सूत में एकतरफा तेजी से कपड़े का भाव भी बढ़ा

पूरन मर्दा (सोमानी)
भारतीय अर्थयवस्था और राजनीति में सरकारीकरण और नीतिकरण पर चर्चा चल ही रही थी। सरकारे खजाने में सफेद हाथी ``एयर इंडिया'' फिर से टाटा संस की हो गई। क्या फरक होता है सरकारीकरण और नीजी कंपनियों में। इसे समझने के लिए सबसे पहले बीएसएनएल और निजी मोबाइल कंपनियां देख लें। एनटीसी की मिलों का नामोनिशान मिट गया है। बøकों की कार्य प्रणाली और निजी बøकों में रात-दिन का फरक है। सरकारी स्कूल और निजी स्कूलों में वेतन और परिणाम में बहुत फरक है। निजी स्कूल बेहतर परिणाम देते हैं । बिजली विभाग में भी निजी हाथों में कार्य आ रहा है। इसके बाद आता है आरक्षण जिसमें कुशल लोग बाहर है और कोटा के चलते कुशल और होशियार प्रत्यासी की जगह दूसरो को नौकरी, शिक्षा आदि मिल जाती है।
टेक्सटाइल मार्केट में तेजी का तूफान कुछ शांत हुआ है। लेकिन थमने वाला नहीं लगता। पहले कोर्स काउन्ट और अब 44-60 में तेजी से उच्च भावों का दौर चल सकता है। कपास का खेल कमोडी एक्सचेंज में चलता है, उसका रंग आता है। सूत बाजार पर और कपड़ा बिना पड़ता के बदरंग होता जा रहा है। सप्ताह भर में रोटो के कपड़े में भाव बढ़े और पीसी में हल्का सुधार हुआ, लेकिन सूती कपड़ा रुका हुआ सा है। दलाल कहते हैं  लेवाली नहीं है। बुनकर सूत बाजार को देखकर अभी बेचना तो नहीं चाहता। रोटो के यार्न में 12 रुपया किलो एक सप्ताह तथा दो सप्ताह में 20 से 21 रुपया किलो बढ़ा है। पीसी का यार्न भी बढ़ने की ओर ही है। अब बाजार ऊंची रेंज में आ गया है। साधारण घटबढ़ के बाद बढ़ने की ओर ही रह सकता है।
पापलीन और कैम्ब्रिक : पापलीन और कैम्ब्रिक के बाजार दो सप्ताह पहले बढ़े और बिता सप्ताह सुस्त और व्यापार कमजोर का रहा। सूती धागा कुछ रुका, कुछ सुधरा वाली बात है कोर्स काउन्ट कमजोर है तथा 44 और 60 में आशानुरूप बढ़ा है। अब पका माल, पड़ता, लेवाली, सबके बाहर बाजार होता जा रहा है। कई सालों तक रोटो चलाने वाले अब सूती धागे में कैम्ब्रिक बनाने वाले मदन शर्मा ने बताया कि बाजार आम व्यापारी, बुनकर और दलाल के बाहर ही व्यापार हो गया है। ये सटोरिया प्रवृति सी लग रही है। इसमें नुकसान ज्यादा लोगों को और फायदा बहुत कम लोगों को होता है। 56x52 कैम्ब्रिक के भाव 22.75 स्थिर से है। लेवाली भी नहीं और सूत बाजार को देखते हुए बेचवाली भी नहीं है।
रोटो और पीसी : रोटो में यार्न एकतरफा व अफलातून तेजी से कपड़े के भावों में वृद्धि के साथ व्यापार भी हो रहा है। कपड़ा व्यवसायी सतिष अग्रवाल ने बताया कि 57 किलो जैसी क्वालिटी में 60-70 पैसा मीटर बढ़ा। ऊंची क्वालिटी से ज्यादा, हल्की क्वालिटी में भाव बढ़े हैं । सूरत लाइन में व्यापार भी ठीक हो रहा है और अब दीपावली-लाभ पंचमी के बाद बाजार अच्छा ही रहना चाहिए। पीसी के कपड़े में यार्न के साथ हल्का सुधार है। अब व्यापार का रंगढंग बदल गया है। कोरोना काल तीव्र नहीं हुआ तो सभी बाजारों में भावों की वृद्धि जारी रह सकती है। रॉ-मटीरियल बढ़ता है, ट्रांसपोर्ट चार्जेस बढ़ते हैं , मजदूरी बढ़ती है। इन्वेस्टमेंट बढ़ता है। इसलिए भाववृद्धि लगती है।

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