भारतीय स्टेनलेस स्टील पर भारी पड रहा चीन और इंडोनेशिया का आयात

भारतीय स्टेनलेस स्टील पर भारी पड रहा चीन और इंडोनेशिया का आयात
पिछले साल स्टेनलेस स्टील के आयात  में 177 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसमें से ज्यादातर चीन और इंडोनेशिया से आयात किया गया है। इससे घरेलू स्टेनलेस स्टील उद्योग मुश्किल में पड़ गया है। सेल के पूर्व चेयरमैन और पीएचडीसीसीआई के मेटल्स और मिनरल्स कमेटी के चेयरमैन अनिल कुमार चौधरी का कहना है कि आयातित स्टेनलेस स्टील से घरेलू उद्योग पर संकट के बादल छा गए हैं। भारत स्टेनलेस स्टील का दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। इसकी कुल क्षमता हर साल 50 लाख टन स्टेनलेस स्टील बनाने की है। यह देश की जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त है। स्टेनलेस स्टील में 12 फीसदी का उपयोग निर्माण और संरचना में होता है, 13 फीसदी का वाहनों, रेलवे और परिवहन क्षेत्र में, 30 फीसदी स्टेनलेस स्टील का उपयोग पूंजीगत सामानों में और 44 फीसदी का उपयोग ड्यूरेबल्स तथा घरेलू बर्तन में होता है। इसके अलावा एक फीसदी स्टेनलसे स्टील का उपयोग अन्य कार्य़ों में भी होता है। भारतीय स्टेनलेस स्टील उद्योग की सहायता के लिए इस्पात मंत्रालय के नेतृत्व में भारत सरकार ने कई कदम उठाए हैं। उद्योग को बड़ी मुश्किल का सामना तब करना पड़ा था जब आयात पांच लाख टन का निशान पार कर गया था। 2015-16 में वार्षिक खपत का करीब 20 फीसदी आयात हुआ था। मुश्किलों से निपटने के लिए सरकार ने (जून 2015 में) एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाया है, 2016 में स्टेनलेस स्टील क्वालिटी ऑर्डर जारी किया (फरवरी 2017 से प्रभावी हुआ) और काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाई गई जो सितंबर 2017 में तीन से आयात के खिलाफ लागू हुई। भारतीय स्टेनलेस स्टील उद्योग के विकास की सफल कहानी एक फरवरी 2021 की बजट घोषणा के बाद से रुक सी गई है। बजट में कतिपय हॉट रॉल्ड और कोल्ड रॉल्ड स्टेनलेस स्टील फ्लैट प्रोडक्ट के आयात पर सीवीडी अस्थायी तौर पर खत्म कर दी गई है और यह 30 सितंबर 2021 तक के लिए है जो चीन से निर्यात होने या निर्यात की शुरुआत के लिए है। इसमें स्टेनलेस स्टील के फ्लैट उत्पादों के आयात पर अंतरिम सीवीडी की भी खत्म करने की घोषणा की गई है जो इंडोनेशिया से आता है या निर्यात किया जाता है। बजट के फैसले से देश में आयात की बाढ़ आ गई।

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