कपास का निर्यात घटने की संभावना

कपास का निर्यात घटने की संभावना
स्थानीय मांग बढ़ने से
रमाकांत चौधरी 
नई दिल्ली । पिछले सीजन के कपास का कैरी ऑवर स्टॉक लगभग आधा रह गया है।जिससे कपास की आपूर्ति सीमित रह गई हे और घरेलू मांग बढ रही है।जिससे चालू सीजन में कपास का निर्यात 36 प्रतिशत तक घटने की संभावना है।
दरअसल कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया की तरफ से एक वेबिनार का आयोजन किया गया था।जिसमें वैश्विक लुइस ड्रेफस कंपनी में इंडिया ड्रेफस बिजनेस के महाप्रबंधक सुमीत मित्तल ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े कपास उत्पादक देश भारत से कम कपास के कम निर्यात के चलते वैश्विक कीमतें बढ सकती है।जिससे अग्रणी उपभोक्ता देश चीन में कपास की खपतज बढ रखी है और कीमत एक दशक के उच्च स्तर पर पहुंच गई है।उन्होंने कहा कि देश में 2020-21 में लगभग 7.8 मिलियन कपास गांठों का निर्यात किया गया जो कि पिछले आठ वर्ष़ों में सर्वाधिक है।भारतीय कपास निगम ने भारतीय कपास कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखते हुए अपने गोदामों से कपास की लगातार बिक्री की है।वहीं पहली अक्टूबर से शुरु हुए नए सीजन में कपास के अधिक निर्यात और घरेलू खपत के चलते कैरी फॉरवर्ड स्टॉक घटकर 65 लाख गांठ रह गया है जो कि एक साल पहले 12.5 मिलियन गांठ था।चूंकि घरेलू मिलों की अच्छी खपत और वैश्विक कीमतों में तेजी के चलते विगत सप्ताह कपास की घरेलू कीमतों को रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा दिया है जिससे भारत को अन्य आपूर्तिकर्ता की तुलना में लाभ कम रह गया है।ऐसे में इस समय कपास निर्यात के लिए अच्छी गुणवत्ता वाला कपास उपलब्ध नहीं है।ऐसे में अगले महीने से कपास की अच्छी गुणवत्ता की आवक सुधरेगी और आवक का दबाव बनने पर कपास की कीमतों में कमी आने की संभावना है।वहीं गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आन्ध्र प्रदेश सहित अन्य प्रमुख कपास उत्पादक राज्यारें में सितम्बर में भारी बारिश हुई थी।जिससे नएकपास मौसम में कपास का उत्पादन घटने की संभावना है क्योंकि बारिश से सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में अगेती बोई गई कपास फसल बुरी तरह से प्रभावित हुई है।जिससे कपास की फसल व गुणवत्ता प्रभावित होगी।जिसके तहत कपास की पहली तुड़ाई में कपास की खराब गुणवत्ता आने की संभावना है।

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