वैश्विक बाजार में भारतीय चीनी निर्यात की संभावनाए बढ़ी

वैश्विक बाजार में भारतीय चीनी निर्यात की संभावनाए बढ़ी
अन्य उत्पादक देश संकट में
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । वैश्विक बाजार में चीनी के निर्यात की संभावनाएं बढ गई है।जिसके तहत एशियाई देशों में की मांग को पूरा करने के लिए भारतीय मिलों की चीनी ही सबसे सस्ती पड़ेगी।वहीं चीनी के अन्य प्रमुख उत्पादक देशों में गन्ने की खराब हुई फसल और चीनी उत्पादित में संभावित कमी को देखते हुए विश्व बाजार में तेजी का रुख बनने लगा है।इससे चालू गन्ना पेराई मौसम 2021-22 के तहत गन्ना किसानों और घरेलू चीनी मिलों के दिन बहुरने वाले हैं ।
दरअसल विश्व चीनी बाजार में ब्राजील को चालू मौसम में धक्का लगेगा।जिसके तहत महंगे तेल के चलते वहां से होने वाली ढुलाई का खर्च बढने से चीनी के महंगा होने का खतरा है।ऐसे में एशियाई देशों में ब्राजील की मिलों की चीनी के पहुंचने की संभावना कम हो गई है।चूंकि तेल के मूल्य में तेजी से एक तरफ चीनी की ढुलाई महंगी पड़ेगी वहीं दूसरी तरफ ब्राजील चीनी की बजाय एथनॉल उत्पादन पर विशेष जोर दे सकता है।इस संभावना का लाभ उठाने के लिए घरेलू चीनी मिलों ने तैयारियां शुरु कर दी है।
वहीं घ्ॅँॅ चीनी बाजार की स्थितियों पर आयोजित वर्चुअल सम्मेलन में चीनी के वैश्विक स्टॉक,चीनी के उत्पादन-आपूर्ति और वैश्विक जिंस बाजार की ताज6 स्थितियों पर विस्तार से चर्चा की गई।जिसके तहत कहा जा रहा है कि ब्राजील ने तेल के बढते मूल्य को देखते हुए एथनॉल उत्पादन पर ध्यान केद्रित कर रखा है जिससे वहां चीनी का उत्पादन कम होगा।ऐसे में भारतीय चीनी निर्यातकों के लिए रास्ता और आसान हो जाएगा।ऐसे में इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) कू महानिदेशक अविनाश वर्मा ने स्पष्ट किया है कि इसके लिए वैश्विक बाजार में हमे अपनी पोजीशन लेनी होगी जिससे घरेलू चीनी उद्योग को निर्यात का लाभ प्राप्त हो सके।भारत में फिलहाल 85 लाख टन चीनी का पिछला स्टाक पड़ा हुआ है जो कि सामान्य से 25 लाख अधिक है।चालू मौसम की गन्ना पेराई नवम्बर से तेज हो जाएगी और चीनी का उत्पादन बढेगा।ऐसे में अनुमान है कि मार्च 2022 तक कुल 50 से 60 लाख टन चीनी का निर्यात हो जाएगा।

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