर विश्व व्यापार संगठन के समझौते के अनुसार, भारत 2023 तक चीनी के परिवहन, माल ढुलाई, विपणन, हैंडलिंग और प्रसंस्करण पर सब्सिडी प्रदान कर सकता है। 
सरकार घरेलू बाजार में सरप्लस को खत्म करने और घरेलू कीमतों का समर्थन करने में मदद करने के लिए चीनी निर्यात को सब्सिडी दे रही है। हालांकि, इस साल अब तक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बीच समानता के कारण निर्यात सब्सिडी पर कोई घोषणा नहीं की गई है।

© 2021 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer