ई-कॉमर्स नीति पर सभी हितधारकों के बीच सहमति बनाने की कोशिश

ई-कॉमर्स नीति पर सभी हितधारकों के बीच सहमति बनाने की कोशिश
नए ई-कॉमर्स नियमों पर फिर होगा मंथन
आगामी सप्ताह कई मंत्रालयों की होगी बैठक 
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । नए ई-कॉमर्स नियमों को लेकर केद्र सरकार एक बार फिर से सभी हितधारकों के बीच आपसी सहमति बनाने के कार्य में जुट गई है।जिसके तहत अलग-अलग मंत्रालय इस बारे में अगले सप्ताह बैठक कर सकते हैं ।इस बैठक में सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों की आपत्तियों के साथ-साथ हितधारकों की तरफ से उठाए गए सवालों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
दरअसल केद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए नियमों को लेकर केद्रीय वाणिज्य और वित्त मंत्रालय के साथ-साथ नीति आयोग ने भी नियमों की सख्ती को स्वीकार किया था।ऐसे में अब ई-कॉमर्स उपभोक्ता संरक्षण नियमों के मसौदे में नरमी देखी जा सकती है।हालांकि देश के खुदरा कारोबारियों के अग्रणी संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने अभी से इसके खिलाफ आवाज उठानी शुरु कर दी है।जिसको लेकर कैट की तरफ से कहा जा रहा है कि यदि ई-कॉमर्स नियमों को नरम किया गया तो इसका फायदा ई-कॉमर्स कंपनियों को होगा जो क पहले से ही छोटे कारोबारियों के लिए मुसीबत बनी हुई है।वहीं नीति आयोग की तरफ से भी इन प्रस्तावों पर असहमति जाहिर की थी।जिसको लेकर नीति आयोग का मानना था कि यदि इतनी अधिक सख्ती बरती जाएगी तो कारोबारी सुगमता प्रभावित होगी और कारोबारियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।इसके अतिरिक्त नए ई-कॉमर्स नियमों में प्रस्ताव किया गया है कि यदि कोई उत्पाद खराब निकलता है तो उसकी जिम्मेदारी उस प्लेटफार्म की ही होगी जिसके जरिए उत्पाद बेचा जा रहा है।मौजूदा उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत इसका जिम्मेंदार निर्माता या फिर विक्रेता होता है।ऐसे में कारोबार प्रभावित होने की आंशंका जाहिर करते हुए सवाल उठाए गए हैं ।
बहरहाल अब नए ई-कॉमर्स नियमों को नए सिरे से होने जा रहे मंथन में फ्लेश सेल और बड़े डिस्काउंट पर रोक हटने का फैसला संभव है।जिसको लेकर कारोबारियों ने केद्र सरकार को सीधे अपने फीडबैक में इसे जारी रखने का सुझाव दिया है।

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