काटन यार्न सहित कपड़ा-परिधान निर्यात में 25/30 प्र.श. वृद्धि की संभावना

काटन यार्न सहित कपड़ा-परिधान निर्यात में 25/30 प्र.श. वृद्धि की संभावना
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । पिछले कुछ अर्से से चीन में बिजली की भारी कमी हो रखी है।जिससे चीन में कॉटन यार्न सहित कपड़ा व परिधान उत्पादन बेहद प्रभावित हुआ है।जिससे चीन में कपड़ा से संबंधित उत्पादों की आपूर्ति जटिल हो रखी है।ऐसे में चीन वैश्विक स्तर पर कपड़ा-परिधान खपत की पूर्ति करने में असमर्थन है।ऐसे में वैश्विक खरीदारों की भारतीय कॉटन यार्न सहित कपड़ा और परिधान में अचानक पूछ बढ गई है।ऐसे में भारतीय कॉटन यार्न सहित कपड़ा और परिधान के निर्यात में 25/30 प्रतिशत की बढोतरी की उम्मीद है।जिससे कपड़ा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद बढ गई है।
दरअसल पिछले कुछ अर्से से चीन में बिजली की भारी कमी हो रखी है।जिससे चीन के जिआंगसू और ग्वांगडोंग  कपड़ा उद्योग के प्रमुख क्षेत्रों में शमार में है जिसमें बिजली की भारी कमी है।जिससे इन क्षेत्रों में कॉटन यार्न सहित कपड़ा और परिधान का उत्पादन प्रभावित हो रखा है।जिससे चीन से कॉटन यार्न सहित कपड़ा और परिधान का निर्यात विशेष रुप से प्रभावित हो रखा है।जिसके तहत कोरोना महामारी से पूर्व चीन का अमेरिका और यूरोपीय देशों में कपड़ा और परिधान के निर्यात में 39 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी जो कि घटकर 31 प्रतिशत पर रह गई है और यह आगे 30 प्रतिशत से भी नीचे जाने की आशंका है।ऐसे में वैश्विक खरीदारों की भारतीय कपड़ा और परिधान में अचानक ताजा रुचि बढी है।जिसके तहत पश्चिम देशों से भारतीय कपड़ा और परिधान के निर्यातकों के पास ताजा ऑर्डर आना शुरु हो गया है।ऐसे में भारतीय कपड़ा और परिधान का निर्यात क्रिशमश और नव वर्ष पर व्यापक रुप से बढने की उम्मीद है।वहीं केयर रेटिंग्स की सहायक निदेशक एवं उद्योग अनुसंधान भाग्यश्री भाटी ने कहा कि कपास की मांग में वृद्वि और आपूर्ति जटिल रहने से कपास की कीमतों में तेजी आ रखी है जो कि वैश्विक स्तर पर कपास की कीमत एक दशक के उच्चस्तर पर है।जिससे भळारतीय कपास की कीमतों में भी वृद्वि हो रखी है।बहरहाल वैश्विक बाजार की तुलना में भारतीय कपास की कीमत अपेक्षाकृत कम है।ऐसे में अक्टूबर 2020 से लेकर अगस्त 2021 के तहत भारत में एस-6 किज्ञम की कपास की कीमत औसतन 135 रुपए प्रति किलोग्राम थी जो कि इस अवधि के तहत कॉटलुक ए इंडेक्स की औसत वैश्विक कीमत 145 रुपए प्रति किलोग्राम से 6.6 प्रतिशत कम है।वहीं वित्त वर्ष 2019 के तहत भारतीय कॉटन यार्न का निर्यात 5.5 प्रतिशत बढकर लगभग 10 लाख टन हो गया था।वहीं इस वर्ष अप्रैल से जुलाई तक शिपमेंट लगभग 60 प्रतिशत बढकर 448,000 टन हा गया।ऐसे में भारतीय कॉटन,कॉटन यार्न,कपड़ा और परिधान निर्यात में और वृद्वि होगी क्योंकि चीन में बिजली की कमी बनी हुई है और कॉटन,कॉटन यार्न,कपड़ा और परिधान का उत्पादन प्रभावित हो रखा है।जिससे चीन में कपड़े से संबंधित तमाम उत्पादों की आपूर्ति जटिल हो गई है।वहीं क्रिसिल रिसर्च के निदेशक हेतल गांधी ने कहा कि भारतीय कपास वैश्विक कशिस की कीमतों की तुलना में कम कीमतों पर उपलब्ध है जिससे भारतीय कपास के निर्यात को बढावा मिल रहा है और आगे भी मिलता रहेगा।बहरहाल कॉटन की ऊंची कीमत से कपड़ा और परिधान निर्यात में सुधार हो रखा है।वहीं घरेलू कपड़ा और परिधान उद्योग में उत्पादन लागत काफी बढ रखी है।जिससे घरेलू कपड़ा और परिधान निर्मातओं को उत्पादन के मोर्चे पर भारी कठिनाई से जूझना पड़ रहा है।

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