निर्यात को बढ़ावा देने हेतु परिधान क्षेत्र पर जोर

उत्तर प्रदेश में निर्यात लक्ष्य पूरा करने हेतु कवायद
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । अगले पांच वर्ष़ों के भीतर उत्तर प्रदेश के निर्यात को बढाकर 3 लाख करोड़ रुपए करने का लक्ष्य है।जिसको लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रुप में परिधान क्षेत्रों की पहचान की है जिसमें विकास की असीम संभावनाएं हैं ।जिससे परिधान क्षेत्र के सहारे रोजगार में नए अवसर सृजित हो सकेंगे। 
दरअसल इंवेस्ट यूपी के इशारे पर प्राइसवाटरहाउसकूपर्स द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह पाया गया है कि विभिन्न देशों के बीच टैरिफ नियमों में अंतर है।जिससे भारत और विशेष रुप से उत्तर प्रदेश बंगलादेश,तुर्की और कंबोडिया जैसे देशों से पिछड़ रहा है।ऐसे में परिधान निर्यात में उत्तर प्रदेश की उपस्थिति बढाने के लिए कई उपायों का प्रस्ताव किया गया है।जिसमें यूएसए,यूके,यूरोपीय देश,कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार समझौतों पर फिर से बातचीत करने के प्रयास शामिल हैं ।ऐसे में जब 2020 के कोरोना महामारी के तहत कई विदेशी कंपनियां चीन से बाहर स्थानांतरित हो रही थी।जिसको लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से विकास के अवसर को देखकर उत्तर प्रदेश के निर्यात में सुधार का प्रस्ताव रखा है।जिसको लेकर 100 उत्पादों को कवर करते हुए 15 क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश के निर्यात पैटर्न का अध्ययन करने के लिए पीडब्ल्यूसी को नियुक्त किया है।जिसके तहत आगे की राह पर सुझाव देने वाली एक रिपोर्ट अब उत्तर प्रदेश के निर्यात को मौजूदा 1.21 लाख करोड़ रुपए से बढाकर 2025-26 तक 3 लाख करोड़ रुपए तकले जाने म4zं मदद करने के लिए तैयार है।जिसके तहत गौतमबुद्वनगर और कानपुर परिधान का हब है।जिसको लेकर पीडब्ल्यूसी की तरफ से कहा गया है कि भारत और बंगलादेश, तुर्की, कंबोडिया जैसे देशों के बीच टैरिफ दरों में कम से कम 10 प्रतिशत अंतर है जो कि भारत के लिए प्रतिस्पर्धा करने के लिए इसे प्रतिकूल बनाता है।इन देशों के प्रतिकूल टैरिफ संरचना के चलते उत्तर प्रदेश तुर्की,यूके और इटली से पिछड़ रहा है जो कि जर्मनी और यूके जैसे देशों को हाउस कोट और इसी तरह के सिंथेटिक फाइबर कपड़ों के निर्यात में कोई टैरिफ नहीं लगाते हैं ।इसी तरह संयुक्त राज्य अमेरिका,जर्मनी,ब्रिटेन,फ्रांस और स्पेन जैसे देशों को उत्तर प्रदेश कॉटन टी-शहर्ट का निर्यात होंड्डारास,निकारागुआ,अल सल्वाडोर,बंगलादेश,तुर्की,पुर्तगाल आदि से नियात के लिए खो रहा हा जिन पर शून्य शुल्क है।वहीं पीडब्ल्यूसी ने गौतमबुद्वनगर और कानपुर में ढांचागत हस्तक्षेप का प्रस्ताव दिया है।जिन उपायों में गौतमबुद्वनगर में एक परिधान पार्क की स्थापना,सामान्य सुविधा केद्र,परीक्षण एजेंसियों द्वारा प्रयोगशालाएं,डिजाइन प्रयोगशालाएं और परिधान निर्माण पािशिक्षण केद्र,कच्चे माल के डिपो और सोर्सिंग हब शामिल है।उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में पहले से ही कथकरघा, पावरलूम,रेशम,कपड़ा और परिधान नीति 2017 से है जिसका उपयोग निर्माताओं को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए किया जा रहा है।बहरहाल इसे और अधिक प्रचारित करने की आवश्कता है।इन कच्चे माल और परिधान के निर्माण में स्वचालन के उन्नयन के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर भी विचार किया जा रहा है।वहीं निर्माताओं को विविधता लाने के लिए प्रात्साहित करने की भी आवश्यकता है।

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