धागे के उत्पादन में 50% गिरावट

धागे के उत्पादन में 50% गिरावट
हमारे संवाददाता
पानीपत । सितम्बर माह में बारिश का दौर नहीं थमा था।ऐसे में बारिश ने पिछले कई वर्ष़ों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।बारिश अधिक होने से ब्रेक कांबर से बनाया जाता है।सूखा कांबर उपलब्ध नहीं होने के चलते धागे का उत्पादन आधा रह गया है।हालांकि मांग बराबर चल रह है।आपूर्ति की तुलना में मांग अधिक होने के चलते भाव में एक रुपया किलो की तेजी चल रही है।इन दिनों त्योहारी सयीजन की मांग निकली हुई है।उत्पादन कम होने से कपड़ा उद्योग की परेशानी बढ गई हे।हालांकि इन दिनों त्याहारी मांग के साथ साथ विदेशों में क्रिसमश की खरीदारी का सामान निर्यात होता है।पानीपतका बना काटन यार्न निर्यात उन्मूलक इकाइयों में लगता है।रिंग फ्रेम फाइन काउंट बनाने वाली मिलों से निकलने वाली वेस्ट को कांबर बोला जाता है।पानीपत में कतरन रैथु से रुई बनाकर भी धागा बनाया जाता है।बारिश के चलते नमी अधिक होने से भी कच्चा माल सूखने में समय अधिक लगता है।वहीं पानीपत में ओपन एंड प्लांट लगाने वालों की होड़ मच गई है।मिंक कंबल की डिमांड कम होने से उद्यमियों का रुख कंबल से हटकर ओपन एंड उद्योग पर चला गया है।ओपन एंड प्लांट 15 से 18 करोड़ रुपए जमीन सहित लग जाता है।वहीं मिंक कंबल का यूनिट 20 से 25 करोड़ रुपए में लगता है।ऐसे में ओपन एंड यूनिट को एक्सटेंशन किया जा सकता है।कंबल का काम सीजनल होने से उद्यमियें का ध्यश्प ओपन एंड उद्योग पर टिका है।पहले ओपन एंड यानी धागे बनाने वाले उद्यमी मिंक कंबल बनाने की लाइन में कुदे थे अब मिंक कंबल बनाने वाले उद्यमियों ने ओपन एंड की लाइन अपनानी शुरु कर दी है।ओपन एंड प्लांट लगाने की मशीनरी की आठ आठ महीने की वेटाग पर बुकिंग चल रही है।मशीनरी आने से छह मद्ध पहले एडवांस में मशीनरी निर्माता पैसे ले रहे हैं ।आगामी दिनों में ओपन एंड के 10-12 से अधिक लए प्लांट लगेंगे।

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