गुजरात में मूंगफली का उत्पादन 40 लाख टन होने का अनुमान

गुजरात में मूंगफली का उत्पादन 40 लाख टन होने का अनुमान
गांधीनगर। खरीफ फसलों के लिए गुजरात राज्य सरकार ने पहला अग्रिम अनुमान जारी किया है जिसमें गुजरात में मूंगफली का उत्पादन 39.94 लाख टन होने का अनुमान है। यह उत्पादन पिछले साल के 39.86 लाख टन से थोड़ा ज्यादा है। हालांकि किसानों और विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल प्रतिकूल मौसम की वजह से उपज कम रहने की संभावना है। 
गुजरात में मूंगफली का रकबा इस खरीफ सीजन में पिछले साल के 20.65 लाख हेक्टेयर से घटकर 19.09 लाख हेक्टेयर हो गया है। किसानों और वैज्ञानिकों का कहना है कि जुलाई-अगस्त में लंबे समय तक सूखे मौसम के साथ-साथ अक्टूबर में जारी बारिश से पैदावार कम रहने की संभावना है, जबकि सरकारी अनुमान में उपज 2.08 टन प्रति हेक्टेयर रहेगी, जो कि सीजन 2020-21 के चौथे अनुमान 1.89 टन प्रति हेक्टेयर से अधिक है। 
हालांकि, कृषि राज्य मंत्री मुकेश पटेल ने कहा कि रकबे में मामूली गिरावट के बावजूद राज्य की मुख्य तिलहन फसल का उत्पादन अच्छा रहने की उम्मीद है। पटेल ने कहा कि रिपोर्ट बताती है कि इस साल राज्य में मूंगफली की फसल का आकार पिछले साल जितना बड़ा होगा। सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन पर मूंगफली खरीदने की तैयारी कर रही है जो कि 5,550 रुपए प्रति क्विंटल है। लेकिन किसानों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उपज काफी कम रहेगी। 
जामनगर के एक किसान अमित मकाड़िया ने कहा, (जिन्होंने 15 बीघा में मूंगफली बोई है) सामान्य वर्ष़ों में औसत 20 मण (एक मण यानी 20 किलोग्राम) के मुकाबले, इस साल पैदावार 12 से 15 मण प्रति बीघा (6.25 बीघा एक हेक्टेयर और 50 मण यानी एक टन) रहने की संभावना है क्योंकि कई जगह किसानं जुलाई-अगस्त में सूखा रहने से महीने भर के दौरान अपनी फसल की सिंचाई नहीं कर सके। अब, अक्टूबर में लगातार बारिश से फसल को नुकसान होने का खतरा है क्योंकि यह फसल पकने का समय है। 
जूनागढ़ में जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय (जेएयू) में विस्तार शिक्षा के निदेशक प्रो एचएम गाजीपारा इससे सहमत हैं। उन्होंने कहा कि जुलाई-अगस्त में सूखे की वजह से जब मूंगफली की फसल फूल और पेगिंग अवस्था में थी और इसकी नमी की मांग अधिक थी। लेकिन सिंचाई का पानी हर जगह उपलब्ध नहीं था। दूसरे, अक्टूबर में लगातार गीला मौसम, जब फसल कटाई के लिए तैयार होती है, कटाई में देरी को मजबूर कर रही है। इसका मतलब है कि इस सीजन में उपज 10 से 15 फीसदी कम होगी। 
जेएयू के मुख्य तिलहन अनुसंधान केंद्र के शोध वैज्ञानिक राजेश मदारिया का कहना है कि सौराष्ट्र के लगभग 50 प्रतिशत में सूखे के दौरान सिंचाई का पानी नहीं था। लेकिन अगस्त के अंतिम सप्ताह और फिर सितंबर में हुई बारिश ने परिदृश्य को उलट दिया है। अक्टूबर में लगातार बारिश उखड़ी हुई फसल को नुकसान पहुंचा रही है और इससे फंगल रोग हो सकते हैं।
गुजरात स्टेट एडिबल ऑयल्स एंड ऑयल सीड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष समीर शाह ने कहा कि फसल की स्थिति बहुत निराशाजनक नहीं है। हमारा फसल सर्वेक्षण जारी है और कुछ दिनों में परिणाम सामने आने की संभावना है। लेकिन हमें जो भी फील्ड रिपोर्ट मिली है, उससे पता चलता है कि फसल अच्छी है। 
देश में खाद्य तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से, केंद्र सरकार ने रविवार को राज्यों को जिंस पर स्टॉक सीमा लगाने का निर्देश दिया। लेकिन शाह ने कहा कि इस तरह के किसी भी कदम का उल्टा असर होगा। तेल की कीमतों में पहले से ही सुधार और स्टॉक सीमा देखने को मिलनी शुरू हो गई थी, जब खरीफ सीजन के तिलहन बाजार में आने लगे थे। केवल एपीएमसी में तिलहन की कीमतों पर दबाव रहेगा, खासकर जब चीन बाजार में दिखाई नहीं दे रहा है।

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