काली मिर्च का उत्पादन घटने की आशंका से भाव में आई गर्मी

काली मिर्च का उत्पादन घटने की आशंका से भाव में आई गर्मी
कोच्चि। खराब मौसम और असमान फसल सेटिंग से मौजूदा फसल सीजन (अक्टूबर 2021-सितंबर 2022) के लिए काली मिर्च के उत्पादन में कमी आने की संभावना है। उत्पादकों और कारोबारियों को पिछले सीजन के लगभग 65,000 टन के उत्पादन की तुलना में काली मिर्च के उत्पादन में 30-35 प्रतिशत की गिरावट का डर है। 
कम फसल की प्रत्याशा में, काली मिर्च की कीमतों में उछाल आना शुरू हो गया है और वर्तमान में यह तीन साल के उच्चतम स्तर पर है। इससे किसानों में खुशी का माहौल है क्योंकि जल्द ही बिना गारबेज वाली किस्मों के लिए कीमतें 500 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंचने के लिए तैयार हैं। कोच्चि टर्मिनल बाजार में मंगलवार को गार्बल्ड वैरायटी के बंद भाव 494  रुपए और 514 रुपए था। कारोबारियों ने कीमतों में बढ़ोतरी का श्रेय एंड-यूजर्स की बढ़ती घरेलू मांग और बाजार में फसल की अनुपलब्धता को दिया। साथ ही, मौजूदा स्थितियां आयात को बढ़ा सकती हैं। 
मदिकेरी, कोडागु में काली मिर्च उत्पादकों के संघ के  विश्वनाथ केके ने कहा कि हमें उम्मीद है कि इस साल फसल 30-35 प्रतिशत कम होगी। विश्वनाथ ने कहा, फसल की सेटिंग एक समान नहीं थी और मौजूदा खराब मौसम इसे प्रभावित कर रहा है। फसल 35,000-40,000 टन होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि केरल में भी स्थिति अलग नहीं है, जहां फसल प्रभावित हुई है। 
यूपीएएसआई के उपाध्यक्ष जेफरी रेबेलो ने कहा कि मौजूदा गीली परिस्थितियों के परिणामस्वरूप उत्पादकों को कम फसल मिल सकती है। यूपीएएसआई को भी इस साल फसल के 30-35 फीसदी कम रहने की उम्मीद है। 
केपीए के अध्यक्ष एस अप्पादुरई ने कहा कि मौजूदा बारिश के कारण उत्पादकों को अधिक उत्पादन लागत का सामना करना पड़ता है क्योंकि उन्हें फंगल संक्रमण को रोकने के लिए अतिरिक्त छिड़काव करना पड़ता है। 
प्लांटर्स कंसोर्टियम के इंडियन पेपर एंड स्पाइसेस ट्रेडर्स के कॉर्डिनेटर किशोर शामजी ने कहा कि खराब मौसम ने जनवरी-दिसंबर मार्केटिंग सीजन में उत्पादन को प्रभावित किया है, जिससे किसानों को नकदी के लिए सीजन के अंत में उपलब्ध स्टॉक को बेचने पर मजबूर होना पड़ा है। इसके परिणामस्वरूप स्टॉक में कमी आई है, जिससे बाजार में आपूर्ति की स्थिति खराब हो गई है। 
नवरात्रि के बाद से त्योहार की मांग और कोविड के नियमों में ढील के बाद अर्थव्यवस्था के खुलने, उपनगरीय बाजारों में शादियों की शुरुआत, होटल और खानपान इकाइयां खोलने - सभी से काली मिर्च पावडर की अच्छी मांग निकली है। उपलब्ध मात्रा सीमित है, जिससे कीमतों में तेजी आई है। 
हालांकि, शामजी ने कहा कि कीमतों में उछाल और घरेलू बाजार में फसल की अनुपलब्धता से अन्य उत्पादक देशों में प्रचलित काली मिर्च की कम कीमतों को देखते हुए कानूनी और अवैध आयात दोनों के बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी नेपाल और म्यांमार की सीमाओं से अवैध मार्ग़ों से काली मिर्च के आयात के पुराने उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय कीमत 7,500 डॉलर प्रति टन के मुकाबले वियतनाम काली मिर्च की कीमतें 4,500 डॉलर, श्रीलंका में 5,500 डॉलर, ब्राजील 4400 डॉलर और इंडोनेशिया 4500 डॉलर पर हैं। 
फसल के आकार के बारे में, शामजी ने कहा कि इस मौसम में फसल की उपलब्धता खराब रहने की आशंका है क्योंकि जलवायु संबंधी अनिश्चितताएं हैं। हालांकि, वास्तविक तस्वीर का पता  2-3 सप्ताह के बाद लगाया जा सकता है, लेकिन यह आंकड़ा पिछले साल के 65,000 टन की तुलना में 35,000-40,000 टन के दायरे में होने की संभावना है। 
काली मिर्च के प्राइस आउटलुक पर उन्होंने कहा कि यह अल्पावधि में 600 और 800 रुपए प्रति किलोग्राम के बीच की सीमा में होगा। कुछ किसान कीमतों में और वृद्धि की उम्मीद में स्थिति को भुनाने के लिए फसल को रोक रहे हैं। इस साल जनवरी से अक्टूबर के बीच देश में कुल काली मिर्च का आयात भी 24,304 टन पहुंच गया है और इसमें श्रीलंका से आई 7,147 टन काली मिर्च शामिल है। श्री लंका से अक्टूबर में आयात 1,835 टन रहा, जो सितंबर में 1,595 था। 

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