पहली जनवरी से कपड़े पर जीएसटी की दर होगा 12 प्र.श.

पहली जनवरी से कपड़े पर जीएसटी की दर होगा 12 प्र.श.
उद्योग-व्यापार जगत की शीघ्र रोलबैक करने की गुजारिश
हमारे संवाददाता 
नई दिल्ली । केद्र सरकार की तरफ से 18 नवम्बर 2021 को सभी तरह के कपड़े पर अगले वर्ष पहली जनवरी से जीएसटी की दर 5 प्रतिशत से बढाकर 12 प्रतिशत करने की अनुमति दे दी गई है।जिसको लेकर कपड़ा और परिधान उद्योग जगत की तरफ से इस फैसले पर अविलम्ब रोलबैक करने की गुजारिश की गई है ताकि कपड़ा और परिधान का कारोबार आगे भी सुधार की ओर अग्रसर हो सकेगा।वैसे भी पिछले काफी अर्से से कच्चे माल की कीमतों में बेहताशा मूल्य वृद्वि हो रखी है।जिससे कपड़ा उद्योग की लागत काफी बढ रखी है।जिससे कपड़ा काफी मंहगा पड़ रहा है और आगे भी मंहगा होने की आशंका है। जिससे कपड़ा उद्योग व्यापार प्रभावित हो रहा है और आगे भी प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।ऐसे में स्वभाविक है कि कपड़े की खरीदी करने में उपभोक्ताओं को भी महंगाई से सीधे तौर पर रुबरु होना पड़ेगा।वहीं कोरोना काल के बाद कपड़ा उद्योग व्यापार जगत किसी तरह से सुधार की ओर अग्रसर हो रखा है जिसकी रफ्तार धीमी नहीं की जाए और इस फैसले पर केद्र सरकार को गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिए ताकि कपड़ा उद्योग व्यापार सुधार की राह पर अग्रसर हो सकेगा। 
मुंबई की ख्याति प्राप्त नवसारी कॉटन मिल्स के निदेशक श्री सुभाष जैन ने बताया कि जैसा कि केन्द सरकार की तरफ से अगले वर्ष पहली जनवरी से सभी तरह के कपड़े पर जीएसटी की दर 5 प्रतिशत से बढाकर 12 प्रतिशत करने की अनुमति दे दी गई है।जिससे कपड़ा उद्योग के समक्ष कार्यशील पूंजी के मद में अधिक निवेश करना पड़ेगा।जिससे कपड़ा उत्पादन की लागत काफी बढेगी।जिससे कपड़ा महंगा होगा।ऐसे में स्वभाविक है कि कपड़े की बिक्री प्रभावित होगी।श्री जैन ने आगे बताया कि पिछले काफी अर्से से यार्न,कलर,कैमिकल आदि की कीमतों में बेतहाशा वृद्वि हो रखी है।जिससे कपड़ा की उत्पादन लागत पहले से ही काफी बढ रखी है।ऐसे में कपड़े पर जीएसटी की दर बढाने से कपड़ा व्यापार-उद्योग जगत को जोर का झटका लगेगा।ऐसे में श्री सुभाष जैन ने केद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से अनुरोध किया है कि कपड़े पर जीएसटी की बढी दर पर अविलम्ब रोकबैक किया जाए ताकि कपड़े की उत्पादन और वितरण व्यवस्था सुचारु पूर्वक चलायमान रह सकेगा।श्री जैन ने आगे बताया कि कपड़ा उद्योग की तरफ से केद्र सरकार से पिछले काफी अर्से से जीएसटी की फाइलिंग करने में कपड़े के कच्चे माल व कपड़े पर जीएसटी की दर में अंतर रहने से मिसमैच की समस्याएं आ रही थी जिसको लेकर कच्चे माल और कपड़े पर जीएसटी की दर न्यूनतम स्तर पर एक समान करने की मांग की जा रही थी।जिसे पूर्णरुप से दुरुस्त नहीं किया गया है जिस पर अमल करने की आवश्यकता है।
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर की सावित्री टेक्सटाइल के निदेशक श्री रमेश दीक्षित ने बताया कि केद्र सरकार की तरफ से अगले वर्ष में पहली जनवरी से सभी तरह के कपड़े पर जीएसटी की दर 5 प्रतिशत से बढाकर 12 प्रतिशत आरोपित करने की अनुमति दी गई है।जिससे कपड़ा उद्योग में कार्यशील पूंजी बढेगी क्योंकि कपडा उद्यमियों के पास पेमेंट तो तीन-चार महीने तक में वापस आती है और जीएसटी की फाइलिंग प्रत्येक महीने करनी होती है।जिससे कपड़ा उद्यमियों को पूंजी का व्यय बढना लाजमी है।श्री दीक्षित ने बताया कि कॉटन यार्न पर जीएसटी की दर को 5 प्रतिशत यथावत् रखी गई है।बहरहाल कॉटन यार्न से निर्मित कपड़े पर जीएसटी की दर को 5 प्रतिशत से बढाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया है।जिससे कपड़ा उद्योग को जीएसटी रिटर्न फाइलिंग करने में मिसमैच की परेशानी अभी भी पूर्ववत् बनी रहेगी।ऐसे में इस समस्या का हल कैसे निकलेगा जिस पर अभी भी प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है।श्री दीक्षित ने आगे बताया कि आम से लेकर खास तक को रोटी,कपड़ा और मकान की आवश्यकता होती है।बहरहाल कपड़ा पहले से महंगा हो रखा है और आगे जीएसटी की दर बढने से कपड़ा और महंगा होगा।जिससे आमजनमानस को कपड़े की महंगाई से निश्चित तौर पर रुबरु होना पड़ेगा।ऐसे में मोदी सरकार से गुजारिश है कि कपड़े पर जीएसटी की बढी दर को वापस लिया जाए ताकि कपड़े का कारोबार भविष्य में सुचारु पूर्वक चलायमान रह सकेगा। 
मुंबई की गड़ोदिया सिनटेक्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रमेश गड़ोदिया ने बताया कि देश में आजादी से लेकर जीएसटी लागू होने से पूर्व तक सभी तरह के यार्न और फैब्रिक्क शुल्क मुक्त था।बहरहाल देश में जीएसटी लागू होने के बाद कपड़े पर न्यूनतम जीएसटी की दर 5 प्रतिशत आरोपित किया गया था।बहरहाल देश में जीएसटी लागू होने के बाद कॉटन फाइबर पर जीएसटी 5 प्रतिशत तथा सिंथेटिक्स फाइबर पर जीएसटी 12 प्रतिशत आरोपित किया गया था।जिसको लेकर कपड़ा उद्योग की तरफ से केद्र सरकार से मांग की जा रही थी कि सभी तरह के यार्न और कपड़े पर जीएसटी की दर न्यूनतम एक समान 5 प्रतिशत आरोपित किया जाए बहरहाल उलटे मेन मेड फाइबर व यार्न और सभी तरह के कपड़े पर जीएसटी की दर को 5 प्रतिशत से बढकर 12 प्रतिशत करने की अनुमति दे दी गई है।जिससे कपड़ा व्यापार व उद्योग को जोर का झटका लगेगा।वैसे भी कोरोना काल से कपड़ा उद्योग व्यापार उबर ही रहा है कि केन्द सरकार की तरफ से सभी तरह के कपड़े पर जीएसटी की दर 5 प्रतिशत बढाकर 12 प्रतिशत किया गया है जो कि न्यायोचित नहीं है।ऐसे में केद्र सरकार से गुजारिश है कि सभी तरह के कपड़े पर जीएसटी की बढी दरों पर पुन: विचार करे और कपड़े पर जीएसटी की दर ै 5 प्रतिशत की श्रेणी में ही यथावत् रखी जाए ताकि कपड़ा उद्योग व्यापार सुव्यवस्थित पूर्वक उत्पादन से लेकर विपणन के मोर्चे पर गतिशील हो सकेगा।
ईरोड क्लॉथ मर्चेन्ट्स एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य एवं भाजपा के ईरोड जिले के अदर लेंग्वेज सेल (ओएलसी) के अध्यक्ष श्री अशोक जैन ने बताया कि केद्र सरकार की तरफ से अगले वर्ष पहली जनवरी से सभी तरह के कपड़े पर जीएसटी की दर 5 प्रतिशत से बढाकर 12 प्रतिशत करने की अनुमति दे दी गई है।जिससे कपड़ा व्यापार उद्योग जगत को जोर का झटका लगेगा।वहीं कपड़े के उपभोक्ताओं को महंगाई से विशेष रुप से जूझना पड़ेगा।श्री जैन ने मोदी सरकार के वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से गुजारिश की है कि कृषि कानून को जिस तर्ज पर वापस लिया गया है उसी तर्ज पर कपड़े पर बढाई गई जीएसटी की दर को अविलम्ब वापस लिया जाए ताकि कपड़ा व्यापार उद्योग जगत सुधार की राह पर अग्रसर बना रह सकेगा। श्री जैन ने आगे बताया कि कपड़ा व्यापारी और उद्यमी शांतिप्रिय हø और राष्ट्रवाद है और कोई आंदोलन या सड़क जाम करने की मंशा नहीं रखते हø जिससे कि देश को कोई आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा।ऐसे में इस तथ्य को गंभीरता से देखते हुए केद्र सरकार को कपड़ा उद्योग व्यापार से संबंािधित जीएसटी सिस्टम को दुरुस्त करने की आवश्यकता है।         

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