पापलीन में निरंतर बढ़ रही मांग

हमारे संवाददाता
तेजी के प्रचण्ड वेग ने एक बार तो उद्यमियों को इतना हत्तोत्साहित किया कि वे किंकर्तव्य विमूढ की स्थिति में आ गये। शनै: शनै: सुधार का बहुमुखी प्रकाश ने काम करना प्रारंभ किया और समय की नजाकत के साथ सामंजस्य बिठा कर औद्योगिक कार्यकलापों को अंजाम देना प्रारंभ किया। दिवाली के कारण उद्यमियों में यह विश्वास पैदा हो गया कि देर-सबेर सब कुछ व्यवस्थित हुए बिना नहीं रहेगा। भावों का क्रम भी ग्राहकों के अभ्यस्त होने के साथ जम जायेगा। आज की लागत के अनुसार भाव नहीं आ रहे हैं  परंतु पुराने भावों में वृद्धि के साथ कार्य को गति मिल रही है। वर्तमान में पापलीन का उत्पादन कम होने से पर्याप्त मात्रा में माल का उपलब्ध होना संभव नहीं बन पा रहा है। पापलीन की नई रेट लिस्टें जारी होने के समाचार है। नई रेट लिस्टों के अनुसार लगभग पांच रुपयों की वृद्धि प्रति मीटर पापलीन में की गई है। पूर्व में जो क्वालिटी 35/- की थी उसके 40/- व 40/- की पापलीन के 45, पøतालीस की पापलीन के 50/- व 50/- की पापलीन के 55/- रुपये किये गये हैं ।
बालोतरा कॉटन मशीन एसोसियेशन के अध्यक्ष हसमुख मेहता (सीसीएम) ने एक विज्ञप्ति जारी कर इúधन खर्च़ों में अनियंत्रित वृद्धि के कारण प्रोसेसदरों में आठ रुपये प्रति थान अक्टूबर माह से बढ़ाने के निर्णय की जानकारी दी। मेहता ने लागत अत्यधिक बढ़ने से छूट की अवधि पेमेन्ट हेतु 30 दिन निर्धारित करने का भी उल्लेख किया। उत्पादकों के लिए प्रोसेस आवश्यक होने से मानने की मजबूरी है।
बाजार में उभरती तेजी ने उद्यमियों को असमंजस में डाल दिया है। उत्पादन में प्रयुक्त ग्रे क्लाथ, रंग रसायन, कास्टिक, कोयला, लोहा, पैकिंग मेटेरीयल आदि के भाव आसमान छूने से लागत जिस कदर बढ़ गई है उसके हिसाब से बाजार में लेवाली नहीं बन पा रही है। नाईटी, प्रिन्ट, रेयान आदि की लेवाली में कोई दम नजर नहीं आ रहा है। पापलीन की लेवाली तो है मगर आज की लागत के अनुसार भाव नहीं आ रहे हैं । पापलीन की मांग भी बराबर बढ़ रही है। यही स्थिति बनी रही तो नये भाव भी निश्चित रूप से निकट भविष्य में आने की संभावना प्रबल है सूत्रों के अनुसार ग्रे के बढ़े भावों में भी अच्छे सौदे हो रहे है। इससे लगता है उद्यमियों को इस ऐतिहासिक तेजी के बावजूद भी ग्राहकी अच्छी चलने की इस माहौल में भी भारी उम्मीद लगती है। हमारी धारणा बनती है कि लम्बे प्रोसेसिंग खर्च़ों में किसी न किसी विकल्प को खोज कर उद्यमी अपना उत्पादन ले लेंगे। 
मर्सराईज का खर्चा दो रुपये बढ़ने से नई स्थिति में अनमर्सराईज पापलीन के उत्पाद को बढ़ावा मिल सकता है। नामचीन घराने की पापलीन तो भावों के बढ़ने के बाद भी अपने नाम व गुणवत्ता से निश्चित बिकती रहेगी। उनको नये भाव भी मिल जाएंगे। समस्या जो विकट रूप से खड़ी हो रही है वह छोटे उत्पादकों को, वे अपना अस्तित्व बचा भी पाएंगे या नहीं इसमें सन्देह है।

© 2021 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer