चालू गन्ना पेराई मौसम : चालू माह के मध्य तक 24% बढ़कर 21 लाख टन

चालू गन्ना पेराई मौसम : चालू माह के मध्य तक 24% बढ़कर 21 लाख टन
अब तक मिलों ने 25 लाख टन चीनी निर्यात के किए अनुबंध
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । निजी चीनी मिलों की अग्रणी संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) की तरफ से कहा गया है कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में चीनी का उत्पादन अधिक होने के चलते देश में चीनी का उत्पादन पहली अक्टूबर से लेकर पद्रह नवम्बर तक 24 प्रतिशत बढकर 20.9 लाख टन हो गया है।वहीं चीनी मिलों ने अभी तक 25 टन चीनी निर्यात करने को लेकर अनुबंध किया है। 
दरअसल इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) की तरफ से अपने बयान में कहा गया है कि चालू गन्ना पेराई मौसम 2021-22 में चालू माह के मध्य यानी 15 नवम्बर 201 तक चीनी का उत्पादन 20.90 लाख टन हुआ है जो कि पिछले गन्ना पेराई मौयम 2020-21 में 15 नवम्बर तक चीनी का उत्पादन 16.82 लाख टन हुआ था।वही इस्मा की तरफ से कहा गया है कि देश के दक्षिण और पश्चिम राज्यों में कई चीनी मिलों ने चालू गन्ना पेराई मौसम की शुरुआत में ही चीनी का परिचालन शुरु कर दिया था जिससे चीनी का उत्पादन अधिक हुआ है।वहीं उत्तर प्रदेश में अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में हुई बेमौसमी बरसात के चलते चालू गन्ना पेराई मौसम में चीनी मिलों में गन्ना पेराई का काम शुरु होने में विलंब हुई थी।जिसके चलते समीक्षाधीन अवधि के तहत उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन पहले के चार लाख टन से घटकर 2.88 लाख टन रह गया है।बहरहाल महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन छह लाख टन बढकर 8.91 लाख टन हो गया।वहीं चालू गन्ना पेराई मौसम में चालू माह के मध्य तक कर्नाटक में चीनी का उत्पादन बढकर 7.62 लाख टन हो गया जो कि एक साल पहले की अवधि में 5.66 लाख टन था।वहीं इस्मा में आगे कहा कि बंदरगाह की जानकारी और बाजार की रिपोर्ट के तहत अभी तक चीनी निर्यात के लिए लगभग 25 लाख टन अनुबंध किए जा चुके हø।जिसमें से लगभग 2.7 लाख टन चीनी का निर्यात अक्टूबर 2021 में किया गया।वहीं पिछले साल इसी महीने में चीनी का निर्यात 1.96 लाख टन किया गया था।वहीं नवम्बर 2021 में भौतिक रुप से निर्यात किए जाने के लिए दो लाख टन से अधिक चीनी पाइपलाइन में है।वहीं इस्मा की तरफ से कहा गया है कि अक्टूबर 2021 तक 81.75 लाख टन चीनी का शुरुआती स्टॉक था और 305 लाख टन के अनुमानित चीनी उत्पादन के साथ भारत के लिए एक और अधिशेष चीनी वाला वर्ष साबित होगा और 2021-22 के सत्र के तहत देश से लगभग 60 लाख टन अधिशेष चीनी का निर्यात जारी रखने की आवश्यकता होगी।

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