बांग्लादेश प्याज तथा चीनी की आयात डय़ूटी रद्द करने की तैयारी में

बांग्लादेश प्याज तथा चीनी की आयात डय़ूटी रद्द करने की तैयारी में
भारत के लिए निर्यात व्यापार बढ़ाने के उज्ज्वल अवसर
डी. के.
मुंबई। बांग्लादेश में त्योहारों के दिनों में महंगाई नियंत्रित करने के लिए बांग्लादेश सरकार खाद्यतेल, चीनी तथा प्याज की आयात डय़ूटी रद्द करने का विचार कर रही है। जिससे भारत के लिए प्याज और चीनी का निर्यात बढ़ाने के लिए उज्ज्वल अवसर उत्पन्न हुए हैं ।
बांग्लादेश के कॉमर्स मंत्री टीपू मुंशी ने बताया कि पड़ोशी देशों के साथ व्यवसायिक संबंध सुदृढ़ होने से आगामी दिनों में देश में महंगाई बढ़ाने के अफवाह फैलाने वाले अब सफल नहीं हो सकते। बांग्लादेश के पास आगामी 5,00,000 टन प्याज का स्टाक है जो तीन महीने तक चल सकता है बाकी आपूर्ति स्थिति बरकरार रहे उसके लिए हमनें बोर्ड आफ रेवन्यू (एनबीआर) को खत लिखकर शीघ्र ही इम्पोर्ट डय़ूटी समाप्त करने की सिपारिश की है। यहां उल्लेखनीय है कि गत वर्ष भारत में प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध था। इसके बावजूद भी बांग्लादेश सरकार के अनुरोध को मानकर भारत ने सितंबर 2020 में शीघ्र 25,000 टन प्याज निर्यात को मंजूरी दी थी और 250 ट्रक प्याज भरकर तुरंत बांग्लादेश भेजा था।
बांग्लादेश के कॉमर्स सचिव तपन घोष ने बताया कि चीनी के आयात पर लगाई गयी अतिरिक्त आयात डय़ूटी तथा खाद्यतेल पर वैट को कुछ समय तक समाप्त करने का प्रस्ताव किया है। प्याज पर लगाई गई 5 प्र.श. आयात डय़ूटी भी आगामी चार महीने के लिए रद्द करने की सिपारिश की है। गत वर्ष भी यह कदम उठाया गया था जिसका देशवासियों को लाभ होने से सरकार इस बार भी आशावादी है। हालांकि भारत में ही खाद्यतेलों की कमी होने से निर्यात की संभावना कम है, लेकिन चीनी मिलें इस कदम का विशेष लाभ उठा सकती है। क्योंकि भारत में नए सीजन की चीनी के उत्पादन के लिए 15 अक्टूबर 2021 से मिलें शुरू करने की घोषणा की गयी है। आगामी दिनों में चीनी पूरजोर उत्पादन शुरू होगा। शायद महाराष्ट्र चीनी का उत्पादन उत्तर प्रदेश की तुलना में अधिक होने की संभावना है। ऐसी परिस्थिति में बांग्लादेश आयात में राहत दे तो भारत, विशेषकर महाराष्ट्र के गन्ना किसानों और शुगर मिलों को लाभ हो सकता है। भारत परंपरागररूप से बांग्लादेश में चीनी का निर्यात करता है और भारत से होते चीनी निर्यात में बांग्लादेश टाप-10 देशों में एक है।

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