कपास के भाव बढ़ने से निर्यात फॉरवर्ड सौदों में कमी

कपास के भाव बढ़ने से निर्यात फॉरवर्ड सौदों में कमी
मुंबई। घरेलू बाजार में कपास की नई फसल के लिए निर्यात के फॉरवर्ड सौदों में कमी आई है। कारोबारियों का कहना है कि भारतीय व्यापारियों ने अब तक मौजूदा 2021-22 (अक्टूबर-सितंबर) मार्केटिंग वर्ष में कपास के 1.50-2 लाख गांठ (1 गांठ = 170 किलोग्राम) निर्यात करने के लिए फॉरवर्ड सौदों पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पिछले वर्ष़ों में में हुए 5-8 लाख गांठ सौदों की तुलना में काफी कम है।  फॉरवर्ड सौदे लागत और माल ढुलाई के आधार पर 98-105 सेंट प्रति पाउंड की कीमत पर किए गए थे। 
अहमदाबाद स्थित डी पी कॉटन के निदेशक धर्म़ेंद्र जैन का कहना है कि निर्यात सौदे तुलनात्मक दृष्टि से कम हो रहे हैं। कॉटन खरीददार भी सचेत हैं, घरेलू बाजार में कॉटन के दाम तेजी से बढ़ने के कारण वे भी बड़ी खरीद नहीं करना चाहते। 
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया में, सबसे सक्रिय अक्टूबर कपास वायदा बुधवार को 30,940 रुपए प्रति गांठ की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया, जबकि इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज पर दिसंबर कपास वायदा 113.93 सेंट प्रति पाउंड के 10 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया। 
बाजार सहभागियों ने कहा कि भारत में कपास की कीमतों में वृद्धि वैश्विक बाजारों के रुझान, घरेलू खपत में वृद्धि, इस मौसम में कम रकबे और फसल के नुकसान के कारण हुई है। खरीफ सीजन के लिए अपने पहले अग्रिम अनुमान में, सरकार ने 2020-21 में 354 लाख गांठ के मुकाबले कपास उत्पादन 362 लाख गांठ रहने का अनुमान लगाया है। 
कोटक जिनिंग एंड प्रेसिंग इंडस्ट्रीज लिमिटेड के निदेशक विनय कोटक ने कहा, इस साल अधिकांश खेप बांग्लादेश और चीन की ओर जा रहे हैं, जिन पर नवंबर-दिसंबर डिलीवरी के लिए हस्ताक्षर किए गए हैं। निर्यातकों के मुताबिक मार्केटिंग वर्ष 2020-21 में भारत ने 70-75 लाख गांठ कपास का निर्यात किया, जिसमें बांग्लादेश, चीन और वियतनाम प्रमुख खरीदार थे। भारतीय कपास निर्यात में लगभग आधा हिस्सा बांग्लादेश का है, इसके बाद चीन का स्थान है।

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