रिजर्व बैंक ने रिटेल मुद्रास्फीति का अनुमान घटाकर किया 5.3 प्र.श.

रिजर्व बैंक ने रिटेल मुद्रास्फीति का अनुमान घटाकर किया 5.3 प्र.श.
विकास दर 9.5 प्र. श. घोषित

हमारे संवाददाता

नई दिल्ली । रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने 8 अक्टूबर 2021 को अपने उम्मीद के अनुरुप प्रमुख नीतिगत दर के तहत रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है और इसे रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर पर यथावत् रखा है।यह लगातार आठवां मौका है जब आरबीआई ने रेपो रेट को यथावत् रखा है।हालांकि आरबीआई ने आर्थिक पुनरुद्वार को लेकर कोरोना महामारी के दौर में दिए गए प्रोत्साहन उपायों को वापस लेने का संकेत भी दिया है।

दरअसल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो रेट को चार प्रतिशत के स्तर पर बरकरार रखने का फैसला किया है।वहीं रिवर्स रेपो रेट को भी 3.35 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है।इस बारे में आरबीआई के गर्वनर शक्तिकांत दास ने ऑनलाइन प्रसारण के जरिए मौद्रिक नीति की बैठक के नतीजों की घोषणा करते हुए कहा कि आरबीआई ने मौद्रिक रुख को नरम बनाए रख्नो का भी फैसला किया है।जिसके लिए एमपीसी के पांच सदस्यों ने मौद्रिक रुख को नरम रखने के पक्ष में मद दिया वहीं एक सदस्य ने इसके विरोध में मत दिया।आरबीआई के गर्वनर ने संकेत दिया कि आरबीआई मौद्रिक प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त नगदी का धीरे-धीरे समायोजन करेगा।अभी यह नौ लाख करोड़ रुपए से अधिक है।वहीं आरबीआई ने सरकारी प्रतिभूतियों के अधिग्रहण (जीएसएपी) कार्यक्रम को रोकने का फैसला किया है।इस कदम से प्रणाली में और तरलता का प्रवाह रुकेगा।हालांकि आरबीआई के गवर्नर ने स्पष्ट किया कि यह कदम नरम मौद्रिक रुख को पलटने के लिए नहीं उठाया गया है।आरबीआई ने जीएसएपी कार्यक्रम के जरिए पिछले दो तिमाहियों में 2.2 लाख करोड़ रुपए के बांड खरीदे हैं ।आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष 2021-22 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 9.5 प्रतिशत की वृद्वि दर के अनुमान को कायम रखा है।इसके अतिरिक्त आरबीआई का अनुमान है कि मार्च 2022 तक मुख्य मुद्रास्फीति 5.3 प्रतिशत रहगी।हालांकि पहले इसे 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान था।उन्होंने कहा कि कुल मांग सुधर रही है बहरहाल इसमें सुस्ती बनी हुई है।वहीं उत्पादन अब भी कोरोना महामारी के पूर्व के स्तर से कम है और पुनरुद्वार असंतुलित है।उन्होंने कहा कि मौजूदा 14 दिन की वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) नीलामी को तेज किया जाएगा और अगले दो माह के तहत नीलामी राशि को एक-दो लाख करोड़ रुपए बढाया जाएगा।इससे यह दिसम्बर तक छह लाख करोड़ रुपए हो जाएगी।ऐसे में जरुरत होने पर आरबीआई 28 दिन का वीआरआरआर पेश करने पर भी विचार कर सकता हे।आरबीआई का इरादा प्रणाली से अधिशेष नगदी घटाने का है।जिसे चालू वित्त वर्ष के अंत तक दो-तीन लाखक रोड़ रुपए पर लाया जाएगा। आरबीआई के गर्वनर ने कहा कि कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद से आरबीआई ने तेज और सतत पुनरुद्वार के लिए प्रणाली में पर्याप्त तरलता को कायम रखा है।उन्होंने कहा क अब अर्थव्यवस्था कोरोना महामारी के प्रभाव से उबरती दिख रही है।ऐसे में बाजार भागीदारों तथा नीति निर्माताओं का मानना है कि कोरोना महामारी के तहत उपायों से जो नगदी डाली गई थी जिसे वित्तीय स्थिरता के मद्देनजर उसे वृहद आर्थिक घटनाक्रमों की दृष्टि से नीचने लाने की जरुरत है।आरबीआई ने मार्च 2020 से रेपो रेट में कुल 1.15 प्रतिशत की कटौती की है।वहीं इससे पहले 2019 की शुरुआत से रेपो दर 1.35 प्रतिशत घटाई गई थी।उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर का बुरा दौर पीछे छूट चुका है और कोरोना महामारी के टीकाकरण काफी तेज हुआ है।इससे आर्थिक गतिविधियों को सामान्य करने को लेकर भरोसा बढा है।अब भारतीय अर्थव्यवस्था पुररुद्वार रफ्तार पकड़ रहा है।

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